Employment Updates 2026: 3.44 लाख नई MSME इकाइयों से 45 लाख को मिलेगा रोजगार, सीएम ने रोजगार आंकड़ों पर विपक्ष को घेरा
भोपाल | मध्य प्रदेश में उद्योगों और औद्योगिक गतिविधियों को तीव्र गति देने के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ा रणनीतिक फैसला लिया है। अब प्रदेश में सरकारी जमीन के अलावा निजी जमीनों पर भी निजी औद्योगिक पार्क (Private Industrial Parks) विकसित किए जाएंगे। इन निजी औद्योगिक पार्कों के बुनियादी इंफ्रास्ट्रक्चर और अधोसंरचना विकास के लिए राज्य सरकार द्वारा प्रति हेक्टेयर 50 लाख रुपये की अनुदान राशि प्रदान की जाएगी।
भोपाल स्थित मुख्यमंत्री निवास परिसर में आयोजित एमएसएमई (MSME) विभाग के राज्य स्तरीय कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने यह ऐतिहासिक ऐलान किया। इसके साथ ही प्रदेश में एमएसएमई और बड़े उद्योगों को बढ़ावा देने तथा भूमि व वित्त प्रबंधन को सुगम बनाने के लिए सरकार ने एक अलग ‘औद्योगिक विकास कंपनी’ गठित करने का भी महत्वपूर्ण निर्णय लिया है।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने प्रदेश की 950 एमएसएमई इकाइयों को 490 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि (सब्सिडी) भी सीधे हस्तांतरित की।
🚜 ‘जिले में जमीन कम है तो प्राइवेट पार्क बनाएं’—एमएसएमई को आगे बढ़ाने के लिए सीएम की अपील
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एमएसएमई क्षेत्र को मजबूत करने के लिए विजन साझा किया:
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1300 करोड़ से ज्यादा का अनुदान दिया: सीएम ने बताया कि प्रदेश में पिछले एक वर्ष के भीतर 2,930 इकाइयों को 1,300 करोड़ रुपये से अधिक का सरकारी अनुदान दिया जा चुका है।
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जमीन की कमी दूर करने की पहल: प्रदेश के 55 जिलों में से आधे जिलों में एमएसएमई उद्योगों के लिए पर्याप्त भूखंड उपलब्ध नहीं हैं। चूंकि उद्योग का मुख्य आधार जमीन (Land) ही है, इसलिए यदि सरकार के पास जमीन कम है तो निजी पार्कों को तेजी से प्रोत्साहित किया जाए।
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बहुमंजिला इंडस्ट्री और नया मास्टर प्लान: सरकार ने बहुमंजिला इमारतों (Multistory Buildings) में औद्योगिक इकाइयां स्थापित करने की योजना बनाई है और नए मास्टर प्लान में इसके विशेष प्रावधान शामिल किए गए हैं।
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फूड पार्कों पर विशेष जोर: चालू वर्ष को ‘कृषि वर्ष’ के रूप में मनाते हुए उज्जैन, जबलपुर, मालवा और महाकौशल सहित जहां भी आवश्यकता हो, वहां कृषि आधारित फूड पार्क (Food Parks) स्थापित करने के लिए अधिकारियों को ठोस प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।
🏢 प्रदेश में समान निवेश के लिए गठित होगी ‘औद्योगिक विकास कंपनी’
उद्योगों की स्थापना और वित्तीय सहायता को सरल बनाने के लिए नई व्यवस्था लागू की जा रही है:
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भूमि व वित्त प्रबंधन: प्रस्तावित ‘औद्योगिक विकास कंपनी’ राज्य भर में एमएसएमई से लेकर बड़े उद्योगों तक के लिए भूमि अधिग्रहण, भूमि प्रबंधन और वित्त प्रबंधन (Financial Management) की नोडल एजेंसी के रूप में काम करेगी।
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समान निवेश वितरण: इस कंपनी के माध्यम से प्रदेश के सभी अंचलों में समान रूप से निवेश बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि हर जिले में औद्योगिक विकास का संतुलन बना रहे।
👩💼 महिला उद्यमियों की मिसाल: 4 लाख से ज्यादा एमएसएमई इकाइयां चला रही हैं बहनें
मुख्यमंत्री ने प्रदेश की महिला शक्ति और रोजगार आंकड़ों पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की:
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2025-26 में 3.44 लाख नई इकाइयां: वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्रदेश के भीतर 3 लाख 44 हजार से अधिक नई एमएसएमई इकाइयां पंजीकृत हुई हैं, जिससे आने वाले समय में 45 लाख से अधिक लोगों को रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे।
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महिला सशक्तिकरण: प्रदेश में मौजूद 25 लाख से अधिक एमएसएमई इकाइयों में से 4 लाख से ज्यादा इकाइयां महिलाएं संभाल रही हैं। कई क्षेत्रों में बहनें पुरुषों से आगे निकलकर स्वस्थ प्रतिस्पर्धा का उदाहरण पेश कर रही हैं।
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पोर्टल पर डेटा दर्ज करने का निर्देश: मंच पर मौजूद एमएसएमई मंत्री चैतन्य काश्यप को निर्देशित करते हुए सीएम ने कहा कि रोजगार पंजीयन का यह प्रामाणिक आंकड़ा शासकीय पोर्टल (आईटीआई/रोजगार पोर्टल) पर जरूर दर्ज कराया जाए।
सीएम ने विपक्ष पर तीखा तंज कसते हुए कहा कि रोजगार के काल्पनिक आंकड़े कहां से लाए जाते हैं, यह समझ से परे है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में उद्योग और रोजगार के इतने अवसर हैं कि यदि विरोधी भी रोजगार चाहेंगे तो उन्हें भी रोजगार उपलब्ध करा दिया जाएगा।