Rajyotsav Updates: 1 से 3 नवंबर तक सजेगा मध्य प्रदेश की संस्कृति का अनूठा बाजार, सीएम मोहन यादव करेंगे शुभारंभ

मध्य प्रदेश के गठन को 71 साल पूरे हो चुके हैं। आज ही के दिन (1 नवंबर 1956 को) मध्य प्रदेश आधिकारिक तौर पर अस्तित्व में आया था। इस गौरवशाली अवसर पर राजधानी भोपाल में तीन दिवसीय भव्य राज्योत्सव का आयोजन किया जा रहा है। 1 से 3 नवंबर तक ऐतिहासिक लाल परेड ग्राउंड में आयोजित होने वाले इस समारोह की इस बार की थीम ‘विरासत से विकास’ रखी गई है।

इस भव्य उत्सव में प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, लोक परंपराओं, जनजातीय संस्कृति और आधुनिक विकास यात्रा का अनूठा संगम देखने को मिलेगा। समारोह में देश-प्रदेश के 400 से अधिक लोक एवं जनजातीय कलाकार अपनी मनमोहक प्रस्तुतियों से दर्शकों को मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक विविधता से रूबरू कराएंगे।

📜 कैसा रहा इतिहास? जानिए—कैसे अस्तित्व में आया था मध्य प्रदेश

देश की आजादी के बाद रियासतों और राज्यों के पुनर्गठन को लेकर लंबी मशक्कत चली थी। इसके लिए राज्य पुनर्गठन आयोग का गठन किया गया था:

  • महाकौशल के नेताओं की बैठक: आयोग के समक्ष तमाम तथ्य और सिफारिशें रखने के लिए पंडित रविशंकर शुक्ल के नेतृत्व में महाकौशल के प्रमुख नेताओं ने बैठक की थी। इसमें महाकौशल, मध्य भारत, भोपाल और विंध्य प्रदेश के क्षेत्रों को मिलाकर एक एकीकृत बृहत् प्रदेश की रचना का प्रस्ताव रखा गया।

  • 34 महीने का सफर: लगभग 34 महीनों की प्रशासनिक प्रक्रिया के बाद अंततः मध्य प्रदेश का नया स्वरूप दुनिया के सामने आया।

🏛️ ग्वालियर की जगह क्यों चुनी गई भोपाल राजधानी?

राज्यों के पुनर्गठन के लिए 29 दिसंबर 1953 को राज्य पुनर्गठन आयोग बनाया गया था, जिसके अध्यक्ष न्यायमूर्ति सैयद फजल अली तथा सदस्य डॉ. के.एम. पणिक्कर और पंडित हृदयनाथ कुंजरू थे।

  • ग्वालियर की मांग: 1 नवंबर 1956 को जब संपूर्ण मध्य प्रदेश अस्तित्व में आया, तो चंबल अंचल के नेताओं ने तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के सामने यह पुरजोर मांग रखी थी कि ग्वालियर को प्रदेश की राजधानी बनाया जाए।

  • वजह: इसका मुख्य कारण यह था कि पूर्ववर्ती ‘मध्य भारत’ राज्य की राजधानी ग्वालियर ही थी और वहां मध्य प्रदेश के अधिकांश विभागों के प्रमुख एवं बड़े दफ्तर पहले से मौजूद थे। हालांकि, प्रशासनिक और भौगोलिक सुगमता को ध्यान में रखते हुए अंततः भोपाल को मध्य प्रदेश की राजधानी बनाया गया।

🎤 मोनाली ठाकुर और मामे खान बिखेरेंगे जलवा, मुख्यमंत्री करेंगे शुभारंभ

संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में जानकारी दी कि 1 नवंबर की शाम 6:30 बजे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव राज्योत्सव का भव्य शुभारंभ करेंगे। इस समारोह के मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री होंगे:

  • वंदे मातरम् से शुरुआत: कार्यक्रम की शुरुआत सामूहिक ‘वंदे मातरम्’ गायन से होगी, जिसके बाद राष्ट्रीय गीत और राष्ट्रगान के माध्यम से देशभक्ति का संदेश प्रसारित किया जाएगा।

  • स्टार कलाकारों की प्रस्तुतियां: इस राज्योत्सव में प्रसिद्ध गायिका मोनाली ठाकुर और लोक गायक मामे खान अपने संगीत और गायन से समां बांधेंगे। इसके अलावा मध्य प्रदेश पुलिस बैंड की विशेष प्रस्तुति भी मुख्य आकर्षण का केंद्र रहेगी।

  • सांस्कृतिक विविधता: तीनों दिन अलग-अलग अंचलों के लोक नृत्य, लोक गायन और जनजातीय प्रस्तुतियां मंच की शोभा बढ़ाएंगी। साथ ही भव्य आतिशबाजी और लेजर शो का आयोजन किया जाएगा।

🛍️ हस्तशिल्प, पारंपरिक कला और स्थानीय व्यंजनों का सजेगा बाजार

राज्योत्सव में प्रदेश भर के पारंपरिक शिल्पकारों और बुनकरों को अपनी कला व हुनर प्रदर्शित करने का सुनहरा मंच प्रदान किया जा रहा है:

  • शिल्प मेला: आयोजन स्थल पर हस्तशिल्प, पारंपरिक कलाकृतियों और स्थानीय उत्पादों की बड़ी प्रदर्शनी व बाजार लगाया जाएगा।

  • व्यंजन मेला: यहाँ आने वाले लोग मध्य प्रदेश के पारंपरिक व्यंजनों (फूड्स) का भी लुत्फ उठा सकेंगे।

  • निशुल्क प्रवेश: आम नागरिकों के लिए लाल परेड ग्राउंड में आयोजित इस पूरे तीन दिवसीय मेले और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में प्रवेश पूरी तरह निशुल्क रखा गया है।

💃 राजधानी की सड़कों पर निकली सांस्कृतिक गौरव यात्राएं

स्थापना दिवस के जश्न को जन-जन तक पहुँचाने के लिए भोपाल शहर के प्रमुख मार्गों पर सांस्कृतिक गौरव यात्राएं निकाली गई हैं:

  • इन यात्राओं में मध्य प्रदेश सहित देश के अन्य राज्यों से आए 400 से अधिक लोक एवं जनजातीय कलाकारों ने पारंपरिक वेशभूषा में सजी झांकियों के साथ हिस्सा लिया।

  • कलाकारों ने लोक नृत्य और संगीत के माध्यम से प्रदेश की विविधतापूर्ण संस्कृति की अद्भुत झलक दिखाई, जिसका उद्देश्य आम नागरिकों को अपनी ऐतिहासिक जड़ों और सांस्कृतिक पहचान से जोड़ना है।

🌟 ‘विरासत से विकास’ की परिलक्षित होती तस्वीर

संस्कृति एवं पर्यटन विभाग के प्रमुख सचिव शिवशेखर शुक्ला ने बताया कि इस बार के स्थापना दिवस समारोह को केवल एक औपचारिक आयोजन तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि इसे उत्सव के रूप में ढाला गया है।

‘विरासत से विकास’ की परिकल्पना के तहत एक ओर जहाँ हमारी प्राचीन लोक संस्कृति, कला और परंपराओं का सम्मान हो रहा है, वहीं दूसरी ओर आधुनिक मध्य प्रदेश की तेज विकास यात्रा और उपलब्धियों को भी बड़े पैमाने पर प्रदर्शित किया जा रहा है।

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