World Cup: बांधवगढ़ की धरा से निकलकर इंटरनेशनल हॉकी स्टार बने करण गौतम, शहडोल संभाग में हॉकी का क्रेज चरम पर
उमरिया : मध्य प्रदेश का ऐतिहासिक और प्राकृतिक विरासत से समृद्ध उमरिया जिला बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। लेकिन वर्तमान में यह जिला खेल जगत में अपनी एक नई पहचान और बुलंदी को लेकर सुर्खियों में छाया हुआ है। उमरिया के 18 वर्षीय होनहार हॉकी खिलाड़ी करण गौतम का चयन भारतीय जूनियर हॉकी टीम में हुआ है। करण इसी महीने इजिप्ट में आयोजित होने वाले जूनियर हॉकी वर्ल्ड कप में भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व करते हुए अपनी स्टिक का जादू बिखेरेंगे। उमरिया में हॉकी की दीवानगी कोई नई बात नहीं है, बल्कि आजादी के पूर्व से ही यह जिला हॉकी के होनहार खिलाड़ियों की एक मजबूत नर्सरी के रूप में उभरा है।
🏏 क्रिकेट के वर्चस्व के बीच सिर चढ़कर बोल रहा हॉकी का जादू: रोजाना ग्राउंड में पसीना बहा रहे युवा
उमरिया की अनूठी खेल संस्कृति:
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अलग पहचान: देश के कोने-कोने में जहां हर गली-मोहल्ले में क्रिकेट की दीवानगी और वर्चस्व देखने को मिलता है, वहीं उमरिया में इसके बिल्कुल विपरीत हॉकी का डंका बजता है।
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समर्पित खिलाड़ी: स्थानीय स्तर पर वरिष्ठ खिलाड़ियों का मार्गदर्शन और युवाओं की रुचि के चलते यहां लगातार नई पौध तैयार हो रही है। खेल मैदानों पर आज भी सुबह और शाम युवा खिलाड़ी हाथों में हॉकी स्टिक थामे कठिन अभ्यास करते देखे जा सकते हैं।
🌟 करण गौतम के कठिन संघर्ष और लगन की कहानी: भोपाल एकेडमी से सीधे टीम इंडिया तक का सफर
करण के सिलेक्शन का पूरा गणित:
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अभ्यास और अनुभव: उमरिया की ज्वालामुखी कॉलोनी निवासी 18 वर्षीय करण गौतम वर्ष 2022 से एम.पी. राज्य हॉकी अकादमी भोपाल में अभ्यास कर रहे हैं। वे पिछले 5 वर्षों से मध्य प्रदेश की राज्य टीम का हिस्सा रहे हैं।
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इंडिया कैंप की परीक्षा: करण बताते हैं कि बीते वर्ष इंडिया कैंप के लिए उनका चयन हुआ था, जहां उन्होंने 45 दिनों तक देश भर से आए 40 चुनिंदा बच्चों के साथ अभ्यास किया। इस कठिन प्रक्रिया में पहले 24 खिलाड़ियों का चयन हुआ और फिर अंतिम 11 खिलाड़ियों में स्थान बनाकर करण ने जूनियर विश्व कप का टिकट हासिल किया।
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स्थानीय युवाओं के रोल मॉडल: साथी खिलाड़ी जावेद खान बताते हैं कि करण ने स्थानीय मैदानों से निकलकर नेशनल एकेडमी में कड़ी मेहनत की और आज वह एक अंतरराष्ट्रीय स्तर का खिलाड़ी बन चुका है, जिससे प्रेरित होकर जिले के अन्य युवा भी हॉकी में देश का नाम रोशन करेंगे।
📜 100 साल पुराना है उमरिया का हॉकी इतिहास: प्रथम विश्व युद्ध के दौर से हुई थी शुरुआत
इतिहास और स्वर्णिम काल की कहानी:
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शुरुआती दौर (1919-1927): उमरिया में हॉकी का इतिहास प्रथम विश्व युद्ध से भी पुराना माना जाता है। वर्ष 1919 से 1927 के मध्य कॉलरी मैनेजर जॉन ई. टायर और गुलाब स्कूल के प्रथम हेडमास्टर सुंदरलाल भाटिया के कार्यकाल में यहां हॉकी को भरपूर प्रोत्साहन मिला था।
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मेजर ध्यानचंद का प्रभाव: मेजर ध्यानचंद की कप्तानी में भारतीय हॉकी टीम ने 1928, 1932 और 1936 के ओलंपिक में लगातार स्वर्ण पदक (Gold Medals) हासिल किए थे। इस ऐतिहासिक दौर का सीधा प्रभाव उमरिया की खेल संस्कृति पर पड़ा और बच्चों के हाथों में हॉकी स्टिक आम दृश्य बन गई।
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जब मैच के समय बंद हो जाता था पूरा बाजार: वरिष्ठ हॉकी खिलाड़ी मोहम्मद शाहिद (कोल इंडिया SECL) बताते हैं कि एक दौर ऐसा भी था जब उमरिया टीम का मैच होता था तो पूरा शहर और बाजार बंद हो जाता था तथा अमर शहीद स्टेडियम का मैदान दर्शकों से खचाखच भर जाता था। पिछले 15 सालों से शिवम सोंधिया जैसे वरिष्ठ खिलाड़ी आज भी छोटे बच्चों को मैदान में हॉकी का नि:शुल्क प्रशिक्षण दे रहे हैं।