Cow Godhbhrai: गर्भवती महिला की तरह सजाया घर, गौमाता के लिए रखी गोदभराई की रस्म; जानिए पूरी अनूठी कहानी

बुरहानपुर: सनातन धर्म में गाय को माता और जगत जननी का दर्जा दिया गया है। यही वजह है कि देश के कई हिस्सों में गौवंश के प्रति लोगों का अगाध और भावनात्मक लगाव देखने को मिलता है। ऐसा ही एक मार्मिक और प्रेरणादायक मामला मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिला मुख्यालय से करीब 20 किलोमीटर दूर स्थित बोरसर गांव से सामने आया है। यहां एक किसान परिवार ने अपनी घर की प्रिय गाय को साक्षात ‘मां लक्ष्मी’ का दर्जा देते हुए उसकी गोदभराई का भव्य कार्यक्रम आयोजित किया, जिसने पूरे समाज के सामने पशु प्रेम की एक बेहतरीन मिसाल पेश की है।

🍲 किसान हरिभाऊ चौधरी ने आयोजित किया सामूहिक भोज; रिश्तेदारों और ग्रामीणों ने की शिरकत

रस्मों और आयोजन का विवरण:

  • भव्य आयोजन: किसान हरिभाऊ चौधरी और उनकी पत्नी बेबाबाई चौधरी ने अपनी गर्भवती गौमाता को अपने परिवार का अहम हिस्सा मानते हुए गोदभराई की रस्म पूरी निष्ठा से संपन्न की।

  • विशेष श्रृंगार और पूजा: इस विशेष अवसर पर गौमाता का फूलों से भव्य श्रृंगार किया गया। पूरे विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की गई और सभी पारंपरिक रस्में निभाई गईं।

  • सामूहिक भोज: इस खुशी के मौके पर पूरे गांव और रिश्तेदारों को निमंत्रण दिया गया था, जिसके बाद कार्यक्रम में शामिल सभी लोगों के लिए एक बड़े सामूहिक भोज का आयोजन किया गया।

🏡 गोदभराई से पहले घर का रंग-रोगन; भजन-कीर्तन के साथ झूले में झुलाया सांकेतिक बच्चा

सांस्कृतिक परंपरा और उल्लास:

  • घर की सजावट: भारतीय संस्कृति में गाय की सेवा को सबसे बड़ा पुण्य माना जाता है। इस आस्था को निभाते हुए किसान हरिभाऊ चौधरी ने गौमाता की गोदभराई की रस्म से पहले अपने पूरे घर का रंग-रोगन और विशेष सजावट करवाई थी।

  • डोहाळे जेवण परंपरा: पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र में ‘डोहाळे जेवण’ यानी गोदभराई की रस्म काफी प्रसिद्ध है, जो गर्भवती महिला और पेट में पल रहे बच्चे के सम्मान में की जाती है। इस दौरान भजन-कीर्तन का आयोजन हुआ और एक खिलौने को सांकेतिक रूप से बच्चा मानकर पालने यानी झूले में झुलाया गया।

❤️ “गौमाता हमारे परिवार का हिस्सा, इसके आने से आई सुख-समृद्धि”

परिवार और ग्रामीणों के विचार:

  • बेबाबाई चौधरी का बयान: किसान बेबा बाई चौधरी ने बताया, “गौमाता हमारे परिवार की एक सदस्य की तरह है। हमारे यहां जब भी कोई महिला गर्भवती होती है, तो गोदभराई की जाती है। गौमाता भी हमारे परिवार का अभिन्न हिस्सा है। इसके आने के बाद से घर में सुख-समृद्धि और खुशियों की बहार आई है, इसलिए हम इसे लक्ष्मी का स्वरूप मानते हैं।”

  • पशुधन और संस्कृति: ग्रामीण रमाकांत वासुदेव मोरे ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों के पास पशुधन बहुतायत में होता है, लेकिन इस तरह का अनोखा आयोजन कर परिवार ने भारतीय संस्कृति और पशु प्रेम की एक अनूठी और अनुकरणीय मिसाल कायम की है।

मालवा अभीतक की ताजा खबर सीधे पाने के लिए : 
ताज़ा ख़बर पाने के लिए एंड्राइड एप्लीकेशन इनस्टॉल करें :

World Cup: बांधवगढ़ की धरा से निकलकर इंटरनेशनल हॉकी स्टार बने करण गौतम, शहडोल संभाग में हॉकी का क्रेज चरम पर     |     Gwalior Fort Updates: क्या है दाता बंदी छोड़ दिवस का इतिहास? जानिए कैसे ग्वालियर किले पर लिखी गई सिख इतिहास की अमर गाथा     |     Cow Godhbhrai: गर्भवती महिला की तरह सजाया घर, गौमाता के लिए रखी गोदभराई की रस्म; जानिए पूरी अनूठी कहानी     |     Ankita Bhandari: बेटी के न्याय के लिए दिल्ली पहुंचे अंकिता भंडारी के माता-पिता, जानिए राजघाट से लेकर अस्पताल तक क्या-क्या हुआ     |     Delhi Updates: चावड़ी बाजार इमारत हादसे पर प्रशासन सख्त, लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर गिरी निलंबन की गाज     |     Indore News: संयुक्त संचालक डॉ. मनीष इंगोले ने बताए साइलेज के फायदे, दो साल तक सुरक्षित रहता है चारा     |     Diwali Special: शुद्धता और परंपरा की मिसाल है छतरपुर की खुरचन, ग्राहकों की लगती है लंबी कतारें     |     Helpline Updates: उज्जैन में एसपी की सख्ती, अस्त्र-शस्त्र के साथ परेड करेंगे लापरवाह पुलिसकर्मी     |     Attack News: जर्जर मकान के खुले दरवाजे से अंदर घुसा तेंदुआ, गरीब परिवार की बेटी की दर्दनाक मौत     |     IPS Transfer: 8 आईपीएस अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से नई जिम्मेदारियां, जानिए किसे कहां भेजा गया     |