Jabalpur News: आग के ढेर पर बैठे हैं शहर के अस्पताल, सरकारी मेडिकल कॉलेज और विक्टोरिया की हालत बेहद खराब
जबलपुर। शहर के शैल्बी हॉस्पिटल में हुई आग की घटना के बाद एक बार फिर जबलपुर के अस्पतालों में भर्ती मरीजों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े बताते हैं कि जिले में 179 पंजीकृत निजी अस्पताल और डायग्नोस्टिक सेंटर संचालित हैं, जिनमें से 30 से 40 प्रतिशत के पास या तो वैध फायर एनओसी (NoC) नहीं है या फिर उनकी एनओसी की अवधि समाप्त हो चुकी है। हर बड़े हादसे के बाद कागजी जांच, नोटिस और सीलिंग की खानापूर्ति की जाती है, लेकिन कुछ ही महीनों बाद स्थिति फिर से जस की तस हो जाती है, जिसके कारण अस्पतालों में आग लगने की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं।
🔥 हर तीन महीने में एक आग की घटना, ओवरलोडेड बिजली लोड और पुरानी वायरिंग बन रही नासूर
पिछले दो वर्षों में जबलपुर के अस्पतालों में आग लगने की 12 से अधिक छोटी-बड़ी घटनाएं सामने आ चुकी हैं। कभी जबलपुर हॉस्पिटल के जनरेटर रूम में आग, तो कभी कटंगी पीएचसी में ट्रांसफार्मर ब्लास्ट या मदनमहल के अस्पतालों में एसी शॉर्ट सर्किट की घटनाएं इसका प्रमाण हैं। सीएमएचओ कार्यालय के रिकॉर्ड के मुताबिक, हर 3 महीने में एक आग की घटना सामने आ रही है। मुख्य वजहों में ओवरलोडेड बिजली लोड, दशकों पुरानी वायरिंग, 24 घंटे चलने वाले एसी, ऑक्सीजन लाइन के पास ज्वलनशील सामग्री का होना और स्टाफ को फायर एक्सटिंग्विशर चलाने तक का प्रशिक्षण न होना शामिल है। नगर निगम की फायर शाखा के अनुसार, 60 फीसदी अस्पतालों में फायर हाइड्रेंट में पानी का पर्याप्त प्रेशर तक नहीं है।
🏛️ सरकारी मेडिकल कॉलेज और विक्टोरिया अस्पताल की स्थिति सबसे डरावनी, कागजों पर चल रही व्यवस्थाएं
निजी अस्पतालों के अलावा सरकारी अस्पतालों का हाल और भी ज्यादा भयावह है। 2300 बेड वाले मेडिकल कॉलेज अस्पताल में रोज 1000 से अधिक मरीज आते हैं, लेकिन यहां बिजली का पूरा लोड 1960-70 के दशक की पुरानी वायरिंग पर चल रहा है। पिछले एक साल में शॉर्ट सर्किट से धुआं उठने की 4 घटनाएं हो चुकी हैं, और 200 में से 60 फायर एक्सटिंग्विशर एक्सपायर हो चुके हैं। यही हाल 150 साल पुराने विक्टोरिया जिला अस्पताल का है, जहां लकड़ी के दरवाजे और पुरानी फॉल्स सीलिंग आग को बुलावा दे रही है। स्वास्थ्य विभाग और निगम के दावों के बीच विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक फायर सेफ्टी को पंजीयन नवीनीकरण से नहीं जोड़ा जाएगा, तब तक किसी बड़े हादसे को टालना मुश्किल होगा।