Gwalior Traffic Police: स्कूली बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़, नियमों को ताक पर रखकर दौड़ रहे अनफिट वाहन
ग्वालियर। शहर में स्कूली वाहनों और ऑटो में क्षमता से अधिक बच्चों को ठूंसकर बैठाने का खतरनाक सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। निर्धारित संख्या से कई गुना ज्यादा बच्चों को बैठाकर वाहन चलाना मासूमों की सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा बनता जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि इस गंभीर लापरवाही के बावजूद जिम्मेदार विभागों की ओर से न तो कोई ठोस निगरानी रखी जा रही है और न ही मैदानी स्तर पर कोई प्रभावी कार्रवाई नजर आ रही है। सुबह स्कूल जाते वक्त और छुट्टी के बाद बच्चों को घर छोड़ते समय सुरक्षा मानकों की सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
⚖️ हाई कोर्ट के सख्त निर्देशों के बाद भी नहीं सुधर रहे हालात, लकड़ी की पट्टियां लगाकर बढ़ा रहे सीटें
स्कूली वाहनों में ओवरलोडिंग का यह गंभीर मामला पूर्व में उच्च न्यायालय तक पहुँच चुका है। अदालत ने 12 दिसंबर 2013 को ही आदेश दिए थे कि किसी भी स्कूली वाहन में क्षमता से अधिक बच्चों को नहीं बैठाया जाएगा। इसके साथ ही ऑटो में अतिरिक्त लकड़ी की पट्टियां लगाकर यात्रियों या बच्चों की बैठने की क्षमता बढ़ाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने और नियमों का उल्लंघन करने वाले चालकों के लाइसेंस निरस्त करने के कड़े निर्देश दिए गए थे। इन तमाम निर्देशों का मुख्य उद्देश्य बच्चों की स्कूल यात्रा को पूरी तरह सुरक्षित बनाना था, लेकिन धरातल पर इन नियमों का पालन होता नहीं दिख रहा है।
⚠️ दुर्घटनाओं का मंडराता खतरा, अभिभावकों और प्रशासन की नींद टूटने का इंतजार
ओवरलोडिंग के कारण वाहनों में बच्चों के बैठने के लिए पर्याप्त जगह नहीं बचती है। ऐसे में अचानक ब्रेक लगाने, वाहन अनियंत्रित होने या किसी दुर्घटना की स्थिति में बच्चों को गंभीर चोट लगने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। शहरवासियों और जागरूक नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन और ट्रैफिक पुलिस ने सख्त कदम नहीं उठाए, तो कोई बड़ा हादसा हो सकता है। आवश्यकता इस बात की है कि संबंधित विभाग नियमित रूप से चेकिंग अभियान चलाएं और नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करें ताकि बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।