UP News: सिर्फ आशंका के आधार पर नहीं जब्त कर सकते गाड़ी, हाईकोर्ट ने रद्द किया मिर्जापुर डीएम का जब्ती आदेश
उत्तर प्रदेश में गोवंश की तस्करी के संदेह में पकड़े गए वाहनों की जब्ती को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण और बड़ा कानूनी फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने पुलिस व प्रशासन द्वारा की गई वाहन जब्ती को पूरी तरह से अवैध करार देते हुए राज्य सरकार को वाहन मालिक को 25 हजार रुपये प्रति माह की दर से किराया (मुआवजा) देने का सख्त आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने यह ऐतिहासिक फैसला गोतस्करी के एक मामले में जब्त की गई बोलेरो पिकअप गाड़ी की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुनाया।
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति संदीप जैन की एकल पीठ में हुई। कोर्ट ने ‘नेसर शाह बनाम उत्तर प्रदेश राज्य एवं अन्य’ के मामले में सुनवाई करते हुए मिर्जापुर के जिलाधिकारी (DM) और विंध्याचल मंडल के आयुक्त (Commissioner) द्वारा जारी किए गए जब्ती संबंधी आदेशों को सिरे से खारिज व रद्द कर दिया।
🚨 जब्त वाहन को तत्काल प्रभाव से रिलीज करने का आदेश; 2025 से बंद थी बोलेरो पिकअप
मामले का पृष्ठभूमि और पुलिस कार्रवाई:
-
घटना का विवरण: मामला मिर्जापुर जिले के लालगंज थाना क्षेत्र का है। यहां 5 फरवरी 2025 को पुलिस ने नेसर शाह की बोलेरो पिकअप (संख्या UP-65-DT-2650) को रोककर जब्त किया था।
-
पुलिस का आरोप: पुलिस का दावा था कि वाहन में आठ बैल, एक गाय और एक बछड़े समेत कुल दस मवेशियों को क्रूरतापूर्वक ले जाया जा रहा था।
-
एफआईआर व एफआईआर की धाराएं: पुलिस का आरोप था कि इन मवेशियों को वध के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश से बिहार ले जाया जा रहा था। इस आधार पर गोवध निवारण अधिनियम और पशु क्रूरता निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया था।
-
प्रशासनिक आदेश: मामले में जिलाधिकारी मिर्जापुर ने 19 मई 2025 को वाहन को राज्य सरकार के पक्ष में जब्त करने का आदेश जारी किया था, जिसे विंध्याचल मंडल के आयुक्त ने भी 21 मई 2026 को बरकरार रखा था।
🩺 जांच में स्वस्थ पाए गए थे मवेशी; न गोमांस मिला और न ही वध के अवशेष
अदालत में पेश हुए प्रमुख तथ्य:
-
पशु चिकित्सा जांच: हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि घटना के बाद पशु चिकित्सा अधिकारी द्वारा सभी पशुओं की चिकित्सीय जांच कराई गई थी, जिसमें सभी पशु पूरी तरह स्वस्थ पाए गए थे।
-
कोई आपत्तिजनक सामग्री नहीं: तलाशी के दौरान वाहन से न तो कोई गोमांस बरामद हुआ था और न ही किसी पशु के वध किए जाने के अवशेष या साक्ष्य मिले थे।
-
ठोस साक्ष्य का अभाव: हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल अनुमान, शंका और आशंका के आधार पर किसी नागरिक की संपत्ति या वाहन को जब्त नहीं किया जा सकता। इसके लिए ठोस कानूनी साक्ष्य होना अनिवार्य है।
📜 यूपी के भीतर गोवंश परिवहन के लिए परमिट अनिवार्य नहीं; हाईकोर्ट ने किया नियम स्पष्ट
राज्य में परिवहन नियमों पर कोर्ट की स्पष्टता:
-
राज्य के भीतर परिवहन: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने फैसले में यह कानून पूरी तरह साफ कर दिया कि उत्तर प्रदेश की सीमा के भीतर गाय या उसकी संतान (मवेशियों) को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने के लिए किसी विशेष परमिट की आवश्यकता नहीं होती है।
-
परमिट की अनिवार्यता: परमिट की अनिवार्यता और नियम केवल तभी लागू होते हैं, जब पशुओं को उत्तर प्रदेश की राज्य सीमा से बाहर किसी अन्य राज्य में ले जाया जा रहा हो।
-
मुआवजे का आदेश: अदालत ने संबंधित अधिकारियों को आदेश दिया कि जब्त वाहन को तत्काल रिलीज किया जाए और जब से गाड़ी पुलिस कस्टडी में है, तब से लेकर रिलीज होने तक हर महीने 25 हजार रुपये के हिसाब से पीड़ित वाहन मालिक को मुआवजा भुगतान किया जाए।