Urban Administration MP: भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत होगी कार्रवाई, एसीएस संजय दुबे ने दिए बड़े खुलासे
मध्य प्रदेश के नगरीय निकायों में 1,134 करोड़ रुपए की सरकारी खरीद के नाम पर हुई भारी वित्तीय गड़बड़ियों और घोटालों पर अब कानूनी कार्रवाई की तलवार लटक रही है। बाजार मूल्य से कई गुना अधिक कीमत पर सामग्री खरीदने और सरकारी धन के दुरुपयोग के गंभीर मामलों में लोकायुक्त संगठन ने स्वतः संज्ञान लिया है। ई-नगर पालिका सॉफ्टवेयर और अत्याधुनिक एआई टूल की मदद से सामने आई इन अनियमितताओं के बाद अब दोषी अधिकारियों और सप्लायरों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज करने की तैयारी की जा रही है। इस विभागीय कार्रवाई के तहत अब तक 392 अधिकारियों पर गाज गिर चुकी है और 7 अधिकारियों को सेवा से बर्खास्त किया जा चुका है।
🔍 खरीद से लेकर भुगतान तक की होगी उच्चस्तरीय जांच: एआई टूल ने उजागर किया फर्जीवाड़ा, 80 से ज्यादा ठेकेदार भी रडार पर
नगरीय विकास एवं आवास विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय दुबे ने बताया कि ई-नगर पालिका और जेम (GeM) पोर्टल के आंकड़ों का मिलान करने वाले एआई टूल ने खरीद दरों में भारी अंतर का खुलासा किया है। उदाहरण के लिए, एक निकाय में 2 लाख रुपए में खरीदा गया कचरा संग्रहण वाहन दूसरे निकाय में डस्टबिन जोड़कर 6 लाख रुपए में खरीदा गया। फिनाइल, एलईडी लाइट और सफाई उपकरणों की खरीद में भी नियमों को ताक पर रखकर भुगतान किए गए हैं। अब लोकायुक्त इन सभी मामलों में खरीद प्रक्रिया से लेकर भुगतान तक के पूरे रिकॉर्ड की बारीकी से जांच करेगा, जिसमें सीएमओ, इंजीनियर और 80 से अधिक सप्लायर जांच के दायरे में आ गए हैं।