DU VC Statement on Sare Jahan Se Achha: मोहम्मद इकबाल के गीत पर बोले योगेश सिंह, देश के विभाजन का समर्थन करने वाले थे उनके विचार
नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) के कुलपति योगेश सिंह ने एक ऐसा बयान दिया है जो अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। उन्होंने सोमवार (26 अक्टूबर) को एक पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में कहा कि भारतीय सेना को अपने बैंड द्वारा मोहम्मद इकबाल के लिखे प्रसिद्ध गीत ‘सारे जहां से अच्छा’ को बजाना बंद कर देना चाहिए। कुलपति ने तर्क दिया कि भले ही मोहम्मद इकबाल ने यह गीत लिखा था, लेकिन बाद में उनके विचार और रुख देश के विभाजन (पाकिस्तान की मांग) का समर्थन करने वाले हो गए थे। यह बयान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के वरिष्ठ सदस्य आर. हरि द्वारा लिखित पुस्तक ‘द स्टोरी ऑफ़ वंदे मातरम’ के विमोचन समारोह के दौरान सामने आया।
🔍 पूर्व राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने जताई असहमति: कहा- समय के साथ बदल सकते हैं विचार, ‘वंदे मातरम’ हमारी सभ्यतागत पहचान
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए केरल और बिहार के पूर्व राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने डीयू कुलपति के इस बयान से असहमति जताई। उन्होंने तर्क दिया कि भले ही बाद में इकबाल के विचार बदल गए हों, लेकिन एक दौर ऐसा भी था जब वे भारत से गहरा प्रेम करते थे। किसी व्यक्ति की राजनीतिक और बौद्धिक यात्रा समय के साथ बदल सकती है। आरिफ मोहम्मद खान ने जोर देकर कहा कि ‘वंदे मातरम’ केवल एक देशभक्ति गीत नहीं, बल्कि हमारी सभ्यतागत पहचान और राष्ट्रीय एकता का स्थायी प्रतीक है। वहीं, कार्यक्रम में प्रज्ञा प्रवाह के राष्ट्रीय संयोजक जे. नंदकुमार ने भी संबोधित करते हुए ऐतिहासिक संदर्भों पर अपनी बात रखी।