भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) द्वारा चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को ‘सहायक ग्रेड-3’ या समकक्ष पदों पर पदोन्नति (Promotion) देने के संबंध में नया आदेश जारी किया गया है। इस आदेश के तहत कर्मचारियों की शैक्षणिक योग्यता, परीक्षण अवधि, कंप्यूटर दक्षता और सीपीसीटी (CPCT) परीक्षा से जुड़ी तमाम शर्तों को बेहद सरल भाषा में स्पष्ट किया गया है। सरकार के इस कदम से विभागीय पदोन्नति की राह में आने वाली सभी प्रशासनिक और तकनीकी कठिनाइयों का समय रहते निस्तारण हो सकेगा।
💻 प्रमोशन के लिए आवश्यक शैक्षणिक और कंप्यूटर अहर्ता: CPCT स्कोर कार्ड की वैधता अब 7 वर्ष तय
सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, चतुर्थ श्रेणी से सहायक ग्रेड-3 के पद पर पदोन्नत होने के लिए कर्मचारियों के पास अनिवार्य शैक्षणिक योग्यता के साथ-साथ मान्यता प्राप्त संस्थान से 1 वर्षीय कंप्यूटर डिप्लोमा होना जरूरी है। इसके अतिरिक्त, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा आयोजित ‘कंप्यूटर दक्षता प्रमाणीकरण परीक्षा’ (CPCT) का स्कोर कार्ड होना भी अनिवार्य किया गया है, जिसकी वैधता कुल 7 वर्ष तय की गई है। योग्य पाए गए कर्मचारियों को 2 वर्ष की प्रोबेशन/परीक्षण अवधि पर पदोन्नति दी जाएगी।
⏱️ योग्यता हासिल करने के लिए अधिकतम 5 वर्ष का समय: समय सीमा चूकने पर मूल पद पर वापसी
यदि कोई चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी निर्धारित 2 वर्ष की परीक्षण अवधि में सीपीसीटी या कंप्यूटर डिप्लोमा की अहर्ता पूरी नहीं कर पाता है, तो उसकी परीक्षण अवधि को अधिकतम 3 वर्ष के लिए और बढ़ाया जा सकता है। हालांकि, यह छूट किसी भी स्थिति में कुल 5 वर्ष से अधिक नहीं होगी। यदि 5 वर्ष की अवधि पूरी होने के बाद भी कर्मचारी अपेक्षित योग्यता प्राप्त करने में विफल रहता है, तो उसे अनिवार्य रूप से उसके मूल चतुर्थ श्रेणी पद पर वापस डिमोट (री-रिवर्ट) कर दिया जाएगा।
🎁 45 वर्ष से अधिक आयु वाले कर्मचारियों को विशेष छूट: सीपीसीटी परीक्षा से मिली राहत
शासकीय कर्मचारियों के लिए राहत की बात यह है कि जो कर्मचारी अपनी पदोन्नति की तिथि तक 45 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुके हैं, उन्हें सीपीसीटी (CPCT) स्कोर कार्ड प्रस्तुत करने से छूट प्रदान की गई है। हालांकि, उनके लिए कार्य हेतु बुनियादी कंप्यूटर दक्षता की अनिवार्यता बनी रहेगी। शासन ने स्पष्ट किया है कि यह विशेष छूट केवल विभागीय पदोन्नति (Departmental Promotion) के मामलों में लागू होगी, जबकि सीधी भर्ती प्रक्रिया में सीपीसीटी और डिप्लोमा की अनिवार्यता पूर्ववत लागू रहेगी।