महाकुंभ में रवानगी से पहले नागाओं का हुआ सीक्रेट चुनाव, धर्म ध्वज के नीचे बनी नई सरकार

प्रयागराज महाकुंभ श्रद्धालुओं और पर्यटकों के कुतूहल होते हैं वे नागा संन्यासी जिनसे इन अखाड़ों की शोभा और पहचान है. तीसरे शाही स्नान के बाद इन नागा संन्यासियों की महाकुंभ से वापसी की प्रक्रिया शुरू हो जाती है. रवानगी के ठीक पहले तक अपने अपने शिविरों में नग्न अवस्था में धूनी रमाए इन नागा संन्यासियों के दर्शन सभी को होते हैं. अखाड़ों में अचला सप्तमी के बाद महाकुंभ क्षेत्र से विदाई की प्रक्रिया तेज हो जाती है. इसी परंपरा का पालन करते हुए प्रयागराज महाकुंभ में सबसे पहले अखाड़ों ने अपनी नई सरकार का गठन किया.

श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी के सचिव महंत यमुना पुरी के मुताबिक, अखाड़े की सर्वोच्च विधायिका कहे जाने वाले पंच परमेश्वर का चुनाव अखाड़ों की महाकुंभ क्षेत्र से विदाई की पहली परंपरा है. धर्म ध्वज के नीचे इसे महा निर्वाणी में पूरा करते हुए 16 सदस्यों की विधायिका का चुनाव हुआ. इसी तरह निरंजनी अखाड़े में भी नई सरकार बनी.

अब बारी आती है नागाओं के द्वारा पूरी की जाने वाली आखिरी परम्परा की, जिसे भाला देवता प्रस्थान यात्रा का नाम दिया जाता है. इसमें अखाड़े के तीन नागा संन्यासी नागा वेश में अपने भाला देवताओं को अपनी पीठ में रख अखाड़े की पालकी लेकर कुंभ क्षेत्र में संतों के जुलूस की शक्ल में कुंभ के छावनी छोड़कर अपने स्थानों को चले जाते हैं. लेकिन इस जुलूस में भी नागा संन्यासी कहीं नहीं दिखते. नागा संन्यासी के छावनी शिविर परदों से ढक दिए जाते हैं जिसमें हर किसी का प्रवेश वर्जित होता है. यहां नागा संन्यासी कुंभ से रवानगी की आखिरी पूजा कर रहे होते हैं.

काशी के लिए अर्ध रात्रि में प्रस्थान

नागाओं का महाकुंभ में रवानगी के पहले का आखिरी श्रृंगार उसी रात होता है जिस दिन अखाड़े की धर्म ध्वजा की तनिया ढीली कर अखाड़े के देवता वहां से प्रस्थान कर जाते हैं. श्री पंच दशनाम जूना अखाड़े में नागा संतो के अनुष्ठान के सह प्रभारी स्वामी चैतन्य प्रकाश गिरी बताते हैं कि अखाड़े के इष्ट की विदाई के बाद रात में नागा अपना पूर्ण श्रृंगार करते है ठीक उसी तरह जैसे महा कुम्भ क्षेत्र में छावनी प्रवेश के समय करते हैं.

अज्ञात स्थानों में चले जाते हैं नागा

नागा दिगम्बर वेश में शरीर में पहले अभिमंत्रित भभूत लगाते है और फिर धर्म ध्वजा के नीचे की रज को अपने शरीर में लगाकर कुंभ क्षेत्र से विदा हो जाते हैं. स्वामी चैतन्त प्रकाश बताते हैं कि किस साधन से और कितने बजे अर्ध रात्रि में नागा सन्यासी कुंभ क्षेत्र से रवाना होते हैं. यह जानकारी सार्वजनिक करना वर्जित होता है. इसलिए इसे वह उद्घाटित नहीं कर सकते. ये नागा संन्यासी अगली सुबह सीधे काशी में अखाड़े के तय स्थल पर मिलते हैं. वहां यह आखिरी स्नान करते हैं. इसके बाद नागा संन्यासी संबद्ध मढ़ी के लिए रवाना हो जाते है. अपनी मढ़ियों से नागा संन्यासी अज्ञात स्थान के लिए चले जाते हैं.

मालवा अभीतक की ताजा खबर सीधे पाने के लिए : 
ताज़ा ख़बर पाने के लिए एंड्राइड एप्लीकेशन इनस्टॉल करें :

पीएम मोदी ने देशवासियों को दी दिवाली की शुभकामनाएं, इस साल भी जवानों के साथ मनाएंगे पावन पर्व     |     भारत में बाल विवाह के आंकड़ों में आई गिरावट, फिर भी पश्चिम बंगाल और बिहार में स्थिति गंभीर— जानें रिपोर्ट     |     ब्रेकअप के बाद एक्स गर्लफ्रेंड की हर हरकत जानने के लिए पुलिस विभाग में डाली 97 आरटीआई, हैरान करने वाला मामला     |     कर्नाटक के बेलगावी में सनसनीखेज वारदात, एसएसबी जवान प्रेमी ने 23 वर्षीय युवती की गला घोंटकर की हत्या     |     कटिहार में चर्चित शाहरुल अपहरण और हत्याकांड मामला, अदालत ने 6 दोषियों को सुनाई उम्रकैद की सजा     |     कोलकाता में तृणमूल नेता अभिषेक बनर्जी के घर के बाहर भारी हंगामा, ममता बनर्जी ने पुलिस कमिश्नर से मांगा इस्तीफा     |     भदोही में ऑनर किलिंग का सनसनीखेज मामला, दो भाइयों ने की 12वीं की छात्र बहन की गला घोंटकर हत्या     |     न्यूजीलैंड के खिलाफ दूसरे वनडे में बाल-बाल बची टीम इंडिया, बारिश और DLS नियम के सहारे 4 रन से जीता मुकाबला     |     दिवाली 2026 पर घर लाएं सही लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति, जानें खरीदने और स्थापना के जरूरी नियम     |     सोनिया गांधी का बड़ा खुलासा, बाबरी ढांचा गिरते देख रो पड़ी थीं— इंदिरा गांधी की इमरजेंसी को माना गलती     |