Puja Updates: कार्तिक मास में देवउठनी एकादशी से लेकर दिवाली तक: जानिए पूजन के सभी शुभ योग और मुहूर्त
पवित्र कार्तिक मास सनातन परंपरा में जप, तप, स्नान और दान के लिए विशेष फलदायी माना गया है। पौराणिक मान्यता है कि इस मास में सुख-समृद्धि की अधिष्ठात्री देवी महालक्ष्मी स्वयं धरा धाम पर भ्रमण करती हैं। लंका पर विजय प्राप्त कर भगवान श्री रामचंद्र जी के अयोध्या आगमन की खुशी में पूरा देश दीपों से घर-द्वार सजाने की तैयारियों में जुटा है। कार्तिक पूर्णिमा, देव दिवाली और दिवाली सप्ताह का आगाज रवि पुष्य नक्षत्र के साथ ही शुरू हो चुका है। धर्मशास्त्रियों के अनुसार इस बार अमृत के चौघड़िया और स्थिर वृषभ लग्न में महालक्ष्मी पूजन का अत्यंत दुर्लभ व शुभ संयोग बन रहा है।
कार्तिक मास में करवा चौथ, अहोई अष्टमी, रमा एकादशी, गौवत्स द्वादशी, धनतेरस, रूप चतुर्दशी, दीपावली, गोवर्धन पूजा, भाईदूज, सौभाग्य पंचमी, छठ पर्व, गोपाष्टमी, आंवला नवमी, देव एकादशी, बैकुंठ चतुर्दशी और कार्तिक पूर्णिमा जैसे प्रमुख व्रत-त्योहार धूमधाम से मनाए जाते हैं।
🪷 चार माह की निद्रा के बाद जागेंगे भगवान विष्णु: देवउठनी एकादशी से प्रारंभ होंगे मांगलिक कार्य
संस्कृत भाषा के प्रचारक एवं धर्मशास्त्री पंडित चन्द्रभूषण शुक्ला (मां महामाया मंदिर, रायपुर) के अनुसार:
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चातुर्मास समापन: कार्तिक मास के पर्वों में देवउठनी (प्रबोधिनी) एकादशी का विशेष आध्यात्मिक महत्व है। इस दिन भगवान श्री हरि विष्णु चार माह की योगनिद्रा के बाद क्षीरसागर में जागृत होते हैं।
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शुभ कार्यों की शुरुआत: देवउठनी एकादशी के साथ ही चार महीने से रुका हुआ चातुर्मास समाप्त होता है और विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश जैसे समस्त मांगलिक कार्यों का शुभारंभ हो जाता है।
🗓️ अमावस्या तिथि दो दिन, इसलिए 10 को मनाई जाएगी गोवर्धन पूजा
धर्मशास्त्री पंडित चन्द्रभूषण शुक्ला ने तिथियों की स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया:
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8 नवंबर को लक्ष्मी पूजन: इस वर्ष कार्तिक मास की चतुर्दशी युक्त अमावस्या तिथि 8 नवंबर को सुबह 11:27 बजे प्रारंभ होकर 9 नवंबर को दोपहर 12:31 बजे समाप्त होगी। इसलिए 8 नवंबर को ही प्रदोष काल में महालक्ष्मी पूजन किया जाएगा।
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10 नवंबर को गोवर्धन पूजा: 9 नवंबर को दोपहर तक अमावस्या तिथि रहने के कारण पिछले वर्ष की भांति इस बार भी दिवाली के अगले दिन गोवर्धन पूजा न होकर, 10 नवंबर को गोवर्धन पूजा का पर्व मनाया जाएगा।
🛋️ चौकी पर ऐसे विराजें लक्ष्मी, गणेश और कुबेर: बही-खाता पूजन का भी है विशेष महत्व
मां महामाया मंदिर रायपुर के पंडित शुक्ला के अनुसार दिवाली पूजन की विधि:
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शुभ काल में पूजन: दिवाली पर मुख्य रूप से प्रदोष काल, वृषभ लग्न एवं गोधूली बेला (शाम 5:30 से रात्रि 8:10 तक) और इसके अलावा शुभ, लाभ व अमृत के चौघड़िया में पूजा करना अत्यंत फलदायी होता है।
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पूजन विधि: पूजा की चौकी पर माता लक्ष्मी, भगवान गणेश और कुबेर देव की प्रतिमा स्थापित करें। विभिन्न प्रकार के सुगंधित पुष्प, कमल, फल और मिष्ठान अर्पित कर विधि-विधान से आरती करें। व्यापारी वर्ग इसी दिन नए वित्तीय वर्ष के बही-खातों का पूजन कर अपने कारोबार की शुरुआत करते हैं।
⏰ दिवाली पूजन के विस्तृत शुभ मुहूर्त और समय सारिणी
🕯️ प्रदोष काल एवं स्थिर लग्न मुहूर्त:
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प्रदोष काल व वृषभ लग्न: शाम 5:40 बजे से रात्रि 8:10 बजे तक (अत्यंत शुभ)
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निशीथ काल (तांत्रिक व महानिशीथ पूजन): रात्रि 11:35 बजे से मध्यरात्रि 12:30 बजे तक
☀️ दिन का चौघड़िया मुहूर्त:
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चर (शुभ, यात्रा): सुबह 07:15 से 08:38 तक
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लाभ (खरीदारी, सोना): सुबह 08:38 से 10:00 तक
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अमृत (सभी शुभ कार्य – अति शुभ): सुबह 10:00 से 11:23 तक
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शुभ (दुकान व ऑफिस पूजा): दोपहर 12:45 से 02:08 तक
🌙 रात का चौघड़िया मुहूर्त:
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शुभ (गोधूली बेला – रंगोली व सजावट): शाम 04:53 से 06:31 तक
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अमृत (लक्ष्मी पूजन का सर्वश्रेष्ठ समय, वृषभ लग्न): शाम 06:31 से रात्रि 08:08 तक
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चर (व्यापारियों के बही-खाता पूजन): रात्रि 08:08 से 09:45 तक
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लाभ (निशीथ काल व तिजोरी पूजन): देर रात 01:00 से 02:38 तक
🌟 इस साल दिवाली पर बन रहे 3 दुर्लभ महासंयोग
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रविवार का दुर्लभ योग: रविवार के दिन अमावस्या पड़ना सूर्य देव का प्रभाव बढ़ाता है, जिससे ‘राजयोग’ की स्थिति बनती है।
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सौभाग्य व शोभन योग: पूजन के दिन स्वाति नक्षत्र, आयुष्मान योग तथा सुबह चतुर्दशी स्नान व शाम को अमावस्या पूजन का सुंदर समन्वय रहेगा।
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वृषभ व तुला लग्न का लाभ: शाम के समय स्थिर धन देने वाला वृषभ लग्न और रात्रि में व्यापार वृद्धि करने वाला तुला लग्न विद्यमान रहेगा।