ग्वालियर: मध्य प्रदेश के ऐतिहासिक ग्वालियर राजपरिवार के 40 हजार करोड़ रुपये के संपत्ति बंटवारे से जुड़े बहुचर्चित मामले में कानूनी प्रक्रिया लगातार आगे बढ़ रही है। इस मामले में आपत्ति दर्ज कराने वाली प्रतिमा देवी बुधवार को निर्धारित सुनवाई में अदालत में शामिल नहीं हो सकीं। उन्हें कोर्ट में अपनी मौसियों के खिलाफ लगाए गए धोखाधड़ी के आरोपों के समर्थन में पुख्ता सबूत पेश करने थे, लेकिन व्यक्तिगत कारणों से वे उपस्थित नहीं हो पाईं। अब इस मामले की अगली सुनवाई 18 नवंबर तक के लिए टाल दी गई है।
📜 क्या है पूरा संपत्ति विवाद? ज्योतिरादित्य सिंधिया की बुआ की बेटी ने लगाए हैं गंभीर आरोप
विवाद और कोर्ट की कार्यवाही का बैकग्राउंड:
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आपत्ति और आरोप: ग्वालियर जिला न्यायालय में सिंधिया राजपरिवार की संपत्ति के आपसी सहमति से हो रहे बंटवारे के मामले में सिंधिया राजपरिवार के मुखिया ज्योतिरादित्य सिंधिया की बड़ी बुआ दिवंगत पद्माराजे राणा की बेटी प्रतिमा देवी ने आपत्ति जताई थी।
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मौसियों पर आरोप: प्रतिमा देवी ने अपनी तीनों मौसियों— उषा राजे, वसुंधरा राजे और यशोधरा राजे सिंधिया के खिलाफ मुख्य रूप से आरोप लगाया था कि संपत्ति के सहमति पत्र पर उनसे धोखे से हस्ताक्षर कराए गए थे। पिछली सुनवाई में कोर्ट ने उनकी आपत्ति पर बहस के बाद इन आरोपों को सिद्ध करने के लिए सबूत पेश करने के निर्देश दिए थे।
⏳ कोर्ट से 30 नवंबर तक का मांगा गया समय; अदालत ने दी दो हफ्ते की मोहलत
सुनवाई और वकीलों का पक्ष:
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साक्ष्य पेश करने की तिथि: अदालत के निर्देशानुसार प्रतिमा देवी को अपनी आपत्तियों के साक्ष्य 4 नवंबर 2026 को अदालत के सामने रखने थे, लेकिन वे खुद उपस्थित नहीं हुईं। उनकी ओर से एक औपचारिक आवेदन प्रस्तुत कर सबूत पेश करने के लिए 30 नवंबर तक का समय दिए जाने की मांग की गई।
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वकील का बयान: इस केस में पैरवी कर रहे वकील प्रशांत शर्मा के अनुसार, अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सुनवाई की अगली तारीख 18 नवंबर तय की है।
🛡️ तीनों मौसियां पहले ही खारिज कर चुकी हैं आरोप; आगे की दिशा तय करेगी अगली तारीख
पक्षकारों का रुख और आगे की स्थिति:
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आरोपों से इनकार: इससे पहले उषा राजे, वसुंधरा राजे सिंधिया और यशोधरा राजे सिंधिया की ओर से कोर्ट में जवाब दाखिल किया जा चुका है, जिसमें प्रतिमा देवी के सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए उन्हें निराधार बताया गया है। उनका कहना है कि सहमति पत्र पर हस्ताक्षर पूरी तरह कानूनी और आपसी सहमति के साथ किए गए थे।
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आगे की दिशा: अब सबकी निगाहें 18 नवंबर की तारीख पर टिकी हैं, जहां यह देखना होगा कि प्रतिमा देवी कोर्ट के सामने अपने आरोपों के समर्थन में क्या साक्ष्य प्रस्तुत करती हैं। यह कदम इस हाई-प्रोफाइल संपत्ति विवाद की आगामी दिशा तय करेगा।