Diwali 2026: दो महीने पहले से शुरू हो जाती है दीपकों की तैयारी; उज्जैन के पारंपरिक कारीगरों की मेहनत और संघर्ष की कहानी

दीपावली पर हर घर में रोशन होने वाला मिट्टी का एक छोटा सा दीपक अपने पीछे कई परिवारों की कठिन मेहनत और पसीने की कहानी समेटे रहता है। ऐतिहासिक नगरी उज्जैन का प्रजापत मोहल्ला भी इसी पारंपरिक कारीगरी और हुनर का प्रमुख केंद्र है। यहां लगभग 100 परिवार दीपावली पर्व से दो महीने पहले ही दीपक और अन्य मिट्टी के बर्तन बनाने के काम में पूरी तरह जुट जाते हैं। चाक पर घूमती गीली मिट्टी को खूबसूरत आकार देकर तैयार किए जाने वाले इन दीपकों की मांग केवल उज्जैन तक सीमित नहीं है, बल्कि मध्य प्रदेश के दूर-दूर के जिलों से भी खरीदार यहां पहुंचते हैं।

इस बीच, क्षेत्रीय विधायक अनिल जैन कालूखेड़ा शनिवार को अचानक प्रजापत मोहल्ले में पहुंचे और उन्होंने न सिर्फ कारीगरों की समस्याएं सुनीं, बल्कि खुद चाक पर बैठकर मिट्टी के दीये बनाकर स्थानीय परिवारों का उत्साहवर्धन किया।

⏳ दीपक बनाने की लंबी प्रक्रिया: दो महीने पहले से शुरू हो जाती है तैयारी

दीपावली के लिए मिट्टी के दीये तैयार करना कोई चंद दिनों का काम नहीं है:

  • कड़ी मेहनत और चक्र: कच्ची मिट्टी जुटाना, उसे पानी में भिगोकर गूंथना, चाक पर आकार देना, धूप में सुखाना और अंत में आवां (भट्टी) में पकाने तक की पूरी प्रक्रिया में कारीगरों को लगातार पसीना बहाना पड़ता है।

  • साल का प्रमुख कारोबार: त्योहारी मांग को पूरा करने के लिए पर्व से 2 महीने पहले से ही पूरा परिवार इस काम में लग जाता है। इन 100 परिवारों के लिए यह केवल पुश्तैनी हुनर नहीं, बल्कि सालभर का सबसे महत्वपूर्ण कारोबारी अवसर होता है।

🤝 ‘प्रजापत समाज पुरुषार्थी है, स्वदेशी अपनाकर जीवन स्तर उठाएं’—विधायक अनिल जैन

मोहल्ले के दौरे के दौरान विधायक अनिल जैन कालूखेड़ा ने समाज के श्रम और पुरुषार्थ की सराहना करते हुए कहा:

  • कड़ी मेहनत की मिसाल: “हमारा प्रजापत समाज बेहद पुरुषार्थी है। समाज के लोग अपनी ईमानदारी और मेहनत की कमाई से बच्चों का पालन-पोषण करते हैं और अपना जीवन स्तर ऊंचा उठा रहे हैं।”

  • खरीदारी की अपील: उन्होंने कहा कि हम सबका नैतिक दायित्व है कि प्रजापत समाज के भाई-बहनों द्वारा बनाए जा रहे उत्पादों का अधिक से अधिक उपयोग करें। चाहे मिट्टी के दीपक हों, मटके हों या ईंटें—इनकी स्थानीय स्तर पर खरीदारी से इन परिवारों की आर्थिक स्थिति बेहतर होगी।

  • प्रधानमंत्री मोदी का विजन: विधायक ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सपनों के आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देना सबसे जरूरी है। हमें चाइनीज या विदेशी वस्तुओं के बजाय स्वदेशी मिट्टी के दीपकों को ही अपनाना चाहिए।

🌟 स्थानीय व्यापारियों और कारीगरों ने की पहल की सराहना

क्षेत्रीय व्यापारियों और कारीगरों ने विधायक की इस अनूठी पहल की खुले दिल से प्रशंसा की है। उनका कहना है कि क्षेत्र में लगातार सकारात्मक विकास हो रहा है। विधायक द्वारा स्वयं अपने हाथों से चाक पर दीपक बनाकर यह संदेश दिया गया है कि स्थानीय व्यापार को बढ़ावा देना, कारीगरों का सहयोग करना और मिट्टी से बने शुद्ध उत्पाद खरीदना हर नागरिक का कर्तव्य है। इस प्रकार के आयोजनों से पारंपरिक कुम्हार कला को एक नया संबल और पहचान मिल रही है।

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