दुनिया भर में बढ़ते जियोपॉलिटिकल तनाव के बीच नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स समिट के अंतिम दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने टेक्नोलॉजी और क्रिटिकल मिनरल्स के इस्तेमाल को लेकर बड़ी चिंता जताई. दिलचस्प बात यह रही कि पीएम ने यह बात ओपन सेशन के दौरान तब कही जब चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी वहां मौजूद थे. हालांकि प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में प्रत्यक्ष रूप से किसी देश का नाम नहीं लिया, लेकिन इसे चीन के बढ़ते दबदबे और वैश्विक सप्लाई चेन के संदर्भ में एक कड़ा संदेश माना जा रहा है.
⛏️ 2. रेयर अर्थ रिजर्व और प्रोसेसिंग में चीन का एकाधिकार, ग्लोबल माइनिंग से लेकर परमानेंट मैग्नेट तक ड्रैगन का भारी दबदबा
अमेरिकी जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) के आंकड़ों के मुताबिक, चीन के पास करीब 44 मिलियन मीट्रिक टन रेयर अर्थ ऑक्साइड (REO) का विशाल रिजर्व है. हालांकि चीन की असली ताकत केवल उसके मिनरल भंडार तक सीमित नहीं है, बल्कि माइनिंग के बाद की प्रोसेसिंग, रिफाइनिंग और मैग्नेट मैन्युफैक्चरिंग में उसकी स्थिति लगभग एकाधिकार वाली है. इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) के अनुसार, रिफाइंड आउटपुट में चीन की हिस्सेदारी करीब 91% और सिंटर्ड परमानेंट मैग्नेट प्रोडक्शन में लगभग 94% है, जिससे दुनिया के अन्य देश आपूर्ति के लिए उस पर निर्भर हैं.
🇮🇳 3. भारत की परमानेंट मैग्नेट के लिए भारी निर्भरता, ऑटोमोबाइल, ईवी और डिफेंस सेक्टर के लिए क्यों अहम हैं ये मिनरल्स?
भारत के लिए यह मुद्दा केवल कूटनीतिक नहीं बल्कि औद्योगिक और रणनीतिक सुरक्षा से भी गहराई से जुड़ा है. वित्तीय वर्ष 2024-25 में भारत के कुल परमानेंट मैग्नेट आयात में चीन की हिस्सेदारी क्वांटिटी-वाइज लगभग 85% से 90% (कुछ अनुमानों के अनुसार 93%) तक रही है. नियोडिमियम-आयरन-बोरॉन (NdFeB) जैसे रेयर-अर्थ मैग्नेट इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV), विंड टर्बाइन्स, डिफेंस रडार और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम्स के लिए अनिवार्य हैं. यही कारण है कि भारत अपनी घरेलू माइनिंग क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के साथ मिलकर अल्टरनेटिव सप्लाई चेन विकसित करने पर जोर दे रहा है.