Panna News : केन-बेतवा और मझगांय डैम विस्थापितों का हल्लाबोल, पन्ना प्रशासन पर तानाशाही का आरोप

पन्ना। मध्य प्रदेश के पन्ना जिले की अजयगढ़ तहसील में निर्मित मझगांय डैम के डूब क्षेत्र में पानी का स्तर लगातार बढ़ने के कारण विस्थापित आदिवासियों का आक्रोश फूट पड़ा है। शनिवार से सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर के नेतृत्व में सैकड़ों प्रभावित आदिवासियों ने फिर से ‘चिता आंदोलन’ का आगाज किया है।

उचित मुआवजे और पुनर्वास की मांग को लेकर सैकड़ों विस्थापित चिता पर लेट गए हैं। लगातार बढ़ते जलस्तर के कारण कई लोगों के मकान डूब चुके हैं और गांव के कई हिस्से पूरी तरह टापू में तब्दील हो चुके हैं, लेकिन प्रशासनिक उपेक्षा के चलते विस्थापितों को अब तक मुआवजा नहीं मिल सका है।

🌊 बहनरी टपरियन में एक मंच पर आए विस्थापित: पन्ना प्रशासन पर तानाशाही और भ्रष्टाचार के लगाए आरोप

डैम के बढ़ते पानी से बेघर हुए असंतुष्ट विस्थापित आदिवासियों ने अजयगढ़ के ग्राम बहनरी टपरियन में एकजुट होकर यह उग्र प्रदर्शन शुरू किया है।

केन-बेतवा लिंक परियोजना, मझगांय डैम और रुंझ बांध से प्रभावित किसान तथा आदिवासी परिवार बहनरीकला टपरिया में एक ही मंच पर एकत्रित हुए हैं। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे जय किसान संगठन के नेता एवं सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर ने पन्ना जिला प्रशासन पर संवेदनहीनता, तानाशाही और व्यापक भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं।

📜 ‘गांव और घर ही नहीं, संविधान और मानवता भी डूब रही’: अमित भटनागर ने व्यवस्था पर उठाए सवाल

सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर ने आंदोलनकारियों को संबोधित करते हुए कहा, “आज केवल गांव और घर ही पानी में नहीं डूब रहे हैं, बल्कि देश का संविधान और मानवता भी प्रशासनिक अनदेखी में डूब रही है। जिन विस्थापितों के महान त्याग पर बड़ी-बड़ी सिंचाई और जल परियोजनाएं खड़ी की जा रही हैं, आज उन्हीं के साथ सबसे बड़ा अन्याय हो रहा है।”

उन्होंने आगे कहा कि मुआवजे और पुनर्वास प्रक्रिया में भ्रष्टाचार व रिश्वतखोरी के गंभीर आरोप सामने आ रहे हैं। केन-बेतवा परियोजना में लोकायुक्त द्वारा एक पटवारी को रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़े जाने के बावजूद यदि व्यवस्था में कोई सुधार नहीं होता, तो यह सोचने का विषय है कि प्रभावितों की सुनवाई आखिर कौन करेगा।

🤝 मझगांय, रुंझ और केन-बेतवा प्रोजेक्ट के प्रभावितों का संयुक्त प्रदर्शन: पुलिस को नहीं आंदोलन की भनक

प्रभावित ग्रामीणों का आरोप है कि उनके आशियाने पानी में डूबते जा रहे हैं, लेकिन शासन-प्रशासन द्वारा मुआवजे और पुनर्वास का कार्य आधा-अधूरा ही छोड़ दिया गया है।

अमित भटनागर ने पड़ोसी जिले का उदाहरण देते हुए कहा कि छतरपुर में प्रशासनिक बदलाव के बाद अधिकारियों द्वारा विस्थापितों की समस्याएं सुनकर सुविधाएं देने की कोशिशें दिख रही हैं, लेकिन पन्ना प्रशासन की संवेदनशीलता शून्य बनी हुई है। इस संयुक्त आंदोलन में केन-बेतवा, रंगीन और मझगांय डैम के विस्थापित आदिवासी चिता पर लेटकर विरोध दर्ज करा रहे हैं। वहीं, जब अजयगढ़ क्षेत्र में जारी इस चिता आंदोलन के संबंध में एसडीओपी (SDOP) पुलिस राजीव सिंह भदौरिया से पूछा गया, तो उन्होंने अनभिज्ञता जताते हुए कहा कि “उन्हें इस संबंध में अभी जानकारी नहीं है, वे तुरंत जानकारी जुटाते हैं।”

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