Angre Property Dispute: हिरण्यवन कोठी विवाद में हाई कोर्ट पहुंची आंग्रे फैमिली, सिंधिया पर लगाए गंभीर आरोप
ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर में सिंधिया राजवंश और आंग्रे परिवार के बीच बीते चार दशकों से चला आ रहा संपत्ति विवाद एक बार फिर कानूनी सुगबुगाहटों के साथ सुर्खियों में आ गया है। 9 एकड़ में विस्तृत ऐतिहासिक ‘हिरण्यवन कोठी’ को लेकर चल रही अदालती जंग में अब छत्रपति शिवाजी महाराज की करीब 106 साल पुरानी दुर्लभ प्रतिमा का मामला जुड़ गया है। आंग्रे परिवार की चित्रलेखा आंग्रे और तुलाजी आंग्रे ने ग्वालियर हाई कोर्ट में आवेदन दायर कर केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया व अन्य के खिलाफ आरोप लगाए हैं। इस मामले में हाई कोर्ट की पीठ समक्ष महत्वपूर्ण सुनवाई होनी है।
🏛️ ‘प्रतिमा हटाते वक्त काटे गए घोड़े के पैर, ले जाया गया जयविलास पैलेस’: 43 वर्षों से लंबित है 9 एकड़ कोठी का मामला
आंग्रे परिवार द्वारा दायर आवेदन के अनुसार, प्रसिद्ध मूर्तिकार विनायक पी. करमरकर द्वारा निर्मित छत्रपति शिवाजी महाराज की इस ऐतिहासिक प्रतिमा को संभाजी राव आंग्रे महाराष्ट्र के अलीबाग से ग्वालियर लाए थे और बसंत विहार व चेतकपुरी के बीच स्थित हिरण्यवन कोठी में स्थापित कराया था। आंग्रे पक्ष का आरोप है कि प्रतिमा को उसके मूल स्थान से हटाकर जयविलास पैलेस ले जाते समय क्षति पहुंचाई गई और घोड़े के पैर तक काट दिए गए। परिवार ने प्रतिमा को मूल स्थान पर पुनः स्थापित करने तथा कोठी की वर्ष 1983 से पहले की स्थिति बहाल करने की मांग की है। उल्लेखनीय है कि 13 अगस्त 1983 को बेदखली के आरोपों से शुरू हुआ यह विवाद वर्ष 2005 से हाई कोर्ट में विचाराधीन है।