Abhijit Dipke CJP: शांतिपूर्ण प्रदर्शन से व्यापार को नुकसान नहीं, इंटरनेट बंद करने पर केंद्र सरकार को घेरा
‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने दो टूक शब्दों में कहा है कि देश में सत्ता में बैठे लोगों से जवाबदेही मांगना कभी भी ‘अराजकता’ नहीं हो सकता, बल्कि यह किसी भी जीवंत लोकतंत्र का सबसे बुनियादी और अहम रूप है। दीपके ने राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और अन्य जगहों पर आंदोलनों के कारण होने वाली अव्यवस्था के आरोपों का कड़ा खंडन किया है। इस दौरान उन्होंने शांतिपूर्ण प्रदर्शनों को दबाने और रोकने के लिए केंद्र सरकार की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि जो दल आज सत्ता में काबिज हैं, उन्होंने विपक्ष में रहते हुए दशकों तक सड़कों पर उतरकर विरोध-प्रदर्शन किए थे, लेकिन आज वे सत्ता में आते ही इसी लोकतांत्रिक अधिकार को सार्वजनिक व्यवस्था के लिए खतरा बताने लगे हैं।
🕊️ ‘हम लगातार गांधीजी और अंबेडकर के रास्ते पर चल रहे, जयपुर हमले के बाद भी नहीं की हिंसा’
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर अपनी बात रखते हुए अभिजीत दीपके ने उन तमाम दावों को सिरे से खारिज किया जिनमें यह कहा जा रहा है कि सार्वजनिक प्रदर्शनों की वजह से आर्थिक गतिविधियों में बाधा आती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनों से व्यापार को नुकसान नहीं पहुंचता, बल्कि नुकसान तब होता है जब सरकारें पूरे शहर को बंद करने, इंटरनेट सेवाएं ठप करने, नागरिकों की आवाजाही पर रोक लगाने और शहर को युद्ध के मैदान में बदलने जैसे कदम उठाती हैं। उन्होंने कहा कि CJP अपनी स्थापना के बाद से ही महात्मा गांधी के शांति और अहिंसा के मार्ग पर चल रही है। जयपुर में खुद पर हुए व्यक्तिगत हमले का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि हिंसा का जवाब हिंसा से देना उनके सिद्धांतों के खिलाफ है, और वे डॉ. भीमराव अंबेडकर के संविधान द्वारा दिए गए शांतिपूर्ण अधिकारों का ही पालन करेंगे।
⚖️ ‘जब आप विपक्ष में हों तो विरोध अधिकार और सत्ता में आने पर खतरा, यह सरासर पाखंड है’
सरकार और प्रशासनिक नीतियों पर सवाल उठाते हुए CJP संस्थापक ने कहा कि सिर्फ इसलिए उन्हें ‘अराजकतावादी’ के रूप में पेश करने की कोशिश की जाती है क्योंकि वे चुप रहने से इनकार करते हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि आज सत्ता के सर्वोच्च पदों पर बैठे कई नेता यदि अपने शुरुआती दिनों में वैसी ही दमनकारी पाबंदियों और पुलिसिया सख्ती का सामना करते, जैसी आज प्रदर्शनकारियों पर थोपी जा रही हैं, तो वे शायद कभी इस मुकाम तक नहीं पहुँच पाते। उन्होंने अंत में कहा कि वे सरकार से कोई विशेष अधिकार या रियायत नहीं मांग रहे, बल्कि हर आम नागरिक की तरह संविधान प्रदत्त स्वतंत्रता का उपयोग करना चाहते हैं, क्योंकि चुनाव जीतने के बाद भी जनता की आवाज को दबाया नहीं जा सकता।