मध्य प्रदेश के गुना से पूर्व विधायक राजेंद्र सिंह सलूजा पर काफी समय से फर्जी जाति प्रमाण पत्र उपयोग करने का आरोप चल रहा था, जिस पर हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच में सुनवाई जारी थी। लंबे समय से चल रहे इस कानूनी विवाद में कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाते हुए पूर्व विधायक राजेंद्र सलूजा को सभी आरोपों से पूरी तरह मुक्त कर दिया है। अदालत में यह बात साबित नहीं हो सकी कि पूर्व विधायक या उनके परिवार द्वारा किसी भी प्रकार के कूटरचित या फर्जी दस्तावेज तैयार कराए गए थे।
⚖️ साल 2011 में उठा था मामला, सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हुई सुनवाई
विधायक बनने के बाद राजेंद्र सिंह सलूजा के जाति प्रमाण पत्र को लेकर शिकायत दर्ज कराई गई थी, जिसमें कांग्रेस और अन्य पक्षों द्वारा आरोप लगाया गया था कि वह सामान्य वर्ग से आते हैं और उन्होंने फर्जी प्रमाण पत्र का उपयोग किया है। इसके बाद वर्ष 2011 में उनका जाति प्रमाण पत्र निरस्त कर दिया गया था और मामला अदालत तक जा पहुंचा। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद ग्वालियर हाईकोर्ट में इस मामले की नए सिरे से सुनवाई शुरू हुई, जहां बुधवार को कोर्ट ने सभी आरोपियों को आरोपों से बरी कर दिया।
🙏 फैसले के बाद पूर्व विधायक ने जताई खुशी, जनता का जताया आभार
मामले से राहत मिलने के बाद पूर्व विधायक राजेंद्र सिंह सलूजा ने न्यायालय के आदेशों का सम्मान करते हुए प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यह फैसला और संकट की घड़ी से बाहर निकलना जनआशीर्वाद और बालाजी (टेकरी सरकार) की कृपा का परिणाम है। उन्होंने गुना जिले की समस्त जनता का आभार व्यक्त किया जो उनके इस कठिन समय में भी उनके साथ मजबूती से खड़ी रही। पूर्व विधायक की इस जीत के बाद उनके समर्थकों में भी खुशी का माहौल है।