धर्म और अध्यात्म की नगरी मंदसौर से इंसानियत को झकझोर देने वाली और एक सकारात्मक संदेश देने वाली बेहद प्रेरणादायक कहानी सामने आई है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मृत आत्माओं की शांति के लिए पिंडदान और तर्पण करना बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, जो आमतौर पर परिवार के लोग करते हैं। लेकिन मंदसौर के गणपति चौक में रहने वाले समाजसेवी सुनील बंसल पिछले 35 सालों से ऐसे लावारिस लोगों और दुर्घटनाओं में जान गंवाने वाले अज्ञात व्यक्तियों का अंतिम संस्कार कर रहे हैं, जिनका इस दुनिया में कोई नहीं होता। इतना ही नहीं, वे पितृपक्ष के दौरान इन सभी की अस्थियों को लेकर हरिद्वार जाते हैं और पूरी विधि-विधान से उनका तर्पण करते हैं।
🐒 इंसानों के साथ-साथ बेजुबान जानवरों का भी करते हैं अंतिम संस्कार: इस साल 26 इंसानों और 19 बंदरों की अस्थियां लेकर पहुंचे हरिद्वार
सुनील बंसल केवल इंसानों तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि वे वन्यजीव और पशु प्रेमी भी हैं। वे सड़क हादसों में मृत होने वाले बंदरों या अन्य जंगली जीवों को भी आदर के साथ मुक्तिधाम लाकर उनका अंतिम संस्कार करते हैं और इंसानों की तरह ही उनकी अस्थियों को भी सुरक्षित संचित रखते हैं। इस साल भी उन्होंने परंपरा को निभाते हुए मृत हुए 26 लावारिस इंसानों के साथ-साथ 19 बंदरों की अस्थियों के कलश को भी उठाया और अपने मित्रों व अन्य समाजसेवियों के साथ हरिद्वार के लिए रवाना हुए, जहाँ गंगा तट पर उनका मोक्ष और तर्पण कार्य संपन्न किया गया।
🕊️ अधोगति और भटकती आत्माओं को शांति दिलाने का संकल्प: आर्थिक अभाव वालों की भी करते हैं मदद
इस अनोखे सेवा कार्य के बारे में बात करते हुए सुनील बंसल बताते हैं कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जिन लोगों की अकाल मृत्यु होती है या जिनके अंतिम संस्कार व तर्पण की क्रिया नहीं हो पाती, उनकी आत्माएं भटकती रहती हैं। इसी उद्देश्य से वे पिछले साढ़े तीन दशकों से इस पुण्य कार्य में जुटे हुए हैं और उन्हें इसमें आत्मिक शांति मिलती है। इसके अलावा, जो गरीब परिवार आर्थिक तंगी के कारण अपने परिजनों की अस्थियां हरिद्वार या गंगाजी में विसर्जित नहीं कर पाते, सुनील बंसल ऐसे लोगों के लिए भी हमेशा मदद का हाथ बढ़ाने को तैयार रहते हैं।