Bihar Flood Crisis: बाढ़ का पानी उतरते ही बिहार में संक्रामक बीमारियों का प्रकोप, डायरिया और डेंगू से बढ़ी मुश्किलें
बिहार: राज्य के बाढ़ प्रभावित इलाकों से पानी का स्तर भले ही नीचे उतरने लगा हो, लेकिन इसके साथ ही कई जिलों में गंभीर संक्रामक महामारियों का संकट खड़ा हो गया है. जगह-जगह जमा कीचड़, कचरे और सड़ांध के कारण डायरिया, डेंगू, दस्त, हैजा, टाइफाइड और खतरनाक त्वचा रोग तेजी से फैल रहे हैं. स्थिति यह है कि महिलाओं और बच्चों के पैरों में सड़न व खुजली की समस्याएं बड़े पैमाने पर सामने आ रही हैं, जबकि धरातल पर प्रशासनिक दावे और छिड़काव व्यवस्था नाकाफी साबित हो रही है.
📉 2. 14 जिलों के 41 लाख से अधिक लोग प्रभावित, कटिहार और सीवान से लेकर छपरा तक जलजमाव और बदहाली बरकरार
राज्य के 14 जिलों की 517 पंचायतों में फैला बाढ़ का पानी अपने पीछे तबाही और बीमारियों का अंबार छोड़ गया है, जिससे लगभग 41.45 लाख लोगों का जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है. आपदा के इस दौर में 10 लाख से अधिक लोग बेघर होकर राहत शिविरों में शरण लेने को विवश हैं. कटिहार, सीवान और छपरा के दिलिया रहीमपुर जैसे इलाकों में लोग सड़ांध मारते पानी के बीच रहने को मजबूर हैं, जहां ब्लीचिंग पाउडर और डीडीटी की किल्लत के कारण संक्रमण का खतरा लगातार विकराल होता जा रहा है.
🍼 3. राहत शिविरों में पेयजल और बुनियादी सुविधाओं की भारी किल्लत, मवेशियों के चारे का भी पड़ा अकाल
दूषित पेयजल और गंदगी के कारण हेपेटाइटिस, मलेरिया और लेप्टोस्पायरोसिस जैसी जानलेवा बीमारियां भी पांव पसार रही हैं. राहत शिविरों में मासूम बच्चों के लिए दूध, महिलाओं के लिए सेनेटरी पैड और शुद्ध पीने के पानी की भारी किल्लत है. भागलपुर जैसे क्षेत्रों में नल-जल योजनाएं ठप होने से लोग पैकेज्ड पानी खरीदने को मजबूर हैं. इसके अलावा, बेजुबान पशुओं के लिए चारे का भयानक अकाल पड़ गया है, जिससे पशुपालकों के सामने मवेशियों को बचाने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है. स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने पानी उबालकर पीने और सुरक्षात्मक उपाय अपनाने की सलाह दी है.