ओवैसी ने संसद में दिया बड़ा राजनीतिक बयान! वायनाड का दिया उदाहरण, रायबरेली-अमेठी-इटावा में मुस्लिम क्यों नहीं जीत सकते? क्या था निशाना?

संसद का शीतकालीन सत्र चल रहा है. बुधवार को एआईएमआईएम सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने SIR पर चर्चा के दौरान अपनी बात रखी. इस दौरान उन्होंने चुनाव आयोग पर संसद की तरफ से बनाए गए नियमों का पालन न करने का आरोप लगाया है. इसके साथ ही उन्होंने लोकसभा में मुस्लिम सांसदों की कम संख्या पर चिंता व्यक्त की है.

ओवैसी ने कहा कि यदि मुस्लिम-बहुल वायनाड गैर-मुस्लिम चुन सकता है, तो रायबरेली, अमेठी और इटावा जैसे निर्वाचन क्षेत्र मुस्लिम क्यों नहीं चुन सकते हैं? ओवैसी ने बी.आर. अंबेडकर के विचारों का हवाला देते हुए राजनीतिक शक्ति को सामाजिक प्रगति की कुंजी बताया है. उन्होंने भारत में अल्पसंख्यकों के प्रतिनिधित्व पर जोर दिया.

आगे कहा, ‘यहां केवल चार प्रतिशत मुसलमान हैं. सत्तारूढ़ पार्टी में कोई मुस्लिम सदस्य नहीं है. उन्होंने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (सपा) पर परोक्ष रूप से निशाना साधते हुए कहा, ‘मुसलमान यहां नहीं हैं, धर्मनिरपेक्ष पार्टियों में उनका प्रतिनिधित्व नहीं है.

देश में हो रही बैकडोर NRC- ओवैसी

एआईएमआईएम सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने SIR पर चर्चा के दौरान चुनाव आयोग पर संसद के बनाए नियम और सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना करने का आरोप लगाया है. उन्होंने दावा किया कि चुनाव आयोग ने पब्लिक डोमेन ऑर्डर डाले बिना 35 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम काट दिए. हम एसआईआर का विरोध करते हैं.

उन्होंने आरोप लगाया है कि चुनावी रोल का विशेष सघन पुनरीक्षण (SIR) एक ‘बैकडोर NRC’ है. उन्होंने इसे धार्मिक आधार पर लोगों को मताधिकार से वंचित करने की दुर्भावनापूर्ण प्रक्रिया बताया है. जो संसदीय कानून और सुप्रीम कोर्ट के फैसले का उल्लंघन है. ओवैसी ने चुनाव आयोग पर अपनी शक्तियों का अतिक्रमण करने का भी आरोप लगाया.

जर्मनी जैसी व्यवस्था अपनाई जाए

असदुद्दीन ओवैसी ने अपने भाषण में बीजेपी सरकार से एक अपील भी की है. उन्होंने कहा कि देश में जर्मनी जैसी संसदीय व्यवस्था अपनाई जाए. उन्होंने यह भी कहा, ‘हमें आम सहमति बनाकर वोट के अधिकार को मूल अधिकार बनाना चाहिए.’

क्यों मुसलमान नहीं गाते वंदे मातरम

असदुद्दीन ओवैसी ने मुसलमानों के वंदे मातरम न गाने की वजह भी बताई. उन्होंने कहा, ‘हम अपनी मां की इबादत नहीं करते, हम कुरान की भी इबादत नहीं करते और इस्लाम में अल्लाह के सिवा कोई खुदा नहीं. वतन मेरा है हम उसे छोड़कर नहीं जाएंगे. वफादारी का सर्टिफिकेट हमसे मत लीजिए.’

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