Shajapur में बड़े साहब का निकला जुलूस हुई परंपरागत दौड़ हजारो लोग रहे मौजूद,-मोहर्रम में जुलूस के पीछे यह है मान्यता,जाने इस खबर में

शाजापुर। मोहर्रम पर्व जैसे-जैसे अपने समापन की ओर बढ़ रहा है, वैसे-वैसे मुस्लिमजनों के दिलों में हुसैनी जज्बा भी बढ़ता जा रहा है और शहीदों की याद में सबिल लगाने के साथ ही हलीम का लंगर भी लूटाया जा रहा है। वहीं परंपरानुसार एशिया के सबसे बड़े दुलदुल का मोहर्रम की आठ तारीख रविवार को जुलूस निकाला गया। जुलूस देररात करीब 11 बजे मोहर्रम कमेटी के सदर इमरान खरखरे की सरपरस्ती में हुसैनी चौक से शुरू हुआ,
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जो नगर के सिंधी मार्केट, आजाद चौक, मीरकला बाजार, कसाईवाड़ा, किला रोड होता हुआ पुन: हुसैनी चौक पहुंचकर संपन्न हुआ। कोरोनाकाल के दो वर्ष बाद हजारों की भीड़ में अकीदतमंदों के कांधों पर सवार होकर एशिया के सबसे बड़े दुलदुल जुलूस के रूप में शहर की सकड़ों पर निकले। रात 11 बजे शुरू हुआ दुलदुल का जुलूस देररात 4 बजे हुसैनी चौक पहुंचकर संपन्न हुआ। उल्लेखनीय है कि मोहर्रम का पर्व इंसानियत के लिए करबला में शहीद हुए रसूले पाक के नवासे और उनके अजीजों की याद में मनाया जाता है। दस दिवसीय इस मातमी पर्व पर मुस्लिमजन शोहदा-ए-करबला को याद कर उनके नाम पर लंगर लूटाते हैं और हर साल की तरह इस साल भी पुरानी परंपराओं के चलते हलीम का लंगर लूटाया जा रहा है। साथ ही दूध और शरबत पिलाकर हजरत इमाम हुसैन को याद किया जा रहा है। साथ ही मोहर्रम की आठ तारीख को परंपरानुसार दुलदुल का जुलूस बड़ी ही धूमधाम के साथ निकाला गया। इस दौरान मोहर्रम कमेटी के खजांची अकरम ठेकेदार, जनरल सेकेट्री डॉक्टर मौजूद मोहम्मद, मीडिया प्रभारी शफीक खान, सरपरस्त मिर्जा सलीम बेग, शेख शमीम, असलम शाह, इरशाद खान, मिर्जा सोहराब बेग, अजीज मंसूरी, अखलाक हुसैन मदनी, अफसार अहमद, पप्पू सदर, शकील वारसी, शब्बीर भाई, रज्जाक भाई, मुंशी खान, मरगूब खान, सबदर भाई, अजगर भाई, बाबू ऐरिगेशन, हनीफ राही, सलमान शेख, अफाक पटेल, आबिद अली, अनवर अली, मुन्ना भाई, शौकत अली, जम्मू भाई, अकील नूरमंडी, आजाद भाई, जाकिर पहलवान, फैसल वारसी, कय्यूम खान, सद्दाम खान जुलूस व्यवस्था की कमान संभाले नजर आए। अलम के जुलूस में शामिल मुस्लिम समाज के युवाओं ने हैरतंगेज करतब दिखाए। युवाओं ने लकड़ी घुमाना, अखाड़ा खेलने का प्रदर्शन भी किया।
जुलूस के पीछे यह है मान्यता
उल्लेखनीय है कि मोहर्रम पर्व पर दुलदुल का जुलूस निकालना शोहदा-ए-करबला के प्रति अपनी मोहब्बत को जाहिर करना है। ऑल इंडिया मुस्लिम त्यौहार कमेटी के अध्यक्ष सज्जाद कुरैशी ने बताया कि मोहर्रम की आठ तारीख को हजरत अब्बास अलमदार अपने घोड़े जिसे अरबी भाषा में दुलदुल कहा जाता है, उसके साथ नहरे फराज पर पहुंचे और घोड़े से कहा कि सेहराब होकर पानी पीले, क्योंकि इसके बाद पानी नही मिलना है। हजरत अब्बास अलमदार की इस बात पर घोड़े ने रब के हुक्म से जवाब दिया कि हजरत खेमे में सभी भूखे और प्यासे हैं, ऐसे में यदि मैं पानी पीता हूं तो कयामत के दिन अपने रब को क्या मुंह दिखाऊंगा और घोड़े ने पानी नही पिया। इसके बाद यजीद पलीत के लश्कर ने हजरत अब्बास अलमदार और उनके दुलदुल को तीर मारकर शहीद कर दिया। इंसानियत के लिए लड़ी गई जंग में हजरत के साथ भूखे, प्यासे शहीद हुए इस दुलदुल का मोहर्रम पर्व पर जुलूस निकालकर शहीदों के प्रति मुस्लिम समाज अपनी मोहब्बत जाहिर करता है।

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