हाईकोर्ट ने रोहतक पुलिस द्वारा 2 डॉक्टरों पर दर्ज FIR रद्द की

चंडीगढ़: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा के 2 डॉक्टरों पर दर्ज FIR रद्द कर दी है। इन पर रोहतक पुलिस ने कोरोना महामारी फैलाने का आरोप लगाया था। मई, 2021 में इनके खिलाफ केस दर्ज हुआ था जब महामारी चरम पर थी। दोनों डॉक्टरों पर प्रशासन द्वारा लगाई गई पाबंदियों की उल्लंघना कर होटल में पार्टी करने का आरोप था। डॉक्टरों ने दायर केस को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने फैसले में कहा है कि डॉक्टर्स कोरोना से संक्रमित नहीं थे, ऐसे में यह नहीं माना जा सकता कि वह कोरोना फैला रहे थे।केस की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट जज, जस्टिस कर्मजीत सिंह ने कहा कि ऐसा कोई प्रथम दृष्टता साक्ष्य नहीं है जिससे पता चलता हो कि याची किसी संक्रमण वाली बीमारी से ग्रसित हों। इसके अलावा उस समयकाल में कोविड टेस्ट में पॉजिटिव आए हों। ऐसे में यह नहीं माना जा सकता कि याची संक्रमण के वाहक थे या उनकी वजह से कोरोना आगे फैल सकता था। मामले में डा. चांदनी समेत अन्य डॉक्टर के खिलाफ यह केस दर्ज हुआ था। दोनों ने हाईकोर्ट में FIR रद्द करने की मांग को लेकर याचिका दायर की थी।हाईकोर्ट ने मामले में सुनवाई करते हुए कहा कि CrPC की धारा 195(1) के तहत संबंधित अथॉरिटी(जिला मजिस्ट्रेट) या उससे बड़ा अफसर याची पक्ष को दंडित करने के लिए धारा 188 के तहत शिकायत देने में सक्षम था। मौजूदा केस में ऐसी कोई शिकायत नहीं दी गई थी। ऐसे में कोर्ट धारा 188 के तहत दर्ज दर्ज अपराध में संज्ञान नहीं ले सकता। वहीं धारा 269 और 270 पर कोर्ट ने कहा कि यह दोनों धाराएं किसी संक्रमण या बीमारी को फैलाने से जुड़ी हैं।कोरोना का वाहक नहीं कहा जा सकता: हाईकोर्टवहीं कोर्ट ने कहा कि मौजूदा केस में कहीं भी यह नहीं है कि याची डॉक्टर किसी ऐसे संक्रमण या बीमारी से ग्रसित थे। वहीं यह कोविड 19 टेस्ट में भी पॉजिटिव आए हों, ऐसा नहीं है। ऐसे में इन्हें संक्रमण फैलाने वाला वाहक भी नहीं कहा जा सकता। ऐसे में सरकारी पक्ष की दलीलों को कोर्ट ने मेरिट से दूर पाया।आगे कहा कि डिसास्टर मैनेजमेंट एक्ट की धारा 60 के तहत कोई भी अदालत संबंधित अपराध के तहत संज्ञान नहीं ले सकती, बशर्ते सक्षम अथॉरिटी या व्यक्ति द्वारा दी गई हो। ऐसे में एक्ट धारा 51(बी) के तहत दर्ज अपराध में कोर्ट संज्ञान नहीं ले सकती। हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि याची पक्ष का बीमारी फैलाने का कोई इरादा नजर नहीं आता। ऐसे में FIR रद्द कर दी गई।पुलिस ने कहा-रुम बुक करवाए थेपुलिस की FIR के मुताबिक दोनों डॉक्टर्स(याची) होटल में जिला प्रशासन द्वारा लगाई गई कोविड पाबंदियों को जानने के बावजूद पार्टी मना रहे थे। प्रशासन ने कोविड महामारी को रोकने के लिए यह पाबंदियां लगाई थी। इनके खिलाफ मई, 2021 में सरकारी आदेशों की उल्लंघना को लेकर केस दर्ज हुआ था।30 मई, 2021 को IPC की धारा 188(सरकारी आदेशों की उल्लंघना करना), 269(लापरवाही भरा कृत्य करना जिससे जिंदगी के लिए खतरनाक संक्रमण या बीमारी आगे फैल सकता हो), 270(घोर कृत्य करना जिससे जिंदगी के लिए खतरनाक बीमारी या संक्रमण आगे फैलता हो) तथा डिसास्टर मैनेजमेंट एक्ट, 2005 की धारा 51(बी) के तहत रोहतक जिला पुलिस ने यह केस दर्ज किया था। पुलिस द्वारा डॉक्टरों द्वारा की गई इस पार्टी की जानकारी मिलने पर इनसे पूछताछ की गई थी। इसमें इन्होंने माना था कि पार्टी का आयोजन किया गया था और इसके लिए होटल के कुछ कमरे बुक करवाए गए थे।रुम बुक करवाने के दौरान कोरोना नहीं थाहाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान याची पक्ष के वकील ने कहा कि दोनों डॉक्टर क्वालिफाइड हैं। घटनाक्रम के दौरान उनकी ड्यूटी सिविल हॉस्पिटल, खानपुर कलां, सोनीपत में थी। रेाहतक में वह दोनों अपने साथियों को मिलने आए थे। देरी हो जाने के चलते उन्होंने रात को रुकने के लिए होटल में रुम बुक करवा लिए थे। यह होटल(होटल क्रॉउन इन) सिविल हॉस्पिटल के पास ही था। वहीं कहा गया कि रिकार्ड में कहीं नहीं है कि याची होटल में रुम लेने के दौरान कोरोना महामारी से ग्रसित थे।वहीं सरकारी वकील ने कहा कि संबंधित समयकाल में कोरोना महामारी चरम पर थी। इसके रोकने के लिए सरकार ने हर प्रकार के संभव प्रतिबंध लगाए हुए थे। इसमें निजी होटलों को खोलने से लेकर भीड़ जुटाने तक पर रोक थी। याची पक्ष ने इन पाबंदियों की जानकारी होने के बावजूद उल्लंघना की थी।

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