हिजाब के लिए लड़ाई शुरू करने वाली छात्रा बोली- इस मुद्दे पर न्यायालय का एक निष्पक्ष फैसला आने की उम्मीद

कर्नाटक में उडुपी के सरकारी पीयू कॉलेज में हिजाब पहन कर कक्षाओं में शामिल होने के लिए लड़ाई शुरू करने वाली छात्रा आलिया असादी ने कहा है कि उसे इस मुद्दे पर न्यायालय का एक निष्पक्ष फैसला आने की अब भी उम्मीद है। उच्चतम न्यायालय के अंतिम फैसला सुनाये जाने तक कर्नाटक सरकार द्वारा शैक्षणिक संस्थानों में हिजाब पर पाबंदी जारी रखने का संकल्प लेने के बाद छात्रा की यह टिप्पणी आई है। उल्लेखनीय है कि न्यायालय ने विषय पर बृहस्पतिवार को एक खंडित फैसला सुनाया था।

शीर्ष न्यायालय के दो न्यायाधीशों ने हिजाब विवाद में कर्नाटक उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ अपील पर खंडित फैसला सुनाया था और प्रधान न्यायाधीश उदय उमेश ललित से इस मामले में निर्णय के लिए वृहद पीठ का गठन करने का अनुरोध किया। असादी ने ट्वीट किया, ‘‘माननीय न्यायमूर्ति (सुधांशु) धूलिया के बयान ने निष्पक्ष फैसले के प्रति हमारी उम्मीद और मजबूत कर दी है। हिजाब पहनने वाली सैकड़ों छात्राएं अपनी शिक्षा फिर से शुरू करने का इंतजार कर रही हैं।”

असादी उन याचिकाकर्ताओं में शामिल है, जिसने शैक्षणिक संस्थानों में हिजाब पहनने के मुस्लिम ल्ड़कियों के अधिकार को संरक्षण प्रदान करने का आग्रह करते हुए कर्नाटक उच्च न्यायालय का रुख किया था। हीबा शेख नाम की एक अन्य छात्रा ने अपने ट्वीट में कहा, ‘‘हमारी अर्जी सीधी और सरल है। ये सभी चीजें हमारी व्यक्तिगत पसंद और गरिमा से जुड़ी हुई हैं। खुश हूं कि हमारी अर्जी को न्यायमूर्ति धूलिया ने स्वीकार कर लिया है।

छात्रा होने के नाते हमें उम्मीद है कि लोकतंत्र हमें हिजाब पहन कर शिक्षा हासिल हासिल करने के अधिकार से कभी वंचित नहीं करेगा।” उडुपी स्थित एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स के संयोजक हुसैन कोडी बेंगरे ने कहा कि यह साबित हो गया है कि देश में उपयुक्त न्यायिक एवं मूल अधिकारों के लिए प्रावधान है। हुसैन इस मामले में एक वादी हैं। उन्होंने कहा कि लड़कियों को मूल अधिकारों से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि खंडित फैसला आने की संभावना थी।

इस बीच, श्रीराम सेना के नेता मोहन भट ने कहा कि शीर्ष न्यायालय के खंडित फैसले ने भ्रम पैदा किया है। उन्होंने फैसले का सम्मान करते हुए कहा कि सरकार ने यह सुनिश्चित करने का फैसला किया है कि छात्राओं के साथ कोई भेदभाव नहीं होगा। उन्होंने कहा कि यह संदेह है कि अब प्रतिबंधित किये जा चुके संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) का हाथ हिजाब पर विवाद पैदा करने में था। उन्होंने कहा कि यदि वे दावा करते हें कि हिजाब उनके धर्म का हिस्सा है तो वे अपने परिसरों में इस नियम का पालन करें।

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