पूर्व उप प्रधानमंत्री लाल कृष्ण आडवाणी के 100वें जन्मदिन पर पीएम मोदी ने लिखा खास लेख, देश के लिए दिए योगदान को किया याद
नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी के मार्गदर्शक, देश के पूर्व उप प्रधानमंत्री और भारत रत्न से सम्मानित लाल कृष्ण आडवाणी आज अपना जन्मदिन मना रहे हैं और अपने जीवन के 100वें वर्ष में प्रवेश कर रहे हैं। इस ऐतिहासिक अवसर पर देश भर के तमाम दिग्गज नेताओं ने उन्हें जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस खास मौके पर उन्हें बधाई देते हुए एक विस्तृत और भावुक लेख लिखा है, जिसके जरिए उन्होंने आडवाणी के संपूर्ण जीवन सफर, उनके संघर्षों और राष्ट्र निर्माण में दिए गए उनके अमूल्य योगदान को बेहद करीब से याद किया है।
सोशल मीडिया पर पीएम मोदी का विशेष संदेश, कहा— ‘आडवाणी जी का जीवन आधुनिक भारत के कई महत्वपूर्ण अध्यायों से जुड़ा है’
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट साझा करते हुए लिखा कि “आज, 8 नवंबर का दिन बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि आदरणीय एल.के. आडवाणी जी अपने जीवन के 100वें वर्ष में प्रवेश कर रहे हैं। इस विशेष अवसर पर, मैं उन्हें अपनी सविधि शुभकामनाएं प्रेषित करता हूं।” पीएम ने आगे बताया कि उन्होंने एक विशेष आलेख लिखा है, जिसमें भारत के प्रति लाल कृष्ण आडवाणी के ऐतिहासिक और अमूल्य योगदान को गहराई से रेखांकित किया गया है। संयोग देखिए कि इस वर्ष उनका यह पावन जन्मदिन दीपावली के पर्व के साथ पड़ रहा है, जो प्रकाश और भगवान राम की प्रेरणा का प्रतीक है। इसके साथ ही यह उस दौर में हो रहा है जब देश जनसंघ की स्थापना के 75 वर्ष, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती और हाल ही में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के 100 वर्ष पूरे होने का उत्सव मना रहा है।
व्यक्तिगत रूप से बेहद भावुक पल, शून्य से शुरुआत कर पार्टी को शिखर तक पहुंचाने का किया जिक्र
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने लेख में यह भी साझा किया कि आज का यह दिन उनके लिए व्यक्तिगत रूप से काफी भावुक कर देने वाला है। उन्होंने लिखा कि वे खुद को अत्यंत भाग्यशाली मानते हैं कि उन्हें हमेशा आडवाणी जी का स्नेह, सानिध्य और मार्गदर्शन प्राप्त होता रहा है। आज उनके साथ बिताए गए अनगिनत पल और उनसे जुड़ी तमाम स्मृतियां मन में उमड़ रही हैं। पीएम ने बताया कि आडवाणी जी का जन्म 8 नवंबर 1927 को देव दीपावली के पवित्र दिन हुआ था। वर्ष 1947 में अपनी युवावस्था के दौरान उन्हें सिंध में अपनी जड़ों और जानी-पहचानी दुनिया को पीछे छोड़ने का भीषण दर्द सहना पड़ा था, लेकिन उन्होंने बिना किसी कड़वाहट या शिकायत के शून्य से अपने जीवन का पुनर्निर्माण किया। विपरीत परिस्थितियों में भी शून्य से शुरुआत करने की उनकी यह अद्भुत खूबी जनसंघ को मजबूत करने और बाद में बीजेपी की नींव रखने के दौरान साफ तौर पर देखने को मिली। उनके नेतृत्व में 1989 में कांग्रेस कमजोर हुई और 1996 में बीजेपी देश की सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी।
आडवाणी जी की वैचारिक स्पष्टता और छद्म धर्मनिरपेक्षता को बेनकाब करने की क्षमता पर प्रकाश
प्रधानमंत्री ने अपने लेख में लाल कृष्ण आडवाणी की दो सबसे बड़ी और विशिष्ट खूबियों का विशेष जिक्र किया है। पहली खूबी उनकी वैचारिक स्पष्टता और बौद्धिक प्रखरता थी, जो उनके हर भाषण और लेख में स्पष्ट रूप से झलकती थी। जनसंघ और बीजेपी के लिए उनके द्वारा तैयार किए गए सैद्धांतिक दस्तावेज आज भी अध्ययन करने योग्य हैं। उनकी दूसरी सबसे बड़ी खूबी भारतीय राजनीति के एक बड़े तबके द्वारा लंबे समय से चलाए जा रहे छद्म धर्मनिरपेक्षता (Pseudo-secularism) के एजेंडे को बेनकाब करने और उसके खिलाफ खुलकर खड़े होने की उनकी अदम्य क्षमता थी।
अटल-आडवाणी की जोड़ी ने बदली भारतीय राजनीति की दिशा, हर जिम्मेदारी को पूरी निष्ठा से निभाया
पीएम मोदी ने बताया कि आडवाणी जी ने अपने जीवन में हर एक राजनीतिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी को पूरी लगन और ईमानदारी के साथ निभाया। एक आरएसएस प्रचारक के रूप में उन्होंने सबसे पहले राजस्थान के विभिन्न क्षेत्रों में कार्य किया, जिसके बाद वे दिल्ली आकर अटल बिहारी वाजपेयी जी के साथ मिलकर काम करने लगे। इतिहास इस बात का गवाह है कि दो बड़े राजनीतिक व्यक्तित्वों का दशकों तक बिना किसी आपसी प्रतिस्पर्धा के एक-दूसरे का कंधे से कंधा मिलाकर काम करना अत्यंत दुर्लभ मिसाल है। अटल जी और आडवाणी जी ने मिलकर भारतीय राजनीति की पूरी दिशा और दशा ही बदलकर रख दी। दिल्ली आने के बाद उन्होंने खुद को पूरी तरह से जनसंघ के विस्तार में झोंक दिया और 1967 में दिल्ली मेट्रोपॉलिटन काउंसिल के अध्यक्ष बने।
संसदीय सफर से लेकर आपातकाल के दौर तक, लोकतंत्र की रक्षा के लिए हमेशा सबसे आगे रहे
वर्ष 1970 के दशक में आडवाणी जी की संसदीय यात्रा का शानदार आगाज हुआ, जहां संसद के दोनों सदनों में उनके तार्किक और ओजस्वी विचारों को सभी राजनीतिक दलों ने भरपूर सराहा। आपातकाल (इमरजेंसी) का वह दौर उनके जीवन का एक बहुत बड़ा और निर्णायक मोड़ था, जहां वे देश के लोकतंत्र को बचाने और संविधान की रक्षा करने की जंग में सबसे आगे खड़े रहे। उनके उन तमाम संघर्षों और अनुभवों को उनकी प्रसिद्ध पुस्तक ‘ए प्रिजनर्स स्क्रैप-बुक’ में बहुत खूबसूरती से संजोया गया है। इसके अलावा, जनता पार्टी सरकार में सूचना एवं प्रसारण मंत्री के रूप में तथा बाद में देश के गृह मंत्री और उप-प्रधानमंत्री के रूप में उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने और आतंकवाद के खिलाफ कड़े कानून बनाने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई।
सोमनाथ से अयोध्या रथ यात्रा के दिनों को किया याद, सादगी और सीखने की प्रेरणा से भरा है उनका व्यक्तित्व
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने लेख में ऐतिहासिक ‘सोमनाथ से अयोध्या रथ यात्रा’ का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह यात्रा भारतीय समाज और संस्कृति की दिशा को सकारात्मक रूप से बदलने वाली साबित हुई थी। उन्हें इस बात का गर्व है कि वे इस यात्रा के विचार से लेकर उसके क्रियान्वयन तक हर कदम पर साथ रहे। उन्होंने बिहार में आडवाणी जी की गिरफ्तारी के कठिन पलों को भी याद किया, जिसके बाद गुजरात में पार्टी ने बड़ा कदम उठाया था। प्रधानमंत्री ने अंत में कहा कि आडवाणी जी का सादगीपूर्ण स्वभाव, पढ़ने का उनका शौक, सिनेमा और थिएटर के प्रति उनका लगाव तथा सिंधी संस्कृति और ‘सिंधु दर्शन’ के प्रति उनका समर्पण हम सभी के लिए एक प्रेरणा है। देश के लोगों ने उनकी महान सेवाओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए उन्हें वर्ष 2024 में देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से अलंकृत किया है।