मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के तहत शहर में 45 अत्याधुनिक पीएम ई-बसों सहित 55 अन्य बसों का संचालन शुरू होने से यातायात व्यवस्था में सुधार तो हुआ है, लेकिन बसों का इंतजार करने वाले आम यात्रियों की परेशानियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। स्थिति यह है कि शहर के करीब 200 बस स्टॉप गंदगी, अतिक्रमण और भारी अव्यवस्थाओं से घिरे हुए हैं। घमापुर, रेलवे स्टेशन, कलेक्ट्रेट, बल्देवबाग और नौदरा ब्रिज जैसे प्रमुख मार्गों पर बने इन बस स्टॉपों की हालत इतनी खराब है कि यात्रियों को वहां बैठने के बजाय सड़क किनारे खड़े होकर बसों का इंतजार करना पड़ता है।
🏛️ रखरखाव के अभाव में बदरंग हुए बस स्टॉप: रेलिंग गायब और अस्थायी ठिकानों में हो रहे तब्दील
शहर में मेट्रो बस सेवा की शुरुआत के दौरान करीब 14 साल पहले ये बस स्टॉप तैयार किए गए थे। नगर निगम और बाद में स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत पीपीपी मॉडल पर नए स्टॉप भी बनाए गए, जिन पर लाखों रुपये खर्च किए गए। इसके बावजूद मेंटेनेंस के अभाव में ज्यादातर बस स्टॉप से रेलिंग गायब हो चुकी हैं, और कुछ जगहों पर तो यह अवैध पार्किंग व असामाजिक तत्वों के अस्थायी ठिकानों में तब्दील हो चुके हैं। सवाल यह उठता है कि जब सार्वजनिक परिवहन को आधुनिक बनाया जा रहा है, तो उसके बुनियादी ढांचे और रखरखाव की अनदेखी क्यों की जा रही है?
🗺️ इन प्रमुख मार्गों पर संचालित हो रही हैं बसें
शहर के नागरिकों को बेहतर कनेक्टिविटी देने के लिए मदर टेरेसा से लेकर घाना, आईटीआई, दीनदयाल बस स्टैंड, विजय नगर, रानीताल, नौदरा ब्रिज, कलेक्ट्रेट, हाईकोर्ट, घमापुर, भेड़ाघाट चौक, धुआंधार और खमरिया फैक्ट्री समेत कई महत्वपूर्ण रूटों पर इन बसों का संचालन किया जा रहा है, जिससे हजारों दैनिक यात्रियों को लाभ मिल रहा है।