Ujjain News: ‘आदिवासी और सनातन दोनों प्रकृति पूजक’; युवा धर्म संसद में IRS निशा उरांव का मतांतरण पर करारा प्रहार

उज्जैन। महाकाल की नगरी उज्जैन में गुरुवार को ‘सेवाज्ञ संस्थानम्’ की तीन दिवसीय युवा धर्म संसद का विचारोत्तेजक आगाज हुआ।प्रारंभिक सत्र ‘युवा पंचायत’ में मतांतरण और सांस्कृतिक पहचान से जुड़े विषयों पर देश के प्रबुद्ध वक्ताओं ने अपने विचार रखे। इस दौरान समाज की जड़ों को मजबूत करने और भ्रामक नैरेटिव से बचने पर जोर दिया गया।

🌳 “मूल मिट्टी से उखड़ा पौधा विशाल छाया नहीं दे सकता”: IRS अधिकारी निशा उरांव ने मतांतरण के दंश पर साधा निशाना

रांची (झारखंड) में पदस्थ भारतीय राजस्व सेवा (IRS) की वरिष्ठ अधिकारी निशा उरांव ने मतांतरण के प्रभाव को एक सटीक रूपक के जरिए समझाया।

उन्होंने कहा कि अपनी मूल मिट्टी से उखाड़कर गमले में लगाया गया पौधा जिंदा तो रहता है और उसमें फूल भी आते हैं, लेकिन उसकी गहरी जड़ों का स्थायित्व और विशाल छाया देने की क्षमता खत्म हो जाती है। जब कोई समाज अपनी मूल परंपरा और सांस्कृतिक चेतना से कटता है, तो समाज में एक शून्यता पैदा होती है, जिसका फायदा उठाकर भ्रामक नैरेटिव प्रवेश करते हैं।

🏹 “आदिवासी और सनातन दोनों प्रकृति के पूजक”: भगवान श्रीराम की विजय यात्रा में वनवासी समाज की थी ऐतिहासिक भूमिका

निशा उरांव ने आदिवासी समाज को सनातन परंपरा से अलग बताने या दोनों के बीच दूरी पैदा करने की कोशिशों पर कड़ा ऐतराज जताया।

उन्होंने कहा कि “आदिवासी और सनातन धर्म, दोनों ही मूल रूप से प्रकृति के पूजक हैं। ऐसे में आदिवासियों को सनातन से अलग करके देखने का प्रयास पूरी तरह निराधार है।” भगवान श्रीराम का उदाहरण देते हुए उन्होंने याद दिलाया कि रावण पर विजय यात्रा में वनवासी समाज की केंद्रीय और ऐतिहासिक भूमिका रही थी। उन्होंने कहा कि ईश्वर तक पहुंचने के रास्ते अलग हो सकते हैं, लेकिन अंतिम सत्य एक ही है।

🧱 “100 वर्ष पूरे होने के बाद संघ की जिम्मेदारी और बढ़ी”: उज्जैन प्रवास पर पहुंचे RSS प्रमुख डॉ. मोहन भागवत

इससे पहले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत गुरुवार को इंदौर होते हुए उज्जैन पहुंचे।

वे शुक्रवार को युवा धर्म संसद का विधिवत उद्घाटन करेंगे। अपने प्रवास के पहले दिन उन्होंने स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए कहा, “पहले संघ को लेकर कुछ लोगों की अलग विचारधारा थी और हम पर प्रतिबंध भी लगे, लेकिन आज हमारी स्वीकार्यता व्यापक है। संघ के 100 वर्ष पूरे होने के बाद अब समाज निर्माण में हमारी भूमिका और अधिक बढ़ गई है।” उन्होंने पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण, सामाजिक समरसता और नागरिक अनुशासन पर जोर दिया।

📜 धर्म से राष्ट्र तक युवाओं के प्रश्नों पर मंथन: शुक्रवार को आयोजित होंगे ये प्रमुख सत्र

युवा धर्म संसद के आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा इस प्रकार है:

  • ⏰ सुबह 10.00 बजे (उद्घाटन सत्र): संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत गीता भवन में तीन दिवसीय युवा धर्म संसद का शुभारंभ करेंगे। इस दौरान आचार्य मिथिलेश नंदिनी शरण महाराज, प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी और आशीष कुमार आशु उपस्थित रहेंगे।

  • ⏰ दोपहर 12.00 बजे (व्याख्यान सत्र): ‘धर्म की अस्तित्वपरक अवधारणा एवं चारित्रिक उत्तरदायित्व’ विषय पर स्वामी अवधेशानंद गिरि महाराज, गीतकार मनोज मुंतशिर और जे. नंदकुमार विचार रखेंगे।

  • ⏰ शाम 04.00 बजे (संवाद सत्र): ‘निरंकुश संवाद-पद्धति तथा सूचना एवं विचार का संघर्ष’ विषय पर आचार्य पुंडरीक गोस्वामी, संपादक विष्णु प्रकाश त्रिपाठी और IIM इंदौर के निदेशक प्रो. हिमांशु राय युवाओं से संवाद करेंगे।

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