MP News : क्या एमपी हाईकोर्ट भर्ती में EWS वर्ग को मिलेगी 5 साल की छूट? जानें हाईकोर्ट का फैसला

जबलपुर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में अन्य राज्यों की तरह आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के अभ्यर्थियों को शासकीय भर्तियों में आयु सीमा में छूट प्रदान किए जाने के अत्यंत महत्वपूर्ण मामले पर सुनवाई हुई।

याचिकाकर्ता ने विभिन्न राज्यों के हाईकोर्ट्स के फैसलों का हवाला देते हुए मांग की कि मध्य प्रदेश हाईकोर्ट द्वारा भी EWS वर्ग के अभ्यर्थियों को अन्य आरक्षित वर्गों (SC/ST/OBC) की भांति अधिकतम आयु सीमा में छूट दी जानी चाहिए। इस मामले पर हाईकोर्ट के जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस बी.पी. शर्मा की युगलपीठ (Division Bench) ने विस्तृत सुनवाई की।

❓ सामान्य वर्ग के EWS अभ्यर्थियों को आयु सीमा में छूट क्यों नहीं? याचिकाकर्ता ने उठाए सवाल

दरअसल, पन्ना निवासी सत्येंद्र कुमार खरे की ओर से दायर याचिका में बताया गया था कि मध्य प्रदेश हाईकोर्ट द्वारा 14 अगस्त 2026 को ‘असिस्टेंट ग्रेड-3’ (AG-3) के 1174 पदों पर भर्ती के लिए आधिकारिक विज्ञापन जारी किया गया था।

जारी विज्ञापन में सामान्य (General) और EWS वर्ग के पुरुष अभ्यर्थियों के लिए अधिकतम आयु सीमा 40 वर्ष तय की गई है, जबकि आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए यह सीमा 45 वर्ष निर्धारित है। याचिका में तर्क दिया गया कि EWS वर्ग को 10 प्रतिशत आरक्षण का लाभ दिए जाने के बावजूद आयु सीमा में छूट न देना भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 में निहित ‘समानता के अधिकार’ का सीधा उल्लंघन है।

🏛️ गुजरात, तेलंगाना और राजस्थान का दिया उदाहरण: अन्य राज्यों की तरह मिले 5 साल की राहत

याचिका में अन्य उच्च न्यायालयों के फैसलों को आधार बनाते हुए उल्लेख किया गया कि गुजरात हाईकोर्ट, तेलंगाना हाईकोर्ट और राजस्थान हाईकोर्ट द्वारा भर्ती विज्ञापनों में EWS उम्मीदवारों को आरक्षित वर्ग की तरह 5 वर्ष की अतिरिक्त आयु छूट प्रदान की गई है।

इसी आधार पर याचिका में राहत मांगी गई कि मध्य प्रदेश में भी EWS वर्ग का अभ्यर्थी होने के नाते उन्हें अन्य राज्यों की तर्ज पर आयु सीमा में नियमानुसार छूट प्रदान की जाए।

📝 कोर्ट ने दी अंतरिम राहत: फॉर्म जमा करने और परीक्षा में बैठने की मिली सशर्त अनुमति

युगलपीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए याचिकाकर्ता को अंतरिम राहत प्रदान की है।

अदालत ने निर्देश दिया कि अंतरिम उपाय के तौर पर याचिकाकर्ता का परीक्षा फॉर्म स्वीकार किया जाए और उन्हें परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दी जाए। हालांकि, कोर्ट ने साफ किया कि याचिकाकर्ता का परीक्षा परिणाम अदालत की पूर्व अनुमति के बिना घोषित नहीं किया जाएगा और इस अंतरिम आदेश के आधार पर याचिकाकर्ता किसी स्थायी अधिकार का दावा नहीं कर सकेगा। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता विकास मिश्रा और धीरज तिवारी ने पैरवी की। युगलपीठ ने अनावेदकों को नोटिस जारी कर 2 सप्ताह में जवाब तलब किया है।

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