लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर अखिलेश का बड़ा हमला! 63 किमी के सफर और पंखे से सुखाने वाली मरम्मत पर कसा तंज

लखनऊ (उत्तर प्रदेश): उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने हाल ही में निर्मित लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे की स्थिति और उसकी मरम्मत के अजीबोगरीब तरीकों को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार पर जोरदार हमला बोला है।

अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा करते हुए तंज कसा कि महज दो से तीन सप्ताह के भीतर जिस एक्सप्रेसवे की सड़कें उखड़ने लगी हैं, उस पर यात्रा करने का जोखिम कौन उठाएगा?

💨 “पंखे से सुखाया जा रहा है एक्सप्रेसवे”, अखिलेश बोले— यह है भाजपाई तरक्की की नई हवा

अखिलेश यादव ने एक्सप्रेसवे की मरम्मत के दौरान गिट्ठी व डामर को सुखाने के लिए ‘पंखे’ (Pedestal Fans) के उपयोग को अत्यंत हास्यास्पद करार दिया।

उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि “यह है भाजपाई तरक्की की नई हवा!” जिस सड़क का कुछ ही दिनों पूर्व बड़े स्तर पर उद्घाटन किया गया हो, उसे इतनी जल्दी मरम्मत की आवश्यकता पड़ जाना निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर बड़े प्रश्नचिह्न खड़े करता है। अखिलेश ने आगे कहा कि सवाल यह भी उठता है कि ‘अटल प्रोग्रेस वे’ केवल योजनाओं तक ही सीमित रहेगा या कभी धरातल पर बनेगा भी… या फिर कागजों में ही बनकर उसका ‘हिस्सा-बांट’ पूरा हो चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा शासन में निर्मित हर संरचना चलती कम है, बल्कि धंसती, ढहती और गिरती ज्यादा है।

💰 ₹4,700 करोड़ की लागत से बना है एक्सप्रेसवे, पंखा लगाकर मरम्मत करने पर छिड़ा विवाद

उल्लेखनीय है कि लखनऊ और कानपुर को आपस में जोड़ने वाले इस महत्वाकांक्षी 6-लेन एक्सप्रेसवे के निर्माण में लगभग 4,700 करोड़ रुपये की विशाल धनराशि व्यय की गई है।

हाल ही में जनता को समर्पित इस एक्सप्रेसवे पर जब गड्डों और उखड़ी सड़क को सुखाने हेतु बिजली के पंखे लगाए गए, तो इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इसी घटना का संज्ञान लेते हुए सपा प्रमुख ने सरकार के बुनियादी ढांचे के दावों पर सवाल खड़े किए हैं। यह एक्सप्रेसवे प्रदेश के दो प्रमुख औद्योगिक व प्रशासनिक केंद्रों—लखनऊ और कानपुर—के मध्य निर्बाध कनेक्टिविटी प्रदान करता है।

⏱️ 2 से 3 घंटे का सफर अब 35 से 45 मिनट में, जानिए एक्सप्रेसवे की प्रमुख विशेषताएं

भौगोलिक दृष्टि से लखनऊ और कानपुर के बीच की कुल दूरी लगभग 63 किलोमीटर है।

इस एक्सप्रेसवे के निर्माण से पूर्व दोनों शहरों के मध्य यात्रा तय करने में औसतन 2 से 3 घंटे का समय लगता था, परंतु अब इस एक्सप्रेसवे की सहायता से यह दूरी मात्र 35 से 45 मिनट में पूरी हो जाती है। वाहनों के आवागमन हेतु इस मार्ग पर कारों के लिए अधिकतम गति सीमा 120 किमी/घंटा तथा भारी वाहनों (जैसे बस या ट्रक) के लिए 80 से 100 किमी/घंटा निर्धारित की गई है। इस 63 किलोमीटर लंबे मार्ग में लगभग 13 से 18 किलोमीटर का हिस्सा एलिवेटेड (Elevated Stretch) बनाया गया है।

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