Lalit Modi Interview: ललित मोदी ने ‘भगोड़ा’ होने के आरोपों को नकारा; कहा- “मुझे किसी को कुछ साबित करने की जरूरत नहीं”

इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) के पूर्व चेयरमैन और लंबे समय से भारत से बाहर रह रहे ललित मोदी ने अपने ऊपर लगे ‘भगोड़ा’ होने के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने दावा किया कि उन्हें किसी भी अपराध के लिए अब तक दोषी नहीं ठहराया गया है और वह कहीं भाग नहीं रहे हैं। भारत लौटने की योजना पर ललित मोदी ने स्पष्ट किया कि अब उनकी प्राथमिकताएं पूरी तरह बदल चुकी हैं और उन्हें खुद को सही साबित करने की कोई आवश्यकता महसूस नहीं होती।

⚖️ “भारत सरकार से मुकाबला नहीं कर सकते”

समाचार एजेंसी ANI के साथ एक विशेष इंटरव्यू में, ललित मोदी ने भारतीय अधिकारियों का मजाक उड़ाते हुए कहा कि वह उनसे छिपने में कामयाब रहे हैं। उन्होंने इन आरोपों को कानूनी सच्चाई के बजाय मीडिया के सनसनीखेज रवैये का नतीजा बताया। उन्होंने कहा, “मैं पूरी दुनिया में घूम रहा हूं। अगर मैं भाग रहा होता, तो आप मुझे पकड़ ही लेते। भारत सरकार का हाथ बहुत लंबा है और उनसे मुकाबला करना संभव नहीं है। मेरा ऐसा कोई इरादा भी नहीं है। यह सरकार नहीं, बल्कि मीडिया का बनाया हुआ नैरेटिव है।”

🏛️ न्याय व्यवस्था पर सवाल, कहा- “देर से मिला न्याय सजा जैसा”

ललित मोदी ने भारत में मानहानि कानूनों की स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि कानूनी लड़ाइयों का अब तक कोई ठोस हल नहीं निकला है। उन्होंने सुस्त भारतीय न्याय व्यवस्था पर दुख जताते हुए इसे अपने आप में एक तरह की सजा करार दिया। उन्होंने कहा, “हमारे देश में मामलों की सुनवाई कभी होती ही नहीं है। न्याय मिलता तो है, लेकिन मुझे नहीं पता कि कब मिलता है। देर से मिलने वाला न्याय भी एक सजा के समान है। अगर मैं इतना ही बुरा हूं, तो मुझे अदालत में पेश क्यों नहीं किया गया?”

✈️ “अब मेरी प्राथमिकताएं बदल गई हैं”

जब उनसे पूछा गया कि क्या वह अपना नाम औपचारिक रूप से क्लियर कराने के मकसद से भारत लौटने की योजना बना रहे हैं, तो उन्होंने साफ कर दिया कि अब उनकी प्राथमिकताएं बदल गई हैं। उन्होंने कहा, “खुद को सही साबित करने की जिद अब खत्म हो गई है। एक दौर था जब मैं वापस आना चाहता था, तब मेरे पास कई वजहें भी थीं। लेकिन अब मुझे किसी को कुछ भी साबित करने की जरूरत नहीं है।” भले ही ललित मोदी इन आरोपों को खारिज कर रहे हों, लेकिन प्रवर्तन निदेशालय (ED) और अन्य एजेंसियां अभी भी उनके IPL कार्यकाल के दौरान कथित वित्तीय अनियमितताओं और मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों की जांच में जुटी हुई हैं।

संपादकीय टिप्पणी: ललित मोदी का यह साक्षात्कार कानूनी पेचीदगियों और भगोड़े के टैग के बीच के अंतर को दर्शाता है। क्या आपको लगता है कि कानूनी मामलों के लंबे समय तक खिंचने से ‘जस्टिस डिलेड इज़ जस्टिस डिनाइड’ वाली कहावत सच हो रही है? अपने विचार नीचे साझा करें।

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