J-K Assembly: आखिर उस बिल में क्या है, जिसने जम्मू-कश्मीर विधानसभा में रच दिया इतिहास? जानें हर बारीक डिटेल

जम्मू-कश्मीर विधानसभा के इतिहास में पहली बार सरकार ने एक प्राइवेट मेंबर बिल पेश किए जाने का समर्थन किया है. बिल का नाम जम्मू और कश्मीर भूमि अनुदान (बहाली और संरक्षण) विधेयक, 2025 है. इसका मकसद जम्मू और कश्मीर भूमि अनुदान अधिनियम, 1960 और उसके नियमों को बहाल करना है. साल 2022 में उपराज्यपाल ने 1960 के कानून में संशोधन किया था, जिससे पूरे क्षेत्र में सरकारी जमीन और होटलों से स्थानीय पट्टेदारों के स्थायी रूप से बेदखल होने का खतरा पैदा हो गया था. इस विधेयक को केंद्र के 2022 के नियमों के लिए एक चुनौती के तौर पर देखा जा रहा है. नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायक तनवीर सादिक ने इल बिल को पेश किया.

विधेयक का मकसद पूरे केंद्र शासित प्रदेश में मौजूदा कब्जेदारों के लिए पट्टों का नवीनीकरण करना है. जब इसे पेश करने की बारी आई तो मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि वह इसकी अनुमति देंगे. स्पीकर अब्दुल रहीम राथर ने इसे ध्वनि मत के लिए रखा और NC के समर्थन से यह पारित हो गया, जबकि विपक्ष ने वोटिंग की मांग नहीं की.

सज्जाद लोन ने सरकार को घेरा

हालांकि, हंदवाड़ा के MLA और पीपल्स कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष सज्जाद गनी लोन ने उस प्रस्तावित कानून की कड़ी आलोचना की. उन्होंने कहा कि बिल का मकसद कश्मीर के सुपर एलीट लोगों की मदद करना है. यह साफ करते हुए कि वह इसके विरोधी नहीं हैं, लोन ने एक्स पर एक पोस्ट में सवाल उठाया कि इससे सबसे गरीब लोगों को कैसे फ़ायदा होगा.

उन्होंने कहा, CM साहब ने एक प्राइवेट मेंबर बिल पेश करने की इजाजत दी. सरकार ने इसका विरोध नहीं किया. उन्होंने आगे कहा, यह बिल जमीन से जुड़ा है. खास तौर पर सरकारी जमीन पर उन लीज को बढ़ाने से, जिनकी मियाद खत्म हो चुकी है. इसमें कश्मीर की कुछ सबसे कीमती रियल एस्टेट जमीनें शामिल हैं, जिनकी कीमत, मेरा अंदाजा है, लगभग 70,000 से एक लाख करोड़ रुपये होगी या शायद उससे भी कहीं ज़्यादा.

लोन ने कहा कि छोटे-छोटे भूखंडों वाले लाखों गरीब लोग रोजाना उत्पीड़न का शिकार हो रहे हैं. वे आज भी उतने ही बेबस हैं, जितने दशकों से रहे हैं. क्या वे किसी विधेयक के हकदार नहीं हैं. पीपल्स कॉन्फ्रेंस के नेता ने लीज के बारे में भी जानकारी मांगी.

उन्होंने कहा, क्या मैं कुछ सवाल पूछ सकता हूं. मैंने ये सवाल विधानसभा में पूछे थे, लेकिन मुझे कभी उनका जवाब नहीं मिला. सरकार की कुल कितनी जमीन (कनाल में) है, जिसे लीज़ पर दिया गया है? अब तक लीज़ की कितनी रकम चुकाई गई है.

बीजेपी ने भी उठाए सवाल

बीजेपी विधायक और विपक्ष के नेता सुनील शर्मा ने भी इस बिल की आलोचना की. उन्होंने कहा, यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है और भरोसे के साथ विश्वासघात जैसा है. ऐसा लगता है कि लोगों द्वारा दिए गए जनादेश का इस्तेमाल जनता की भलाई के लिए नहीं, बल्कि कुछ खास लोगों को बचाने के लिए किया जा रहा है. प्रस्तावित कानून से सरकारी ज़मीन के बड़े हिस्सों को कम दरों पर देने का रास्ता खुल सकता है. उन्होंने कहा कि सरकार जनता की संपत्ति की रक्षा करने के बजाय, कुछ चुनिंदा प्रभावशाली लोगों को संरक्षण दे रही है.

बीजेपी के एक और विधायक रणबीर सिंह पठानिया ने कहा, यह बिल केंद्र शासित प्रदेश में पुनर्गठन के बाद की कानूनी व्यवस्था के मूल पर ही चोट करता है. किसी मौजूदा कानूनी व्यवस्था को अस्थिर करने की कोशिश करने वाले प्राइवेट मेंबर बिल के जरिए संसद की सर्वोच्चता को कमज़ोर नहीं किया जा सकता.

बिल पास होने से क्या होगा?

2022 के नियमों के बाद गुलमर्ग में कई होटल मालिकों के लीज की अवधि समाप्त होने के बीच, इस बिल का महत्व बढ़ जाता है. ये नियम यह अनिवार्य करते हैं कि समाप्त हो चुके लीज़ का नवीनीकरण न किया जाए और ज़मीन को नाममात्र के प्रीमियम पर आवंटित करने के बजाय बाज़ार दरों पर नीलाम किया जाए. अगर यह पारित हो जाता है, तो यह मौजूदा कब्ज़ेदारों के लिए नए सिरे से नीलामी करने के बजाय लीज़ के नवीनीकरण की अनुमति देगा.

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