गडरोली के आदिल शेख की नन्ही बिटिया फरहाना ने रखा पहला रोजा, इफ्तार कार्यक्रम हुआ आयोजित

रमजान की बरकतों के बीच नन्ही फरहाना पिता आदिल शेख गडरोली ने इस वर्ष अपना पहला रोजा रखकर आस्था और सब्र की मिसाल पेश की है।

कम उम्र में उनके इस जज़्बे की गांव सहित आसपास के क्षेत्रों में काफी सराहना हो रही है। फरहाना के दादा मरहूम रुस्तम खा पेशे से शिक्षक थे, ओर पिता किराना व्यवसायी है धार्मिक माहौल में पली-बढ़ी फरहाना ने पूरे उत्साह और हिम्मत के साथ रमजान का पहला रोजा रखा। ओर पूरी लगन और सब्र के साथ पूरा किया।

परिजनों ने बताया कि फरहाना ने सहरी से लेकर इफ्तार तक पूरे नियमों का पालन किया और इफ्तार के समय अल्लाह का शुक्र अदा किया। बच्ची के इस हौसले और इबादत के जज़्बे को देखकर परिवार के सदस्य काफी खुश हैं।

रिस्तेदारो ओर गांव गडरोली के समाजजनों ने भी फ़रहाना की सराहना करते हुए घर पहुँचकर मुबारकबाद दी, इस दौरान फरहाना के पिता आदिल शेख ने रोजा इफ्तार कार्यक्रम आयोजित किया, इन दौरान इफ्तार के बाद सभी ने खेर ओर बरकत की दुआएं मांगी

मालवा अभीतक की ताजा खबर सीधे पाने के लिए : 
ताज़ा ख़बर पाने के लिए एंड्राइड एप्लीकेशन इनस्टॉल करें :

पीएम मोदी ने देशवासियों को दी दिवाली की शुभकामनाएं, इस साल भी जवानों के साथ मनाएंगे पावन पर्व     |     भारत में बाल विवाह के आंकड़ों में आई गिरावट, फिर भी पश्चिम बंगाल और बिहार में स्थिति गंभीर— जानें रिपोर्ट     |     ब्रेकअप के बाद एक्स गर्लफ्रेंड की हर हरकत जानने के लिए पुलिस विभाग में डाली 97 आरटीआई, हैरान करने वाला मामला     |     कर्नाटक के बेलगावी में सनसनीखेज वारदात, एसएसबी जवान प्रेमी ने 23 वर्षीय युवती की गला घोंटकर की हत्या     |     कटिहार में चर्चित शाहरुल अपहरण और हत्याकांड मामला, अदालत ने 6 दोषियों को सुनाई उम्रकैद की सजा     |     कोलकाता में तृणमूल नेता अभिषेक बनर्जी के घर के बाहर भारी हंगामा, ममता बनर्जी ने पुलिस कमिश्नर से मांगा इस्तीफा     |     भदोही में ऑनर किलिंग का सनसनीखेज मामला, दो भाइयों ने की 12वीं की छात्र बहन की गला घोंटकर हत्या     |     न्यूजीलैंड के खिलाफ दूसरे वनडे में बाल-बाल बची टीम इंडिया, बारिश और DLS नियम के सहारे 4 रन से जीता मुकाबला     |     दिवाली 2026 पर घर लाएं सही लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति, जानें खरीदने और स्थापना के जरूरी नियम     |     सोनिया गांधी का बड़ा खुलासा, बाबरी ढांचा गिरते देख रो पड़ी थीं— इंदिरा गांधी की इमरजेंसी को माना गलती     |