खाली खजाना और बदहाल देश: आजादी के बाद जब पेश हुआ पहला बजट, तो अंग्रेजों ने छोड़ी थी इतनी ‘चिल्लर

Budget: देश का आम बजट 1 फरवरी 2025 को संसद में पेश होने जा रहा है. हर बार की तरह इस बार भी आम आदमी से लेकर उद्योग जगत तक, सबकी निगाहें वित्त मंत्री के पिटारे पर टिकी हैं. टैक्स में छूट मिलेगी या महंगाई की मार पड़ेगी, यह सवाल हर किसी के मन में है. लेकिन इस भारी-भरकम बजट के शोर-शराबे के बीच, क्या आपने कभी सोचा है कि जब भारत आजाद हुआ था तब देश की तिजोरी का हाल क्या था? आज जब हम ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी की बात करते हैं, तो यह विश्वास करना मुश्किल होता है कि आजाद भारत का पहला बजट कितना छोटा था. आज हम आपको इतिहास के पन्नों से उस दौर में ले चलेंगे, जब देश का बही-खाता पहली बार स्वतंत्र रूप से लिखा गया था.

कैसा था पहला बजट

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 112 के तहत इसे ‘वार्षिक वित्तीय विवरण’ कहा जाता है, जिसमें सरकार की कमाई और खर्च का पूरा लेखा-जोखा होता है. लेकिन भारत में बजट की परंपरा आजादी से बहुत पहले शुरू हो चुकी थी. भारत का सबसे पहला बजट 7 अप्रैल 1860 को ब्रिटिश हुकूमत के दौरान पेश किया गया था. उस समय इसे जेम्स विल्सन ने पेश किया था.

हालांकि हमें जिस पल का इंतजार था वह 1947 में आया. 15 अगस्त को देश आजाद हुआ और इसके ठीक तीन महीने बाद, 26 नवंबर 1947 को आजाद भारत का पहला यूनियन बजट संसद में रखा गया. यह ऐतिहासिक जिम्मेदारी तत्कालीन वित्त मंत्री सर आर.के. शनमुखम चेट्टी ने निभाई थी. यह बजट पूरे साल के लिए नहीं बल्कि महज साढ़े सात महीनों (15 अगस्त 1947 से 31 मार्च 1948) के लिए तैयार किया गया था.

बंटवारे के बीच पेश हुआ पहला खाता-बही

उस समय देश विभाजन के दर्द से गुजर रहा था और जगह-जगह सांप्रदायिक दंगों की आग भड़की हुई थी. ऐसे नाजुक और तनावपूर्ण माहौल में देश की अर्थव्यवस्था को संभालना एक बड़ी चुनौती थी. सर आर.के. शनमुखम चेट्टी ने जब बजट पेश किया तो उनके सामने विस्थापितों को बसाने और सीमाओं की सुरक्षा जैसी बड़ी जिम्मेदारियां थीं.

इस बजट की एक सबसे दिलचस्प बात यह थी कि पाकिस्तान का अलग देश बनने के बावजूद, यह तय किया गया था कि सितंबर 1948 तक भारत और पाकिस्तान एक ही करेंसी (मुद्रा) साझा करेंगे. बाद में सर चेट्टी के इस्तीफे के बाद जॉन मथाई ने वित्त मंत्री का पद संभाला और 1949-50 का बजट पेश किया, जो सही मायनों में सभी रियासतों को मिलाकर बनाए गए एक संयुक्त भारत का बजट था.

171.15 करोड़ रुपये था कुल राजस्व

अब आते हैं उन आंकड़ों पर, जो आज के दौर में आपको हैरान कर देंगे. जिस देश में आज हजारों करोड़ की परियोजनाएं आम बात हैं, वहां आजाद भारत के पहले बजट का कुल राजस्व अनुमान (Revenue Estimate) सिर्फ 171.15 करोड़ रुपये था. जी हां, सिर्फ 171 करोड़. वहीं, सरकार का कुल खर्च लगभग 197.29 करोड़ रुपये आंका गया था.

इस हिसाब से देखा जाए तो देश का पहला बजट घाटे का बजट था, जिसमें राजकोषीय घाटा करीब 24.59 करोड़ रुपये था. चूंकि आजादी के तुरंत बाद देश की सुरक्षा सबसे बड़ा मुद्दा थी, इसलिए बजट का एक बड़ा हिस्सा सेना और रक्षा पर खर्च किया गया. आंकड़ों के मुताबिक रक्षा आवंटन 92.74 करोड़ रुपये था, जो कुल खर्च का लगभग 46 से 50 प्रतिशत था.

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