घर आए नागा साधु को ये दो चीजें जरूर करें दान, भगवान शिव होंगे खुश, खुल जाएगा किस्मत का पिटारा

प्रयागराज महाकुंभ (Prayagraj Mahakumbh) में एक साथ 5 हजार नागा साधु (Naga Sadhu) बन रहे हैं. ये सभी जूना अखाड़े के हैं. शनिवार को संगम घाट पर अपना और अपनी सात पीढ़ियों का इन्होंने पिंडदान किया. इसी के साथ उनकी नागा साधु बनने से पहले दूसरी स्टेज अवधूत बनने की प्रक्रिया शुरू हो गई है. 29 जनवरी को मौनी अमावस्या को तड़के सभी को नागा साधु बनाया जाएगा. आपके मन में ये सवाल जरूर उठता होगा कि नागा साधु जब सब कुछ त्याग देते हैं तो वो अपना जीवन-यापन कैसे करते हैं. दरअसल, नागा साधु भिक्षा मांगकर अपना जीवन-यापन करते हैं.

माना जाता है कि कि नागा साधुओं को भिक्षा देना यानि भगवान शिव को खुश करने के बराबर होता है. जब भी आपके घर कोई नागा साधु आए तो उसे खाली हाथ न लौटाएं. अगर आप दो चीजों का दान करते हैं तो भगवान शिव की आप पर कृपा जरूर होगी. ये दो चीजें हैं- भस्म और रूद्राक्ष. इसके अलावा आप उन्हें खाने की सामग्री और कुछ भिक्षा दे सकते हैं. इसका उपयोग नागा साधु अपने जीवन यापन के लिए करते हैं.

नागा साधुओं की दुनिया बहुत ही रहस्यमयी होती है. उनके जीवन से लेकर मृत्यु तक हर एक चीज बहुत ही रहस्यमयी है. नागा साधु बनने के लिए घोर तपस्या की जाती है. नागा साधु जीवित रहते हुए ही अपना पिंडदान कर चुके होते हैं. हिंदू धर्म में जन्म से लेकर मृत्यु तक कई संस्कार बताए गए हैं. जिनका पालन किया जाता है. इन्हीं संस्कारों में से एक है अंतिम संस्कारय व्यक्ति के मरने के बाद उनका पिंडदान किया जाता है.

भू या जल समाधि

कहा जाता है कि नागा साधुओं का दाह संस्कार नहीं किया जाता है. बल्कि उनकी मृत्यु के बाद उनकी समाधि लगा दी जाती है. उनकी चिता को आग नहीं दी जाती है क्योंकि, ऐसा करने पर दोष लगता है. ऐसा इसलिए क्योंकि, नागा साधु पहले ही अपना जीवन समाप्त कर चुके होते हैं. अपना पिंडदान करने के बाद ही वह नागा साधु बनते हैं इसलिए उनके लिए पिंडदान और मुखाग्नि नहीं दी जाती है. उन्हें भू या जल समाधि दी जाती है.

5 लाख नागा साधु

हालांकि, उन्हें समाधि देने से पहले स्नान कराया जाता है और इसके बाद मंत्रोच्चारण कर उन्हें समाधि दे दी जाती है. जब नागा साधु की मृत्यु हो जाती है तो उनके शव पर भस्म लगाई जाती है और भगवा रंग का वस्त्र डाले जाते हैं. समाधि बनाने के बाद उस जगह पर सनातन निशान बना दिया जाता है ताकि लोग उस जगह को गंदा न कर पाए. उन्हें पूरे मान-सम्मान के साथ विदा किया जाता है. नागा साधु को धर्म का रक्षक भी कहा जाता है. नागा साधुओं के 13 अखाड़ों में सबसे बड़ा जूना अखाड़ा है, जिसके लगभग 5 लाख नागा साधु और महामंडलेश्वर संन्यासी हैं.

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