“विशेष आलेख” अपने ही घर की हवा नही समझ पाए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पटवारी,अब नेतृत्व पर उठ रहे सवाल

(मुजीब खान इंदौर) बमुश्किल चार महीने पहले प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनने वाले जीतू पटवारी अपना ही घर बचाने में विफल साबित हुए हैं। विपक्षी के बाद अब खुद कांग्रेसी भी पटवारी के नेतृत्व पर सवाल उठा रहे हैं। दरअसल पटवारी के कमान संभालने के बाद इंदौर में कांग्रेस के तमाम बड़े नेता संगठन को अलविदा कह चुके हैं।

महीनेभर पहले पूर्व विधायक संजय शुक्ला और विशाल पटेल ने भाजपा का दामन थाम लिया था। अब के अधिकृत प्रत्याशी के मैदान छोड़े के बाद इंदौर लोकसभा क्षेत्र से कांग्रेस ही विलुप्त हो गई है। आरोप जीतू पटवारी पर लग रहे हैं कि संकेत मिलने के बाद उन्होंने कदम नहीं उठाए। और तो और डमी उम्मीदवार भी ऐसे व्यक्ति को बनाया जिसे पहले ही पार्टी विरोधी गतिविधियों के लिए निष्कासित किया गया था।

चुनाव का दौर शुरू होने के पहले कांग्रेस के पास क्षेत्र से दावेदारी करने के लिए योग्य उम्मीदवार नहीं था। ऐसे में नए नवेले प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बने जीतू पटवारी को इंदौर से उम्मीदवार बनाने की मांग कार्यकर्ताओं ने उठाई थी। हालांकि पटवारी ने उम्मीदवार बनने के लिए हामी नहीं भरी।
इसके बाद अक्षय कांति बम के रूप में कांग्रेस की ओर से उम्मीदवार उतारा गया। बताया जा रहा है कि पहले पटवारी ने खुद उम्मीदवार बनने से इनकार कर दिया इसके बाद अक्षय कांति बम को इंदौर के लिए चुना। इतना ही नहीं डमी उम्मीदवार के रूप में भी ऐसे व्यक्ति का फार्म दाखिल करवाया जिसकी पार्टी के प्रति निष्ठा पहले से संशय में थी।
दरअसल विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने देपालपुर से तत्कालीन विधायक विशाल पटेल को उम्मीदवार बनाया था। आरोप लगे थे मोतीसिंह पटेल भीरतरघात कर रहे हैं। खुद विशाल पटेल ने इसकी शिकायत की थी। इसके बाद मोतीसिंह पटेल को कांग्रेस से निष्कासित कर दिया। हालांकि लोकसभा चुनाव से ठीक पहले 9 मार्च को मोतीसिंह पटेल का निष्कासन समाप्त कर दिया गया। संगठन प्रभारी राजीवसिंह ने पत्र निकाला कि प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी की अनुशंसा पर निष्कासन समाप्त हो रहा है। इसके बाद पटेल फिर से कांग्रेस में आ गए। इतना ही नहीं जब नामांकन दाखिल करने की बारी आई तो पटवारी ने पटेल का नामांकन डमी प्रत्याशी के रूप में दाखिल करवाया।

पहले ही भेजी थी गड़बड़ी की खबर-
सूत्रों के अनुसार जीतू पटवारी को कांग्रेस आलाकमान ने सप्ताह भर पहले ही इंदौर लोकसभा क्षेत्र में कुछ अप्रत्याशित होने की सूचना भेज दी थी। कांग्रेस के सूत्रों का कहना है कि पटवारी को सूचना दी गई थी कि खजुराहो या सूरत की तरह इंदौर में भाजपा की ओर से किसी तरह का घटनाक्रम हो सकता है। साथ ही मोती सिंह पटेल द्वारा जान बूझकर नामांकन फार्म में त्रुटि करने का संदेश भी ऊपर से जता दिया गया था। हैरानी की बात है कि इसके बाद भी ना तो कांग्रेस के जिम्मेदारों ने ना तो नामांकन फार्मों को अपने स्तर पर जांच करवाई और ना ही एक ओर
डमी उम्मीदवार मैदान में उतारने की जरूरत
समझी। कांग्रेसियों में गुस्सा-इंदौर के ताजा घटनाक्रम के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं में गुस्सा नजर आ रहा है। सोमवार को अक्षय बम के घर के बाहर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया। इस बीच कांग्रेस के चुनाव कार्यालय श्रम शिविर पर ताला लटका नजर आया। अक्षयकांति बम के दशहरा मैदान स्थित कार्यालय पर भी कुछ नाराज कार्यकर्ताओं की तोड़फोड़ की धमकी के बाद सुरक्षा लगा दी गई। चुनावी काम में लगे कांग्रेसी नेता वहां से एक-एक कर रवाना हो गए। शाम को वहां से कांग्रेस के पोस्टर भी हटना भी शुरू हो गए।

लेखक, “राष्ट्रीय हिंदी दैनिक बलवास टाइम्स के संपादक है”

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