के पास ऑडिय: सौ रुपए प्रति क्विंटल लूंगा, जितने मर्जी कटवा ले गेट पास

करनाल: मंडी में पड़े धान का दृश्य।हरियाणा के जिले करनाल की अनाज मंडी का एक ऑडियो सामने आया है। जिसमें गेट पर कार्यरत कर्मचारी प्रवीन नाम के कर्मचारी ने के सुत्र को फर्जी पर्चे काटने की एवज में 100 रुपए प्रति क्विंटल की डिमांड कर रहा है। कर्मचारी धमकी भरे लहजे में के सुत्र को यह भी चेतावनी देता है कि यदि पिछला गेट पासों का भुगतान नहीं किया तो वह पर्चे कैंसिल करा देगा। इस ऑडियो कर्मचारी दो सारकारी कर्मचारी सोमबीर और दीपक त्यागी के बारे में दावा कर रहा है कि यह दोनो 100 रुपए से कम में फर्जी पर्चे नहीं काटेंगे।ऑडियो भास्कर के पास है। वहीं दूसरी ओर जब इस ऑडियो की बाबत मंडी सचिव सुंदर कंबोज से उनका पक्ष जानने की कोशिश की तो वह करनाल कार्यालय में नहीं मिलें। हालांकि उन्होंने फोन पर दावा किया कि यह ऑडियो उनके कार्यकाल से पहले का है। इसलिए इससे उनका कोई वास्ता नहीं है।करनाल मंडी के गेट पर बैठे कर्मचारी।आठ मिनट की ऑडियों में छह बार पिछले पैसे मांगने की धमकी दीदो ऑडियो भास्कर को मिली है। एक आठ मिनट की दूसरी एक मिनट की। इसके साथ ही व्हाट्सटसएप चैट भी है। दोनो ऑडियो में फर्जी गेट पास के नाम पर रकम मांगने की बात हो रही है। रिश्वतखोर कितने बेखौफ है, इस बात का अंदाजा इस ऑडियो से आसानी से लग सकता है। बताया जा रहा है फर्जी गेट पास का काला कारोबार मंडी में धान आने के पहले दिन से शुरू हो गया था। यह कारोबारो बिना मंड़ी के सरकारी अधिकारी व कर्मचारी की शह के बिना नहीं हो सकता।खरीद प्रक्रिया में भ्रष्ट तंत्र की पोल खोल रहा ऑडियोयह पहला मौका नहीं है, जब करनाल मंडी में फर्जी गेट पास का काला धंधा हो रहा है। हर बार मंडी में इस तरह के आरोप लगते रहे हैं। यह पहला मौका है, जब के सुत्र ने यह ऑडियो हमें दिया है। ऑडियो देने वाले सूत्र ने बताया कि इस बार तो मंडी में भ्रष्टाचार की हद हो गई। जिस तरह से खरीद प्रक्रिया से जुड़े कुछ कर्मचारी अवैध उगाही कर रहे हैं, इससे हर कोई परेशान है। पर कोई उनके खिलाफ मुंह नहीं खोलता। अब मैने इस फर्जी वाड़े को उजागर किया है तो मेरे पास भी कई धमकी भरे फोन आ रहे है। लेकिन जिस तरह से सरकार के पैसें को ये अधिकारी व कर्मचारी मिलीभगत करके चूना लगा रहे है। यह सरासर प्रदेश सरकार के साथ खिलवाड़ करना है।मंडी में पड़े सरकारी धान का दृश्य।क्या है फर्जी गेट पास काटने का मामलाजब भी किसान मंडी में धान लेकर आता है तो इसका गेट पास कटता है। यह रिकॉर्ड होता है कि मंडी में कितना धान आया। यह काम मंडी कमेटी के कर्मचारी करते हैं। यह कर्मचारी मंडी के हर गेट पर तैनात है। अब होता यह है कि दलाल और मंडी कमेटी के कुछ भ्रष्ट कर्मचारी मंडी में धान आए बिना इसका गेट पास काट देते हैं।MSP की यूं होती है लूटअब गेट पास कटने के बाद इस सिस्टम से जुड़ा आढ़ती धान की फर्जी बिक्री दिखा देगा। सरकारी रिकार्ड में धान की खरीद दर्ज हो जाएगी। आढ़ती ने जो धान की बिक्री दिखाई, सरकार से इस धान का भुगतान हो जाएगा। इस तरह से MSP का जो लाभ किसान को मिलना चाहिए था, उसकी फर्जी बिक्री दिखा कर बंदरबांट हो जाती है।किसानों के खाते में लेते हैं भुगतान​​​​​​​क्योंकि इस बार सरकार ने फर्जी धान की खरीद पर रोक लगाने के लिए किसानों के खाते में सीधे भुगतान का सिस्टम शुरू किया है। इसलिए धान की फर्जी खरीद सरकारी रिकॉर्ड में दिखाने वाला आढ़ती भ्रष्ट मंडी कमेटी का अधिकारी और भ्रष्टाचार के इस खेल में शामिल खाद्य आपूर्ति विभाग का अधिकारी सब मिले हुए हैं, ऐसे किसानों के खाते में यह रकम सरकारी खजाने से डलवा लेते हैं,जिनके पास धान होता नहीं, लेकिन पोर्टल पर उन्होंने फर्जी तरीके से धान का रजिस्ट्रेशन करा रखा है।मंडी में लगी धान के ट्रैक्टर ट्रालियों का दृश्य।राइस मिलर्स का भी होता है हिस्सा तय​​​​​​​भ्रष्टाचार का यह खेल यहां खत्म नहीं होता। अब जो फर्जी धान खरीदा गया। यह धान इस भ्रष्टाचार में शामिल राइस मिल को अलॉट कर दिया जाता है। राइस मिलर्स को इससे डबल फायदा होता है। एक तो उसे उस धान की कुटाई का भुगतान मिल गया, जो उसने कूटा ही नहीं। दूसरा फर्जी खरीदे गए धान की एवज में जो पैसा आया,इसमें से बड़ा हिस्सा भी उसे मिल जाता है।फिर चावल आता कहां से हैं?इसके बाद फूड माफिया सक्रिय हो जाता है। यह माफिया, यूपी, राजस्थान, बिहार और दूसरे राज्यों से BPL की सरकारी स्कीम में उपलब्ध कराए जाने वाले चावल को रास्ते में खरीद कर वापस राइस मिल में ले आता है। अब राइस मिलर्स इस चावल को साफ करने वाली मशीन में डाल कर अच्छे से साफ कर दोबार FCI के गोदामों में भेज देता है।देश, समाज, गरीब और सरकार के साथ गद्दारी कर रहा है यह सिस्टम​​​​​​​फर्जी गेट पास काटने वाले से लेकर चावल उपलब्ध कराने वाले क्रप्ट राइस मिलर्स देश, समाज, गरीब और सरकार के साथ गद्दारी कर रहे हैं। क्योंकि MSP सरकार इसलिए देती है, ताकि किसानों को सामाजिक सुरक्षा मिले। लेकिन सरकार की किसानों के लिए चलाई जा रही इस कल्याणकारी योजना में छेद कर फर्जी गेट पास कट कर मोटी उगाही करते हैं। किसान के खेत में इतना धान होता नहीं, जितना फर्जी तरीके से खरीद कर दिखा दिया जाता है,इस तरह से सरकार को यह पता ही नहीं चल पाता कि देश में चावल का कितना उत्पादन हुआ। इस तरह का भ्रष्टाचार ईमानदारी से काम करने वाले लोगों क लिए भी परेशानी पैदा करता है। सबसे बड़ी बात तो यह है कि गरीबों के निवाले पर सीधा डाका है। इसके बाद भी करनाल की अनाज मंडी में यह भ्रष्टाचार लंबे समय से चल रहा है।

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