फेस्टिव सीजन के बीच डिजिटल पेमेंट करने वाले करोड़ों देशवासियों और छोटे-बड़े व्यापारियों के लिए एक बहुत बड़ी राहत की खबर सामने आई है। यूपीआई (UPI) और सर्विसेज स्टीयरिंग कमेटी ने सर्वसम्मति से यह अहम फैसला लिया है कि चुनिंदा पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) यूपीआई ट्रांजेक्शन पर लागू होने वाले मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को फिलहाल के लिए टाल दिया गया है। कमेटी के मुताबिक, आगामी त्योहारों और बाजारों में खरीदारी के भारी दबाव को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया है। अब नया एमडीआर फ्रेमवर्क दिवाली के तुरंत बाद लागू किया जाएगा, जिसकी नई तारीख का ऐलान अलग से किया जाएगा।
🛍️ क्यों टला फैसला? धनतेरस और दिवाली की खरीदारी को प्राथमिकता
हाल ही में पेमेंट रेगुलेटरी फ्रेमवर्क के तहत 15 अक्टूबर 2026 से ₹2,000 से अधिक मूल्य वाले चुनिंदा मर्चेंट यूपीआई ट्रांजेक्शन पर 0.4% का मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाने की योजना बनाई गई थी। हालांकि, धनतेरस और दिवाली के दौरान बाजारों में होने वाली रिकॉर्ड डिजिटल खरीदारी को देखते हुए यह आशंका जताई जा रही थी कि ऐन वक्त पर मर्चेंट चार्जेस लागू करने से व्यापारियों और ग्राहकों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है। इसी वजह से स्टीयरिंग कमेटी ने त्योहारों के सुगम संचालन को प्राथमिकता देते हुए इसे टालने का बुद्धिमत्तापूर्ण निर्णय लिया है।
📱 आम यूजर्स और दुकानदारों पर क्या होगा असर?
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और एनपीसीआई (NPCI) पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि आम यूजर्स के लिए यूपीआई सेवा पूरी तरह से मुफ्त रहेगी। पर्सन-टू-पर्सन (P2P) पैसे ट्रांसफर करना या दुकानों पर ₹2,000 तक की खरीदारी पर पहले की तरह ही शून्य शुल्क रहेगा। वहीं, दिवाली सेल्स के दौरान बड़े और मध्यम श्रेणी के व्यापारियों को अब बिना किसी अतिरिक्त मर्चेंट शुल्क की चिंता किए यूपीआई से पेमेंट्स स्वीकार करने की सहूलियत मिलती रहेगी। छोटे दुकानदारों (P2PM) को पहले से ही इस तरह के शुल्कों से पूर्ण छूट दी गई है।