Chambal River Wildlife: मुरैना में विलुप्तप्राय रिवर डॉल्फिन पर विशेष नजर, तीन राज्यों की टीमें कर रही हैं संयुक्त गणना
मध्य प्रदेश की चंबल नदी में जलीय जीव प्रेमियों के लिए एक बेहद रोमांचक और उम्मीद जगाने वाली शुरुआत हुई है। विलुप्तप्राय गांगेय रिवर डॉल्फिन की वास्तविक आबादी और उनकी मौजूदा स्थिति का सटीक पता लगाने के लिए राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभयारण्य में आधुनिक तकनीक के माध्यम से वैज्ञानिक सर्वेक्षण शुरू कर दिया गया है। बिना तेज दृष्टि के चंबल की लहरों में अठखेलियां करने वाली इन दुर्लभ डॉल्फिन की मौजूदगी और संख्या को वैज्ञानिक तरीकों से दर्ज किया जा रहा है। मुरैना के राजघाट से शुरू हुआ यह महत्वपूर्ण सर्वे आगामी 15 अक्टूबर तक जारी रहेगा।
👥 तीन राज्यों के वन विभाग और देहरादून की विशेषज्ञ टीम मिलकर कर रही है सर्वे
इस विशेष अभियान में मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान—तीनों राज्यों के वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी पूरी मुस्तैदी से जुटे हैं। इसके साथ ही, भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) देहरादून की 15 सदस्यीय विशेषज्ञ टीम भी इस वैज्ञानिक अध्ययन का हिस्सा है। आधुनिक पद्धतियों के जरिए नदी के विभिन्न हिस्सों में डॉल्फिन के प्राकृतिक आवास, गतिविधियों और उनकी संख्या का बारीकी से आकलन किया जा रहा है। घड़ियाल केंद्र के अधीक्षक श्याम सिंह चौहान ने बताया कि इस सर्वे के पूरा होने के बाद चंबल में डॉल्फिन की वास्तविक संख्या के पुख्ता आंकड़े सामने आ सकेंगे।
📈 5 साल बाद हो रहा है विस्तृत आकलन, संरक्षण की बनेगी नई रणनीति
मुरैना वन विभाग के पिछले आकलनों के मुताबिक चंबल नदी में रिवर डॉल्फिन की संख्या लगभग 155 आंकी गई थी। अब इस नए और व्यापक सर्वेक्षण से यह स्पष्ट हो सकेगा कि इन जलीय जीवों की वर्तमान स्थिति कैसी है। चूंकि चंबल नदी तीन राज्यों की सीमा से गुजरती है और कई दुर्लभ जलीय जीवों का मुख्य प्राकृतिक आवास है, इसलिए यह सर्वे इस नदी की जैव विविधता को बचाने के लिए भविष्य की नई और प्रभावी संरक्षण रणनीतियां तैयार करने में बेहद मददगार साबित होगा।