Ujjain News: खड़े हनुमान मंदिर विवाद में BJP की एंट्री, आलोट विधायक चिंतामणि मालवीय बोले- ‘बाबा को नहीं हटाया जाएगा’

उज्जैन। सिंहस्थ 2028 की व्यापक तैयारियों के बीच सड़क चौड़ीकरण की जद में आ रहे बड़ा सराफा क्षेत्र स्थित ऐतिहासिक ‘खड़े हनुमान’ मंदिर को लेकर अब सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है। लगभग सप्ताह भर पहले कांग्रेस विधायक महेश परमार और अन्य कांग्रेस नेता भगवा ध्वज लेकर मंदिर पहुंचे थे और प्रतिमा को किसी भी सूरत में न हटाने की मांग उठाई थी।

अब इस संवेदनशील धार्मिक मुद्दे में भारतीय जनता पार्टी की भी सीधी एंट्री हो गई है। शुक्रवार को आलोट से भाजपा विधायक चिंतामणि मालवीय खड़े हनुमान मंदिर पहुंचे और बाबा के दर्शन किए। इसके बाद उन्होंने मंदिर के पास स्थित शाही मस्जिद को लेकर हाईकोर्ट के आए निर्णय पर भी बड़ा बयान दिया।

🏛️ ‘बाबा खड़े हनुमान आस्था का केंद्र, चौड़ीकरण के बाद भी सवारी में नहीं आई रुकावट’: चिंतामणि मालवीय

खड़े हनुमान मंदिर में दर्शन के उपरांत भाजपा विधायक चिंतामणि मालवीय ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा, “मैं खड़े हनुमान जी का नियमित दर्शनार्थी हूं। मैंने बाबा से उज्जैन और पूरे मध्य प्रदेश की समृद्धि व विकास की प्रार्थना की। खड़े हनुमान वर्षों से जन-जन की आस्था का केंद्र हैं और जनभावना यही है कि बाबा को उनके मूल स्थान से बिल्कुल भी न हटाया जाए।”

सड़क चौड़ीकरण का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि मार्ग अब पहले की तुलना में काफी चौड़ा हो चुका है। हाल ही में भगवान महाकाल की राजसी सवारी इसी मार्ग से निकाली गई थी, जिसमें लाखों की संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए थे। इसके बावजूद व्यवस्था में कोई रुकावट नहीं आई, ऐसे में अब मंदिर से प्रतिमा को हटाने का कोई औचित्य ही नहीं बनता।

⚖️ ‘मंदिर-मस्जिद की तुलना करना अनुचित, मुस्लिम समाज HC के फैसले का सम्मान करे’

मंदिर से महज 300 मीटर की दूरी पर छत्री चौक के पास स्थित शाही मस्जिद को लेकर हाल ही में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने मस्जिद पक्ष की दो याचिकाओं को खारिज कर दिया था, जिससे मस्जिद के लगभग 15×15 वर्ग फीट के अतिक्रमण को हटाकर सड़क चौड़ीकरण का रास्ता साफ हो गया था।

इस पर प्रतिक्रिया देते हुए विधायक चिंतामणि मालवीय ने कहा, “हाईकोर्ट का निर्णय आ चुका है और सभी को न्यायपालिका के आदेश का सम्मान करना चाहिए। मंदिर और मस्जिद के विषय की एक साथ तुलना करना बिल्कुल अनुचित है। भारत धार्मिक सहिष्णुता वाला देश है। यदि अदालत का स्पष्ट निर्णय है, तो मुस्लिम पक्ष को सहर्ष उसका पालन करना चाहिए। हम पहले ही देश का बड़ा हिस्सा पाकिस्तान के रूप में खो चुके हैं, जहां कई मंदिरों को तोड़ दिया गया।”

📜 कांग्रेस पहले ही कर चुकी है विरोध प्रदर्शन, प्रशासन ने दिया सहमति का आश्वासन

उल्लेखनीय है कि सप्ताह भर पहले बुधवार को भगवा ध्वज लेकर मंदिर पहुंचे कांग्रेस विधायक महेश परमार ने अपने सैकड़ों समर्थकों के साथ जय श्री राम के जयकारे लगाते हुए हनुमान चालीसा का पाठ किया था। उन्होंने मांग की थी कि जनता की धार्मिक भावनाओं का सम्मान करते हुए प्रतिमा को यथावत रखा जाए।

वहीं, दूसरी ओर एसडीएम एल.एन. गर्ग ने जिला प्रशासन का पक्ष स्पष्ट करते हुए कहा है कि संबंधित पक्षों की आपसी सहमति और तकनीकी विशेषज्ञों की जांच के बिना प्रतिमा को कतई स्थानांतरित नहीं किया जाएगा। श्रद्धालुओं की अटूट आस्था, प्रतिमा की सुरक्षा और उज्जैन की धार्मिक-सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण करना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

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