Silver Price : सोने-चांदी में गिरावट के बाद भी क्यों मजबूत है सिल्वर का भविष्य? जानिए Monarch PMS की रिपोर्ट
वैश्विक बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में आई कमजोरी के बाद वैल्यूएशन और पोजीशनिंग नए सिरे से तय हुई है. बुधवार को शुरुआती कारोबार में भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और अमेरिकी ब्याज दरों के चलते कॉमैक्स (COMEX) पर सोना 0.41% गिरकर 4,420.80 डॉलर और चांदी 0.21% गिरकर 66.86 डॉलर प्रति औंस पर आ गई. इसके बावजूद विशेषज्ञों का मानना है कि चांदी में मॉनेटरी डिमांड और फिजिकल कमी के चलते सेंटीमेंट बदलते ही और तेजी आ सकती है.
⛏️ 2. लगातार छठे साल फिजिकल डेफिसिट में है चांदी, माइन प्रोडक्शन सुस्त होने से सप्लाई साइड से बनी हुई है बड़ी रुकावट
चांदी लगातार छठे साल भौतिक कमी (फिजिकल डेफिसिट) की स्थिति से गुजर रही है. साल 2026 में 46.3 मिलियन औंस की कमी का अनुमान है. साल 2015 से ग्लोबल माइन प्रोडक्शन सालाना 830-850 मिलियन औंस के आसपास स्थिर है, क्योंकि अधिकांश चांदी तांबे, सीसा और जस्ते के बाय-प्रोडक्ट के रूप में निकलती है. नई खदानों से उत्पादन शुरू होने में एक दशक तक का समय लग सकता है, जिससे कीमतें बढ़ने पर भी तुरंत अतिरिक्त सप्लाई बाजार में नहीं आ पाती है.
☀️ 3. सोलर पैनल की मांग घटने के बावजूद बनी हुई है चांदी की कमी, पेपर लेवरेज और फिजिकल निवेश दे सकते हैं रफ्तार
साल 2026 में फोटोवोल्टिक (सोलर) चांदी की खपत घटकर 151 मिलियन औंस रहने का अनुमान है, जो थ्रिफ्टिंग के कारण है. हालांकि इसके बावजूद सप्लाई की रुकावटें बरकरार हैं. कॉमैक्स में रजिस्टर्ड इन्वेंट्री और कम कवरेज रेश्यो के कारण पेपर लेवरेज का असर भी कीमतों पर दिखता है. करेक्शन और लेवरेज खत्म होने के बाद, 2026 में फिजिकल निवेश की मांग में 20% तक की बढ़ोतरी की उम्मीद है, जिससे सोने के मुकाबले चांदी का रिस्क-रिवॉर्ड प्रोफाइल अधिक आकर्षक नजर आ रहा है.