बापटला बीच पर मिला शिवलिंग पीठम और मूर्तियां; लहरों के साथ बहीं या जमीन से निकलीं? जांच में जुटा प्रशासन

बापटला (आंध्र प्रदेश): जिले के वेटापलेम मंडल अंतर्गत पोट्टीसुब्बय्यापलेम समुद्र तट पर एक अत्यंत कौतूहल और रहस्य पैदा करने वाली घटना सामने आई है। समुद्र किनारे अचानक अज्ञात देवी-देवताओं की प्राचीन प्रतिमाएं और एक पवित्र शिवलिंग का आसन (पीठम) मिलने से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। स्थानीय मछुआरों ने सबसे पहले इन प्रतिमाओं को किनारे पर देखा, जिसके बाद तत्परता दिखाते हुए पुलिस और राजस्व विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को सूचित किया गया।

🌪️ तेज ज्वार-भाटे से समुद्र तट पर भारी कटाव, बने 10 फीट गहरे गड्ढे

प्राकृतिक प्रभाव और तटीय स्थिति:

  • तेज ज्वार का असर: अधिकारियों के अनुसार, पोट्टीसुब्बय्यापलेम तटीय क्षेत्र में बीते दो दिनों में आए तीव्र ज्वार-भाटे के कारण समुद्र तट पर भारी भू-कटाव (Coastal Erosion) हुआ है।

  • 2 किलोमीटर क्षेत्र प्रभावित: जलवायु और मौसमी बदलाव के चलते लगभग 2 किलोमीटर लंबा तटीय इलाका प्रभावित हुआ है और समुद्री पानी किनारे से 20 मीटर भीतर तक प्रवेश कर गया है।

  • गहरे गड्ढे: तेज लहरों और कटाव की वजह से तट के पास 10 फुट तक चौड़े और खतरनाक रूप से गहरे गड्ढे बन गए हैं।

⛔ प्रशासन ने मूर्तियों को लिया कब्जे में, 2 KM क्षेत्र में पर्यटकों के जाने पर पाबंदी

प्रशासनिक कार्रवाई और सुरक्षा उपाय:

  • अधिकारियों का दौरा: सूचना मिलते ही कोथापटनम समुद्री पुलिस प्रमुख रमेश बाबू, वेटापलेम तहसीलदार गीता रानी तथा सिविल पुलिस बल ने तुरंत तटीय इलाके का विस्तृत निरीक्षण किया।

  • सुरक्षात्मक पाबंदी: सप्ताहांत और छुट्टियों में पर्यटकों की उमड़ने वाली भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने 2 किलोमीटर लंबे हिस्से में समुद्र में नहाने और पानी के करीब जाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है।

  • प्रतिमाएं सुरक्षित: पुलिस और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम ने बरामद सभी देव-प्रतिमाओं और शिवलिंग पीठम को सुरक्षित अपने संरक्षण में ले लिया है।

🔍 लहरों संग बहकर आईं या जमीन से निकलीं? वैज्ञानिक और ऐतिहासिक जांच जारी

प्राचीन धरोहरों को लेकर बना रहस्य:

  • स्थानीय संशय: पोट्टीसुब्बय्यापलेम बीच पर मिली इन प्राचीन धरोहरों को लेकर ग्रामीणों और मछुआरों के बीच गहन चर्चा है।

  • दो मुख्य संभावनाएं: यह रहस्य बना हुआ है कि क्या ये मूर्तियां समुद्र की तेज लहरों के साथ बहकर किनारे पहुंची हैं, या फिर तट पर हुए भीषण कटाव के कारण जमीन के नीचे दबा सदियों पुराना इतिहास सतह पर आ गया है।

  • विशेषज्ञ जांच: पुरातत्व और संबंधित प्रशासनिक विभाग इन मूर्तियों के स्रोत, निर्माण काल, ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और इनके यहां पहुंचने के वास्तविक कारणों की वैज्ञानिक जांच में जुट गए हैं।

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