अशोकधाम मंदिर हादसा: पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दम घुटने से मौत की पुष्टि, प्रशासनिक विफलता व जांच पर गहराया विवाद

लखीसराय (बिहार): लखीसराय के प्रसिद्ध अशोकधाम मंदिर में सावन की तीसरी सोमवारी को दर्शन मार्ग पर मची भीषण भगदड़ में सात महिला श्रद्धालुओं की दर्दनाक मौत हो गई।

इस हृदयविदारक हादसे के बाद जिला प्रशासन द्वारा गठित जांच प्रक्रिया स्वयं भारी विवादों और संदेह के घेरे में आ गई है। हादसे का सबसे बड़ा विरोधाभास यह है कि प्रशासन ने जांच की कमान उन्हीं अधिकारियों को सौंप दी है, जो घटना के वक्त मंदिर परिसर में भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा प्रबंध की देखरेख कर रहे थे।

⚖️ ऑन-ड्यूटी तैनात अधिकारियों को ही सौंपी गई जांच, ‘हितों के टकराव’ का आरोप

जांच टीम के गठन को लेकर स्थानीय लोगों और जानकारों ने गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई हैं:

  • जांच दल का स्वरूप: डीएम शैलेंद्र कुमार द्वारा गठित जांच कमेटी की अध्यक्षता एडीएम नीरज कुमार कर रहे हैं, जिसमें एसडीएम प्रभाकर कुमार और एसडीपीओ शिवम कुमार को शामिल किया गया है।

  • सीधा टकराव: हादसे के समय एसडीएम और एसडीपीओ स्वयं अशोकधाम मंदिर में ड्यूटी पर तैनात थे। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जो अधिकारी भीड़ प्रबंधन में विफल रहे, वे अपनी ही कमियों की निष्पक्ष जांच कैसे कर सकते हैं।

  • समय-सीमा समाप्त: डीएम द्वारा तय की गई 24 घंटे की समय-सीमा समाप्त होने के बाद भी जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है, जिससे रिपोर्ट में लीपापोती की आशंकाएं जताई जा रही हैं।

🫁 पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बड़ा खुलासा: अत्यधिक दबाव और दम घुटने से गईं जानें

मृतक महिला श्रद्धालुओं की पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने प्रशासनिक दावों की पोल खोल दी है:

  • मौत का कारण: मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार, सभी सात महिलाओं की मौत अत्यधिक भीड़ के दबाव और दम घुटने (Asphyxia) के कारण हुई।

  • गंभीर चोटें: भारी भीड़ के अनियंत्रित दबाव से मृतकों की गर्दन और छाती पर गहरी आंतरिक चोटें आईं, जिससे शरीर के महत्वपूर्ण अंगों ने काम करना बंद कर दिया।

  • भीड़ नियंत्रण फेल: रिपोर्ट से स्पष्ट है कि यह कोई सामान्य अनहोनी नहीं बल्कि क्राउड मैनेजमेंट की पूरी तरह नाकामी थी, जहां श्रद्धालुओं को सांस लेने तक की जगह नहीं मिल सकी।

🏛️ मंदिर ट्रस्ट और डीएम की भूमिका पर सवाल, क्या होगी निष्पक्ष कार्रवाई?

घटना के बाद मंदिर ट्रस्ट के प्रबंधन और जवाबदेही को लेकर भी तीखी बहस छिड़ गई है:

  • ट्रस्ट प्रबंधन में चूक: डीएम शैलेंद्र कुमार स्वयं अशोकधाम मंदिर ट्रस्ट के पदेन अध्यक्ष हैं। ऐसे में बैरिकेडिंग, सिंगल-वे एग्जिट और सुरक्षा में हुई चूक की सीधी जिम्मेदारी तय करना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती है।

  • सरकारी आश्वासन: बिहार सरकार के मंत्री श्रवण कुमार ने दोषियों पर सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है, लेकिन जनता के बीच यह संशय बरकरार है कि क्या संबंधित जांच दल अपने ही प्रशासनिक महकमे की विफलताओं को रिपोर्ट में उजागर करेगा।

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