आंध्र प्रदेश: आरोग्यश्री योजना से ऑपरेशन कराने पहुंचे मरीज को बताया ‘मृत’, विजयवाड़ा नगर निगम पर फर्जी डेथ सर्टिफिकेट का आरोप

एलुरु (आंध्र प्रदेश): आंध्र प्रदेश के एलुरु जिले से एक अत्यंत हैरान और स्तब्ध कर देने वाला प्रशासनिक मामला प्रकाश में आया है। यहाँ एक जीवित व्यक्ति को सरकारी दस्तावेजों व पोर्टल में मृत घोषित कर दिया गया है। पीड़ित नागरिक का नाम येर्रामसेट्टी मुरलीकृष्ण है, जो एलुरु जिले के कालिदिंडी मंडल अंतर्गत स्थित कोरुकोल्लू गांव के स्थायी निवासी हैं। मुरलीकृष्ण ने अपनी गंभीर बीमारी के इलाज हेतु सरकारी ‘आरोग्यश्री योजना’ के अंतर्गत शल्य चिकित्सा (ऑपरेशन) कराने का निर्णय लिया था, किंतु जब वे अस्पताल पहुँचे तो उन्हें ज्ञात हुआ कि सरकारी फाइलों में उनकी जीवन लीला काफी पहले समाप्त दिखाई जा चुकी है।

🏥 गंभीर बीमारी में ऑपरेशन कराने पहुंचे अस्पताल, आरोग्यश्री पोर्टल से खुला फर्जीवाड़े का राज

प्राप्त जानकारी के अनुसार, येर्रामसेट्टी मुरलीकृष्ण पारिवारिक कारणों व विवादों के चलते विगत कुछ समय से अपनी धर्मपत्नी रमादेवी से अलग रह रहे हैं।

हाल ही में मुरलीकृष्ण गंभीर रूप से अस्वस्थ हो गए थे। जब वे चिकित्सकीय जांच हेतु अस्पताल पहुँचे, तो डॉक्टरों ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए उन्हें तत्काल ऑपरेशन कराने का परामर्श दिया। वित्तीय तंगी से जूझ रहे मुरलीकृष्ण ने राज्य सरकार की कल्याणकारी ‘आरोग्यश्री योजना’ का लाभ उठाने का फैसला किया और एक सूचीबद्ध निजी अस्पताल से संपर्क साधा।

💳 पहचान पत्र से जांच में हुआ चौंकाने वाला खुलासा, अस्पताल प्रबंधन ने इलाज करने से किया इनकार

अस्पताल के प्रशासनिक कर्मियों ने जब आरोग्यश्री डिजिटल पोर्टल पर मुरलीकृष्ण के पहचान पत्र की प्रविष्टियों की जांच की, तो वहां दर्ज आंकड़ों को देखकर सभी दंग रह गए।

सरकारी पोर्टल में उन्हें आधिकारिक रूप से ‘मृत’ दिखाया गया था। इसके कारण प्रणाली ने उन्हें आरोग्यश्री योजना के लाभ हेतु अयोग्य (Ineligible) घोषित कर दिया। लाचार एवं अवाक मुरलीकृष्ण को बिना इलाज कराए ही अस्पताल से निराश होकर लौटना पड़ा।

📜 विजयवाड़ा नगर निगम से फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने का आरोप, दोषियों पर कार्रवाई की मांग

जीवित रहते हुए भी सरकारी अभिलेखों में खुद को मृत पाए जाने पर पीड़ित मुरलीकृष्ण ने गहरा क्षोभ व दुख व्यक्त किया है।

मुरलीकृष्ण ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि विजयवाड़ा नगर निगम (VMC) कार्यालय से उनके नाम का कूटरचित (फर्जी) मृत्यु प्रमाण पत्र षड्यंत्रपूर्वक जारी किया गया है। उन्होंने मांग की है कि इस बड़े षड्यंत्र में लिप्त असामाजिक तत्वों व गैर-जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान कर उनके विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाए।

❓ प्रशासनिक तंत्र पर उठे गंभीर सवाल, अधिकारियों से नाम बहाल कर तत्काल इलाज की गुहार

पीड़ित मुरलीकृष्ण एवं उनके छोटे भाई श्रीनिवास ने उच्च अधिकारियों से न्याय की गुहार लगाते हुए अनुरोध किया है कि सरकारी रिकॉर्ड में उनका नाम तत्काल ‘जीवित’ के रूप में बहाल किया जाए, ताकि उन्हें आरोग्यश्री योजना का लाभ मिल सके और उनका लंबित ऑपरेशन शीघ्र संपन्न हो सके।

इस घटना ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर कई यक्ष प्रश्न खड़े कर दिए हैं—आखिर सरकारी रिकॉर्ड में एक जीवित व्यक्ति को मृत कैसे दर्ज कर दिया गया? इस फर्जीवाड़े के पीछे किसका हित छिपा था? अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस प्रकरण पर क्या संज्ञान लेता है।

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