बिहार में अनोखी शवयात्रा: ढोल-नगाड़ों और आर्केस्ट्रा डांस के साथ निकली बुजुर्ग की अंतिम यात्रा, बेटे बोले— ‘पिता की अंतिम इच्छा पूरी की’

पश्चिम चंपारण (बिहार): आमतौर पर किसी भी व्यक्ति की अंतिम यात्रा के समय गंतव्य मार्ग पर केवल मातमी सन्नाटा और परिजनों का करुण रोदन ही देखने को मिलता है। किंतु बिहार के पश्चिम चंपारण जिले से एक अत्यंत अनूठी और चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है।

जिले के नौतन प्रखंड अंतर्गत डबरिया मकरीटोला गांव में एक बुजुर्ग की अंत्येष्टि यात्रा को ढोल-नगाड़ों, गाजे-बाजे और आर्केस्ट्रा नर्तकियों के नृत्य प्रस्तुति के साथ निकाला गया।

📹 सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ शवयात्रा का वीडियो, कौतूहल का बना विषय

इस अनूठी और अभूतपूर्व शवयात्रा का वीडियो अब विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से वायरल हो रहा है तथा संपूर्ण क्षेत्र में भारी कौतूहल और चर्चा का केंद्र बना हुआ है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, डबरिया मकरीटोला निवासी वयोवृद्ध छठु पटेल का रविवार को निधन हो गया था। रविवार को जब उनकी अंतिम संस्कार यात्रा प्रारंभ हुई, तो नजारा आम शवयात्राओं से सर्वथा भिन्न था।

🥁 आगे-आगे गाजे-बाजे और पीछे आर्केस्ट्रा डांसर, देखने उमड़ी ग्रामीणों की भीड़

शवयात्रा के जुलूस में सबसे आगे ढोल-नगाड़े और बैंड-बाजे बज रहे थे, जबकि शव वाहन के पीछे-पीछे आर्केस्ट्रा डांसर अपनी प्रस्तुतियां दे रहे थे।

इस अभूतपूर्व दृश्य को देखने के लिए सड़क के दोनों ओर राहगीरों और ग्रामीणों की भारी भीड़ जमा हो गई। उपस्थित कई लोगों ने इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया, जो अब व्यापक रूप से प्रसारित हो रहा है।

💬 बेटे ने बयां की वजह: “पिताजी की आखिरी इच्छा थी कि रोने-धोने के बजाय खुशी-खुशी दी जाए विदाई”

मृतक छठु पटेल के पुत्र मुकेश पटेल ने इस संदर्भ में स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि उनके पिता अपने जीवनकाल में अक्सर परिवार के सदस्यों से कहा करते थे कि उनकी मृत्यु के उपरांत घर-परिवार में कोई रोने-धोने का माहौल न बनाए, बल्कि उनकी अंतिम विदाई को एक उत्सव की भांति आयोजित किया जाए।

मुकेश पटेल ने कहा, “हमारे पूज्य पिता जी की यह अंतिम प्रबल इच्छा थी कि उनकी विदाई का क्षण गमगीन न हो। हमने केवल उनकी भावना और इच्छा का आदर किया तथा उन्हें प्रसन्नतापूर्वक ढोल-नगाड़ों एवं आर्केस्ट्रा के साथ अंतिम विदाई दी।”

🗣️ समाज में मिली-जुली प्रतिक्रिया: कोई बता रहा परंपरा के विपरीत, तो कोई मान रहा पित्र-भक्ति

अंतिम संस्कार के अवसर पर इस प्रकार से आर्केस्ट्रा और गाजे-बाजे के साथ विदाई दिए जाने को लेकर स्थानीय समाज और प्रबुद्ध जनों के बीच विविध प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।

जहां एक ओर कुछ लोग इसे पारंपरिक मान्यताओं व सामाजिक मर्यादाओं के विपरीत मानकर प्रश्न खड़े कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कई नागरिक इसे पिता की अंतिम इच्छा के प्रति समर्पित बेटों का अनूठा और निष्ठावान सम्मान करार दे रहे हैं।

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