कर्नाटक के कलबुर्गी में बाढ़ से बिगड़े हालात, उफनती कमलावती नदी में ट्रैक्टर पर शव ले जाकर हुआ अंतिम संस्कार

कलबुर्गी (कर्नाटक): दक्षिण भारत के राज्य कर्नाटक में मॉनसून की मूसलाधार बारिश के चलते जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है और नागरिक बाढ़ की भयावह समस्या से जूझ रहे हैं।

राज्य के कलबुर्गी जिले में स्थितियां अत्यंत चिंताजनक बनी हुई हैं। जिले के सेडम तालुक में बुनियादी सुविधाओं के अभाव के कारण विकट परिस्थितियां उत्पन्न हो गई हैं, जहाँ नागरिकों को अंतिम संस्कार जैसे धार्मिक व मानवीय कार्यों के संपादन में भी भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। सेडम तालुक से एक हृदयविदारक घटना सामने आई है, जहाँ खतरे के निशान से ऊपर बह रही कमलावती नदी में जान जोखिम में डालकर ट्रैक्टर के माध्यम से एक पार्थिव शरीर को पार कराकर अंतिम संस्कार संपन्न कराया गया।

🌊 मंत्री डॉ. शरण प्रकाश पाटिल के गृह क्षेत्र से सामने आई प्रशासनिक लाचारी की तस्वीर

उल्लेखनीय है कि सेडम तालुक कर्नाटक सरकार में चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ. शरण प्रकाश पाटिल का गृह क्षेत्र है।

सेडम कस्बे के पूर्व नगर निगम सदस्य एवं मडिगा समाज के प्रबुद्ध नागरिक राजू कलागीकर का असामयिक निधन हो गया था। परिजनों एवं शुभचिंतकों ने कमलावती नदी के पार स्थित मडिगा समाज के श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार करने का निर्णय लिया, परंतु कस्बे के बाहरी छोर पर बह रही उफान मारती कमलावती नदी पार्थिव शरीर को ले जाने में मुख्य बाधा बन गई।

🚜 ट्रैक्टर पर रखा गया शव, उफनती नदी में हाथ पकड़कर उतरे लोग

नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने से स्थिति अत्यंत चुनौतीपूर्ण बनी हुई थी। अंततः ग्रामीणों ने साहस दिखाते हुए शव को एक ट्रैक्टर में रखा और वाहन को नदी की तेज धारा में उतार दिया।

अंतिम संस्कार यात्रा में सम्मिलित नागरिकों ने भी एक-दूसरे का हाथ मजबूती से थामकर उफनती नदी को पैदल पार किया। तत्पश्चात मृतक का अंतिम संस्कार संपन्न कराया जा सका। वस्तुतः सेडम शहर के बाहरी क्षेत्र में कमलावती नदी पर एक पक्के पुल का निर्माण होना प्रस्तावित है, जिसके लिए स्थानीय निवासियों द्वारा लंबे समय से अनवरत विरोध प्रदर्शन और मांगें की जाती रही हैं।

🏗️ 85 लाख रुपये का बजट और निविदा स्वीकृत, फिर भी निर्माण में देरी से लोगों में भारी आक्रोश

नागरिकों के व्यापक विरोध प्रदर्शनों के उपरांत कल्याणा कर्नाटक क्षेत्रीय विकास बोर्ड द्वारा 85 लाख रुपये की लागत से पुल के निर्माण को प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है।

इसके साथ ही पुल निर्माण हेतु आवश्यक निविदा (Tender) प्रक्रिया भी पूर्ण की जा चुकी है। किंतु सेडम के स्थानीय निवासियों ने इस बात पर गहरा असंतोष व्यक्त किया है कि संबंधित अधिकारी नदी में अत्यधिक पानी का बहाना बनाकर पुल के निर्माण कार्य को अकारण टाल रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि वर्षा ऋतु के अतिरिक्त शीत एवं ग्रीष्म ऋतु में भी अधिकारी निर्माण में लापरवाही बरतते हैं, जिसके दुष्परिणामस्वरूप प्रतिवर्ष नागरिकों को ऐसी जानलेवा परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है।

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