JPSC परीक्षा धांधली मामले में CID का बड़ा एक्शन: रांची, बोकारो, पलामू और हजारीबाग समेत 20 ठिकानों पर छापेमारी

रांची (झारखंड): झारखंड पब्लिक सर्विस कमीशन (JPSC) सिविल सेवा परीक्षा में कथित अनियमितता और धांधली के मामले में सीआईडी (CID) की टीम ने व्यापक कार्रवाई शुरू कर दी है।

सीआईडी द्वारा राज्य की राजधानी रांची, बोकारो, पलामू और हजारीबाग सहित लगभग 15 से 20 संवेदनशील ठिकानों पर एक साथ ताबड़तोड़ छापेमारी की जा रही है। जांच टीम परीक्षा प्रक्रिया में हुई गड़बड़ियों में संलिप्त संदिग्धों के ठिकानों को खंगाल रही है। सीआईडी अधिकारियों का कहना है कि अब तक प्राप्त साक्ष्यों, बयानों और प्राथमिक जांच के आधार पर यह कार्रवाई की जा रही है।

🔥 JPSC पीटी रिजल्ट को लेकर अभ्यर्थियों में भारी आक्रोश, परीक्षा रद्द करने और सुधार की मांग

उल्लेखनीय है कि 14वीं झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा (PT) के परिणाम घोषित होने के बाद से ही प्रतियोगी छात्र-छात्राओं में भारी आक्रोश व्याप्त है।

नाराज छात्र राज्य के विभिन्न हिस्सों में लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों ने परीक्षा को तत्काल निरस्त करने के साथ-साथ जेपीएससी के पूरे प्रशासनिक ढांचे में सुधारात्मक कदम उठाने की मांग की है। छात्रों का तर्क है कि पारदर्शी न्याय के लिए मामले की जांच केंद्रीय एजेंसियों से कराई जानी चाहिए।

🚫 “सिर्फ जांच काफी नहीं, परीक्षा रद्द होने तक जारी रहेगा अनशन”: प्रदर्शनकारी छात्रों की हुंकार

आंदोलन स्थल से छात्र नेता महतो ने बताया कि उन्होंने हाल ही में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात कर छात्रों का पक्ष और मांगें सरकार के समक्ष रखी थीं।

उन्होंने सीआईडी जांच का स्वागत करते हुए कहा कि केवल औपचारिकता के लिए जांच शुरू करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि परीक्षा को निरस्त किया जाना चाहिए। महतो ने स्पष्ट किया कि जब तक राज्य सरकार परीक्षा रद्द करने और जेपीएससी की कार्यप्रणाली में दूरगामी सुधार लाने की घोषणा नहीं करती, तब तक उनका आमरण अनशन निरंतर जारी रहेगा।

🔍 CBI जांच की मांग और प्राइवेट एजेंसी TDPL की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल

विरोध प्रदर्शन में शामिल विभिन्न छात्र संगठनों का कहना है कि राज्य सरकार इस पूरे प्रकरण की सीबीआई (CBI) से निष्पक्ष जांच कराए।

उनका मानना है कि किसी स्वतंत्र केंद्रीय एजेंसी की जांच से ही दूध का दूध और पानी का पानी हो सकेगा। इसके अतिरिक्त, कई प्रदर्शनकारियों ने परीक्षा का काम संभालने वाली निजी आउटसोर्सिंग एजेंसी ‘TSR डेटा प्रोसेसिंग लिमिटेड’ (TDPL) की भूमिका पर भी गंभीर प्रश्न खड़े किए हैं। छात्रों का आरोप है कि पूर्व के विवादित रिकॉर्ड के बावजूद कंपनी को इतना संवेदनशील जिम्मा सौंपा गया। हालांकि, इन आरोपों की वैधानिक रूप से जांच की जा रही है और फिलहाल किसी न्यायिक संस्था द्वारा कंपनी का दोष सिद्ध नहीं हुआ है।

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