अजब-गजब: बारिश के लिए आंध्र प्रदेश में हुआ अनोखा अनुष्ठान, पत्थर पर बैठा युवक अपने आप घूमने लगा

भारत के ग्रामीण अंचलों में आज भी ऐसी कई प्राचीन और अनूठी परंपराएं जीवित हैं, जो विज्ञान के इस दौर में भी लोगों के लिए गहरी आस्था का केंद्र हैं। ऐसा ही एक हैरान कर देने वाला नजारा आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले में देखने को मिला। जिले के उरावकोंडा कस्बे में स्थित ऐतिहासिक जम्मी अंकलम्मा मंदिर (Jammi Ankalamma Temple) में मानसून की बेरुखी से परेशान किसानों और स्थानीय लोगों ने बारिश की कामना के लिए एक विशेष पूजा-अर्चना की। इस पारंपरिक अनुष्ठान में अविवाहित युवकों द्वारा निभाई गई एक बेहद अनोखी रस्म आकर्षण और कौतूहल का केंद्र बनी रही।

🌾 किसानों की चिंता और पारंपरिक समाधान

देश के अन्नदाता उम्मीद की आस लिए लगातार आसमान की तरफ टकटकी लगाए देख रहे हैं। बुवाई का मुख्य समय बीत जाने के बाद भी उम्मीद के मुताबिक बारिश नहीं होने से किसानों की चिंताएं बढ़ रही हैं। फसलों को सूखने से बचाने के लिए उरावकोंडा में पीढ़ियों से चली आ रही एक अनोखी परंपरा का सहारा लिया गया। इस अनुष्ठान के तहत गांव के सात अविवाहित युवकों ने बारिश लाने का संकल्प लिया और पूरी निष्ठा के साथ पवित्र जल से 108 पात्रों (कलश) से महाअभिषेक किया।

🥥 108 नारियल और नींबू का महा-चढ़ावा

अनुष्ठान के दौरान जम्मी अंकलम्मा देवी को प्रसन्न करने के लिए मंदिर में विशेष आयोजन किया गया। मंदिर परिसर में 108 नारियल फोड़े गए और देवी को 108 रसीले नींबूओं की एक विशेष माला पहनाई गई। इसके अलावा, ज्वार के ढेरों पर पवित्र जलपात्र स्थापित कर उसे हल्दी, केसर और फूलों से सजाया गया, जिसमें 108 के अंक का विशेष महत्व रखा गया।

🌀 चमत्कारिक रस्म: पत्थर पर बैठकर अपने आप घूमने लगा युवक!

इस पूरी पूजा का सबसे मुख्य और रोंगटे खड़े कर देने वाला हिस्सा वह अनोखी रस्म थी, जिसे देखने के लिए भारी संख्या में ग्रामीण एकत्र हुए। मंदिर के प्रांगण में ज्वार के दानों के बीच एक छोटा और गोल पत्थर रखा गया। बारिश की मन्नत मांगने वाला एक युवक जैसे ही उस पत्थर पर बैठा, वह पत्थर और युवक अपने आप गोल-गोल घूमने लगे। युवक को बिना किसी बाहरी सहारे के तेजी से चक्र की तरह घूमते देख वहां मौजूद सभी लोग आश्चर्यचकित रह गए।

🌦️ क्या पत्थर के घूमने से होगी मूसलाधार बारिश?

ग्रामीणों का मानना है कि यदि यह पत्थर रीति-रिवाज के अनुसार सुचारू रूप से घूमता है, तो इसका अर्थ है कि देवी जम्मी अंकलम्मा ने उनकी प्रार्थना स्वीकार कर ली है। लोक मान्यता है कि इस रस्म के सफल होने के बाद क्षेत्र में जल्द ही मूसलाधार बारिश होगी, जिससे खेतों में फसलें लहलहा उठेंगी। इस बार पत्थर के घूमने की घटना के बाद ग्रामीणों में यह उम्मीद जाग गई है कि जल्द ही मानसून की राहत भरी बूंदें बरसेंगी।

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