Lashkar Commander Killed: पाकिस्तान में लश्कर-ए-तैयबा को बड़ा झटका, टॉप कमांडर शेख यूसुफ अफरीदी की गोली मारकर हत्या

पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में लश्कर-ए-तैयबा के सरगना हाफिज सईद के एक और करीबी सहयोगी की अज्ञात बंदूकधारियों ने हत्या कर दी है. रिपोर्ट के मुताबिक, अज्ञात बंदूकधारियों ने खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में शेख यूसुफ अफरीदी की गोली मारकर हत्या कर दी. अफरीदी को लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के एक टॉप कमांडर के रूप में जाना जाता था. सुरक्षा सूत्रों ने इस बात की जानकारी दी. सूत्रों के मुताबिक, ये गोलीबारी अचानक हुई थी. हमलावरों ने लगातार गोलियां चलाईं, जिससे अफरीदी को भागने या कहीं छिपने का कोई मौका ही नहीं मिला. जब तक स्थानीय लोग घटनास्थल पर पहुंचे, तब तक हमलावर वहां से फरार हो चुके थे और प्रांत के ऊबड़-खाबड़ इलाके में कहीं जा चुके थे.

इस घटना ने एक बार फिर इस बात पर रोशनी डाली है कि वे अज्ञात बंदूकधारी कौन हैं, जो खूंखार और टॉप पाकिस्तानी आतंकवादियों को उन्हीं की धरती पर मार गिरा रहे हैं. विशेष रूप से, खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में पिछले एक साल के दौरान हिंसा में भारी बढ़ोतरी देखी गई है. यहां आतंकवादियों और सुरक्षाकर्मियों, दोनों को ही अक्सर निशाना बनाया जाता रहा है. इस हत्या के मामले में हमले के तरीके ने तुरंत ही एक सुनियोजित हत्या होने का संदेह पैदा कर दिया है, हालांकि अधिकारियों ने अफरीदी की हत्या को अभी तक किसी भी समूह से नहीं जोड़ा है.

हासिफ सईद का था कमांडर

सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, शेख यूसुफ अफरीदी लंबे समय से आतंकवादी गतिविधियों में सक्रिय था और उसे लश्कर-ए-तैयबा की संगठनात्मक संरचना में एक प्रमुख व्यक्ति माना जाता था. हाफिज सईद से उसकी निकटता ने उसे उन कमांडरों के दायरे में ला खड़ा किया था, जिन पर हाल के महीनों में दबाव लगातार बढ़ा है.

पाकिस्तान के सुरक्षा सूत्रों ने बताया कि अफरीदी की हत्या एक खास पैटर्न का हिस्सा है. फरवरी 2025 में मौलाना काशिफ अली LeT की राजनीतिक शाखा का प्रमुख था और सईद का साला था उसे खैबर पख्तूनख्वा के स्वाबी में उनके घर पर कुछ अज्ञात हमलावरों ने गोली मार दी थी. ये हमलावर बिना कोई निशान छोड़े भाग निकले थे.

हालांकि, लश्कर के अफरीदी की हत्या को एक बड़ी घटना माना जा रहा है और पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियां हमलावरों का पता लगाने के लिए जांच कर रही हैं. जहां एक ओर LeT पर प्रतिबंध लगा हुआ है, वहीं इसके गुर्गे खैबर पख्तूनख्वा और उससे आगे भी लगातार सक्रिय नजर आते रहे हैं. अक्सर ये लोग देश की आतंकवाद-रोधी इकाइयों और विरोधी उग्रवादी गुटों, दोनों का ही ध्यान अपनी ओर खींचते हैं. स्थानीय सूत्रों के अनुसार, उसकी हत्या से इस क्षेत्र में संगठन की कार्यप्रणाली की श्रृंखला (operational chain) में बाधा पड़ने की संभावना है.

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