जीरापुर/राजगढ़। नगर परिषद जीरापुर में राजस्व उप निरीक्षक के पद पर की गई पदोन्नतियों को लेकर गंभीर विवाद सामने आया है। सहायक राजस्व निरीक्षक लोकेन्द्रसिंह कसारे द्वारा नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग भोपाल को विस्तृत आपत्ति प्रस्तुत कर पूरे मामले में नियम विरुद्ध कार्यवाही, पक्षपात और संभावित भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए हैं।
शिकायत के अनुसार, प्रार्थी लोकेन्द्रसिंह कसारे वर्ष 1988 से सेवा में हैं और वर्तमान में नगर परिषद मक्सी, जिला शाजापुर में पदस्थ हैं। उन्होंने वर्ष 2012 तथा 22 मई 2024 को राजस्व उप निरीक्षक पद पर पदोन्नति के लिए आवेदन किया था।
आरोप है कि वर्ष 2021 में उनकी सहमति के बिना ही उनसे कनिष्ठ कर्मचारी शिवसिंह चौहान (नियुक्ति वर्ष 2003) को पदोन्नति दे दी गई। इस प्रक्रिया में परिषद और पीआईसी को गुमराह कर प्रार्थी की पदस्थापना संबंधी जानकारी सही तरीके से प्रस्तुत नहीं की गई। इस मामले में प्रार्थी उच्च न्यायालय खंडपीठ इंदौर भी पहुंचे, जहां से आवश्यक कार्यवाही के निर्देश दिए गए।
इसके बाद नगर परिषद जीरापुर द्वारा पत्र क्रमांक 1095 दिनांक 01.09.2025 के माध्यम से प्रेसिडेंट इन कौंसिल के प्रस्ताव क्रमांक 174 दिनांक 28.08.2025 की प्रति उपलब्ध कराई गई, जिसमें प्रार्थी के पदोन्नति आवेदन को बिना जांच के निरस्त कर दिया गया, जिसे प्रार्थी ने बड़ी त्रुटि बताया है।
वहीं, प्रार्थी को यह भी जानकारी मिली है कि पुनः एक अन्य कनिष्ठ कर्मचारी ओमकारलाल मण्डलोई (नियुक्ति 02.01.2006) को राजस्व उप निरीक्षक पद पर पदोन्नति देने का प्रस्ताव बिना परिषद के समुचित अवलोकन के पारित कर भोपाल भेजा गया है, जिस पर वर्तमान में विचार किया जा रहा है।
इस पूरे प्रकरण में तत्कालीन और वर्तमान प्रभारी मुख्य नगरपालिका अधिकारी सीएमओ हरिओम शर्मा भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि उनके कार्यकाल में पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाते हुए वरिष्ठता की अनदेखी की गई और कनिष्ठ कर्मचारियों को लाभ पहुंचाने का प्रयास किया गया।
प्रार्थी ने यह भी आरोप लगाया कि सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 6(1) के तहत सितंबर 2024 में जानकारी मांगे जाने के बावजूद न तो रिकॉर्ड का अवलोकन कराया गया और न ही आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराई गई। इसके बाद 10 जनवरी 2025 को अपील करने पर वर्ष 2021 की पदोन्नति से संबंधित जानकारी प्राप्त हुई, जिसमें तथ्यों को गुमराह कर प्रस्ताव पारित करने की बात सामने आई।
इसके अतिरिक्त, प्रार्थी ने अपने पूर्व पदस्थापन काल (1990–2005, नगर परिषद सांवेर, जिला इंदौर) के दौरान लोकायुक्त प्रकरण का भी उल्लेख करते हुए स्पष्ट किया कि उस मामले में उन पर कोई आरोप सिद्ध नहीं हुआ है और न ही उन्हें कोई दंड मिला है, इसलिए उनके विरुद्ध किसी भी प्रकार की आपत्ति उचित नहीं है।
अंत में प्रार्थी ने मांग की है कि जब तक न्यायालयीन प्रकरण का निराकरण नहीं हो जाता, तब तक राजस्व उप निरीक्षक के पद पर किसी भी अन्य कर्मचारी की पदोन्नति पर रोक लगाई जाए। साथ ही, पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर वरिष्ठता के आधार पर उन्हें पदोन्नति प्रदान की जाए।
प्रार्थी ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी आपत्ति पर उचित कार्रवाई नहीं हुई तो वे पुनः उच्च न्यायालय खंडपीठ इंदौर की शरण लेंगे, जिसके समस्त हर्ज-खर्च की जिम्मेदारी नगर परिषद जीरापुर के मुख्य नगरपालिका अधिकारी की होगी।
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